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Wednesday, 7 October 2020

arduino servo moter 1

 #include <Servo.h>


Servo myservo;  // create servo object to control a servo

// twelve servo objects can be created on most boards


int pos = 0;    // variable to store the servo position


void setup() {

  myservo.attach(9);  // attaches the servo on pin 9 to the servo object

}


void loop() {

  for (pos = 0; pos <= 180; pos += 1) { // goes from 0 degrees to 180 degrees

    // in steps of 1 degree

    myservo.write(pos);              // tell servo to go to position in variable 'pos'

    delay(15);                       // waits 15ms for the servo to reach the position

  }

  for (pos = 180; pos >= 0; pos -= 1) { // goes from 180 degrees to 0 degrees

    myservo.write(pos);              // tell servo to go to position in variable 'pos'

    delay(15);                       // waits 15ms for the servo to reach the position

  }

}


8 led pattern with for loop

 int d = 50;           // The higher the number, the slower the timing.


void setup() {


  // use a for loop to initialize each pin as an output:


  for (int Pin = 0; Pin < 8;Pin++) {


    pinMode(Pin, OUTPUT);


  }

}


void loop() {


  // loop from the lowest pin to the highest:


  for (int Pin = 0; Pin < 8; Pin++) {


    // turn the pin on:


    digitalWrite(Pin, HIGH);


    delay(d);


    // turn the pin off:


    digitalWrite(Pin, LOW);


  }


  // loop from the highest pin to the lowest:


  for (int Pin = 7; Pin >= 0; Pin--) {


    // turn the pin on:


    digitalWrite(Pin, HIGH);


    delay(d);


    // turn the pin off:


    digitalWrite(Pin, LOW);


  }

}

8 led pattern arduino program

#8 led pattern

 int d=50;

void setup()

{

  pinMode(0, OUTPUT);

  pinMode(1, OUTPUT);

  pinMode(2, OUTPUT);

  pinMode(3, OUTPUT);

  pinMode(4, OUTPUT);

  pinMode(5, OUTPUT);

  pinMode(6, OUTPUT);

  pinMode(7, OUTPUT);

}


void loop()

{

  digitalWrite(0, HIGH);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d); 

  digitalWrite(0, LOW);

  digitalWrite(1,HIGH);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

   digitalWrite(0, LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2,HIGH);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

   digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,HIGH);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

   digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,HIGH);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

   digitalWrite(0, LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5,HIGH);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

   digitalWrite(0, LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,HIGH);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

   digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,HIGH);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,HIGH);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,HIGH);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, HIGH);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,HIGH);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,HIGH);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2,HIGH);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

  digitalWrite(0,LOW);

  digitalWrite(1,HIGH);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

  digitalWrite(0,HIGH);

  digitalWrite(1, LOW);

  digitalWrite(2, LOW);

  digitalWrite(3,LOW);

  digitalWrite(4,LOW);

  digitalWrite(5, LOW);

  digitalWrite(6,LOW);

  digitalWrite(7,LOW);

  delay(d);

}

   

Friday, 17 November 2017

अच्छी बाते 21

आज कल ये देखा गया है , कुछ लोग ये कहते है की कुछ युवा  देश की संस्कृति  सभ्यता को बदनाम करने में लगे है , खास कर के उस युवा को जो पार्क में अपनी फ्रैंड  के साथ बैठे होते है , या बात कर होते है , हमेसा उसे हिन् भावना से देखते है , साथ ही उसके बारे ये कमेंट करते है की कैसा  परिवार से है , इसको सरम नही ही , लड़की  के साथ पार्क में बैठा है , इसकी संस्कृति सभ्यता  का लाज नही  ,सरे आम समाज को बदनाम कर रहा है | कुछ लोग एसे होते है उसको पाकर कर जबरदस्ती  मंगल सूत्र  पहनावा देते है , या मंदिर में ले जाकर जबर दस्ती शादी करवा देते है , यहाँ तक की कुछ ग्रुप हाथ में मंगल सूत्र लेकर साथ में घूमते है ,और जबरदस्ती शादी करा देते है , और साथ ही साथ उका विडियो उपलोड कर दते है |उस लोग का बस एक ही कहना होता है की हमारी संस्कृति और समाज को बदनाम कर रहा है  ,ये कहा क्या इंसाफ है युवा के साथ | जो आदमी संस्कृति के पीछे ये खेल रच रहे है उसे ही खुद संस्कृति और सभ्यता का ज्ञान नही होता है ,बस उसमे अंधविश्वास होता है |क्योकि उसे जिन्दगी  जीने का रहस्य मालूम नही है , उसे समाज संस्कृति सभ्यता में फर्क मालूम नही होता है , उसे बदलते जिंदगी का लाइफ स्टाइल नही जाता है , वह हकीकत को जानना नही चाहता है , उसके मन में बस एक ही कचरा भरा रहता है , जो लड़के इस तरह बात कर रहे है वह गलत है , बस कानून को हाथ में लेकर मन मर्जी करता है , हर एक चीज के लिए कानून और प्रसासनिक  ब्यवस्था है अपने हाथ में कानून का क्या मतलब , आप यही अपने आपको बतना चाहते है की जो हम कर रहे है वह सही है , जो हमारे लिए सही है वही भारत देश के हर  आदमी सही मानेगे  |ये गलत है , ये यह कहते है ही ये लोग वेस्टर्न कल्चर को भारत में ला कर भारत की संस्कृति को बदनाम कर रह है |अगर हम अपनी संस्कृति को जानते है तो , सबको ये पता है की संस्कृति समय पे पद्लती रहती है , और हमेसा बदलते रहेगा , नए चीज जुटते है ,पुराणी परम्परा ख़तम होते जाते है , बदलाव होते रहता है , दुनिया की हर एक चीज परिवर्तन शील है , जो नही चीज हो , चाहते आस्था से , संस्कृति से हो या सभ्यता से हो सारा परिवर्तन शील है | अब ये कोई कहे की पहले हम चारो धाम की यात्रा करते थे , किसी साधू  की परवचन के लिए दूर जाया करते थे , और आज हम टेलीविज़न  पर ये सब कर लेते थे . | आज से पहले हम अजीब कपरे पहनते थे , और आज हमलोग कुछ अलग तरह के कपरे पहनते है , तो क्या हम हम अपनी परम्परा को बचने के लिए पहले जैसे कपडा पहनने  लगे |पहले किसी बाबा के परवचन सबके लिए फ्री होते थे पर आज हम रूपये देकर सुनने जाते है |पहले कम उम्र में ही बच्चे की शादी हो जाते थे , सती परता भी था ,उस सब को त्याग किये ना , रही शादी की बात को ऑनलाइन लड़के या लड़की को देख जाता है , बात किया जाता है ,उससे सम्पर्क किया जाता है | अब ये कहे कहे की जो चीज भारत की है उसे ही उपयोग करेगे  ,खायेगे , तकनिकी  भी भारत देश का ही उपयोग करेगे , ये समभ है  ये संभव नही है , अब दुसरे देश में में भी भारतीय  संस्कृति  को अपना रहा है  , ये हमरी मानसिकता पे निर्भर करता है , एक उदाहरण के तोर पे कहता ,की जो आदमी गाव में रहता है कितने भी तरह के चाइनीज फ़ूड दीजिये पर वो खाना पसन् नही करेगे , पर कुछ अद्द्मी गाव से जाकर सहर में रहता है उसे चाइनीज खाना अच्छा लगने लगता है , उसे तो खाना खाने से रोक तो नही सकते है |उसे जबरन कहे तुम इसे ही खाओ या कैसा न्याय है , भारत देश अलग अलग जगह संस्कृति है , नार्थ इंडिया के पहनावा  साउथ इंडिया के पहनवा और कहना पीना भी अलग करते है | डेल्ही  , मुंबई , जैसे अधिकतम शादी करने से पहले लड़की और लड़के  एक दुसरे को अछि तरह से जानते है |इसका मतलब ये नही की उसमे देश के लिए संस्कृति और सभ्यता आस्था के लिए सम्मन नही  है | जिस ग्रुप के लोग इस तरह करते है , सायद हो सकता उसके बच्चे भी करते हो तो क्या है , जीबन में बढ़ते उमर के साथ बहुत कुछ सीखना पड़ता है , बहुत कुछ अनुभव होता है |हा जो गलत है उसे समझना बड़े का फर्ज है , न की उसको जबरदस्ती उसपे बोझ  लाध देना | आपलोग तो ग्रुप के आड़  में ये करके चले गये पर लड़की और लड़के की बदनामी को कौन झेलेगा , इसके जिम्मेवार कौन है | खास कर के गाव में येसा येसा घटना देखने को मिलेगा की , दिल को दहला देगा |यहाँ तक की गाव के कुछ लोग मिलकर दर्दनाक तरीके से पिटते पिटते मार देता है , जिन्दा जला देता है , उसके माँ बाप को नही छोरते है जलील किया जाता है , और बंकि लोग गाव के लोग तमसा देखते है , बहुत से विडियो ऑनलाइन मिल जायेगे देखने के लिए |क्यों की गाव के कुछ लोग के कारन दो परिवार की जिन्दगी उजर जाती है |और परसासन भी कुछ नही करते है , खास कर एसे काम करने वाले लोगो पर काननों शक्ति से पेस हो  ,यैषा करने वाले बस एक दो लोग होते है गाव में जो पागल होते है , क्योकि अपने हथ के कारन सबके सामने कर देते सरे आम दर्दनाक काम |

Thursday, 1 December 2016

Acchi bate :-20

आज कल कई युवा पढाई तो करता है पर वह कोई जॉब नही कर पता या तो पढाई के क्षेत्र में सुफलता नही मिल पता है ।खास क्र के गांव के युवा के साथ होता है क्योकि उसके बेस उतने मजबूत नही होते है की वह सफलता हासिल नही कर पाते ,इसका मतलक़ब् यह नही की वह सफल इंसान नही बन सकता है ।जब पढाई छोड़ कुछ करने जाता तो न फिर कितने ताने मिलते है , ताने मारने वाले सांप की फुफकार की तरफ ताने मरते है , की पिताजी इसको पढ़ने शहर भेजे वहाँ पढाई नही मस्ती करता होगा ,न जाने कितने तरह के कमेंट होते रहता ।शुरू में घर से निकलना शर्म जैसा लगता है ,की कोई देख के कुछ कमेंट नही कर दे ।आप कब तक शर्म के मरे मुह को छिपाये रखेंगे ,कब तक घर से बहार निकलने से डरेंगे ।आप ने गलती ही क्या क्या है ,किस बात की दर है ,किस बात की प्रतिष्ठा का दर है ।बस यही न की आप पढाई करने गए और आप sucess नही हुए , इसमें गलती क्या है ।पढ़ते तो आप कोई सरकारी नोकरी करते और क्या बस पैसा के ही लिए ना ही । कोई भी जॉब करते यही न की कुछ रूपये आपको मिलते जिससे आप अपने परिवार की जरूरते को पूरा करते बस यही ना । इसमें डरने और सरमाने की क्या जरुरत है ,नही मिला कोई जॉब तो क्या हुआ , नही मिला सरकारी नोकरी तो क्या हुआ ।क्या इसके बिना हम कुछ नही कर सकते है , आप सारा कुछ कर कर सकते है ।आप अपने मन से भरम निकालिये की हम जॉब कर के सारा कुछ कर सकते है ।इस दुनिया में सभी को जॉब नही मिल सकता है , सभी को सरकारी नोकरी नही मिल सकती है  ।आप सारा भरम छोड़ कर कोई भी काम शुरू कीजिये ,कोई भी काम में श्रम कैसा ,जब रुपया ही कमान है तो काम तो करने होंगे ।भारत में बहुत से लोग है क्या वह सब कोई जॉब ही करते है ,नही न फिर भी तो वह खुसी की जिंदगी जी रहे है ।बहुत से bussinuss man आदमी इंडिया में है तो क्या वह सब पढ़ने में तेज ही थे या फिर सरकारी जब से उतना रुपया कमाया है ।कोई भी बड़ा आदमी एक छोटे से काम से स्टार्ट करके ही  बनते है । काम कीजिये कोई भी छोटा bussinus कीजिये और रूपये कमाइए और अपना और अपने पारीवॉर वाले के लिए कुछ कर के दिखाइए ।कोई भी काम छोटा नही नही होता ,एक छोटा से काम की सुरवात से ही बड़ा काम होने लगता है । जिसको जो बोलना है बोलने दीजिये उसका काम ही बोलना " कोई कुछ नही करता तो भी लोग कहते है की वह बेकार आदमी है ,और कुछ करते है तो फिर भी लोग कहगे की देखो पढ़ लिख कर इसको यही काम मिला है करने के लिए "। इसलिए काम की सुरवात कीजिये ,आप किसी को जबाब मत दीजिये की ,क्योकि आप समझते समझते आपकी जिंदगी बिट जायेगा पर कोई समझेगे नही ।उसके लिए आपको कर के दिखने होंगे , समझाने में टाइम ब्यर्थ मत कीजिये और समय का इंतज़ार कीजिये उसको अपने आप उसको उत्तर मिल जायेगे अब आप कोई काम में sucess होते है ।"सांप अपने मुंह में बिष रहता है और समय के साथ उसके बिष बढ़ते रहते है और वही बिष उसके बिनास के कारन बनते है ।उसी तरह जो लोग हमेशा दूसरे को बुरा भला कमेंट सांप की फुफकार करते है ,उसका भी वही हल होगा ,जब आप sucess होते है ,वही तीखी बात उसको अपने आप अंडर ही अंडर खोखला करते जायेगा जब वह आपको देखेंगे ।
धन्यबाद ।

Thursday, 24 November 2016

अच्छी बातें -19

आजकल बहुत से युवा नशा के लत से परेसान है , वह भी जनता है की यह मेरे लिए कितने हानिकारक है , छोड़ने का हर संभव प्रयास करते है , और कहते की बस आज और कल से छोर देगे , लेकिन कल कभी आता ही नही है ।कल कल करते करते सप्ताह , महीने और शाल बित जाते है पर हम वही के वही रह जाते , नासा करना छूटता नही । ना जाने कितने युवा पीढ़ी रूपये के साथ साथ अपने स्वास्थ को हानि पहुचाते है । जबकि सब को पता है स्वास्थ ही धन है (helth is wealth) | स्मोकिंग , नासा से जल्दी को छुटकारा नही मिलता पर एक ट्रिक आपको बताता हूँ, सायद किसी को फ़ायदा हो जाये । मैं नही कहता की आपके लत 100% छूट जायेगे , पर अगर आप अपने आप में confidence है तो सायद मदद मिल सकता है । साधारण तौर पर किसी को कोई चीज अच्छे लगते है वही चीज किसी को बुरे , कोई आदमी की का दोस्त होता है , वही आदमी किसी के दुश्मन , मतलब ये सारा चीज हमारे दिमाग का है , मन का है । कोई आदमी किसी का दोस्त दुश्मन नही होते बल्कि उसके मन के होते है , अगर मन माना की वह दोस्त है , तो वह दोस्त और मन में दुश्मन तो वह दुश्मन हो जाते है ।मतलब कोई दोस्त आपका है उसमे कुछ बुराई है , या फिर आपके साथ कुछ ऐसा किया हो जो की आपको पसंद नही आया हो , या फिर कोई कारन हो , और आपको गुस्सा आया होगा और उससे नफरत हो जाता है , उससे बात तक नही करना चाहते है ।मतलब आपके मन में बैठ जाता है की यह मेरे लिए अच्छा दोस्त नही है , उसके प्रति आपके मन में घृणा आ जाता है । मतलब की जब आप उसको देखते तो आपको कूद व खुद गुस्सा आने लगता है । इसी तरह आपके मन में स्मोकिंग या नाश का एक sentence बैथ जाता है की इसके पिने से हमारे टेंसन कम होता है , जिसके कारन ये छूट नही पता ।इसलिए इसे  सदा को छोड़ने के लिए इसके बुरे प्रभाव को अपने मन में सोचिये , जैसे की यह हमारे लिए हानिकारक है  , ये कैंसर का कारन है   , ये पिने के बाद और टेंसन दे देता है की आज भी मैंने  5 स्मोकिंग कर ली । ये भूल जाईये के ये हमे टेंसन से मुक्त करता है । जैसे ही आपके  मन ये आना बैथ जायेगे की ये हमारे दुश्मन है , तब से ही नासा के प्रति  आपको घृणा हो जायेगी । जैसे ही आपको उसके प्रति घृणा आया फिर नासा करने के मन नही करेगे ।ये इतना आसान लग रहा है पर आपको अपने आपके आत्म विस्वास से करना होगा ।एक और चीज अंत में बतना चाहता हूँ की , जब आप कोई बुरा काम करते है तो  आपके अंडर से एक आवाज आती है , जिसे आप आत्मा या परमात्मा कह सकते है , वह आपके दिमाग को सन्देश भेजता यह नही करो । यह करना बुरी बात है इसके करने से आपको हानि पहुचेगी ।पर कोई इसपर ध्यान नही देता है । जब आप कुछ गलत  करने जाते है , कितनी  बार सोचते है  की  मुझे नही करना है , लेकिन आपक नकारत्मक विचार हावी होता और आप वह काम क़र देते है  ।वास्तविक में होता क्या है  आपका आत्मा आपके शारीर को नुकसान नही होन देना चाहता है  ।साइंस  की भाषा में एक ऐसा स्वचालित प्रोग्राम जो की हर संभव आपके दिमाग में सिग्नल भेज कर आपको आगाह करता है की ये चीज आपके सरीर को नुकशान  पहुचा सकता ।
धन्यबाद

Thursday, 13 October 2016

Science and technology in Hindi

Science and technology
विज्ञानं हमे ज्ञानबां बनाता है ,लेकिन दशर्न हमे बुद्धिमान बनाता है ।

विज्ञानं की तिन बिधियों है सिद्धांत ,प्रयोग और सिमुलेशन ।

विज्ञानं की बहुत साडी कल्पनायें गलत है ,यह पूरी तरह ठीक है ,यही परिकल्पनाएँ ही सत्य प्राप्ति के झोरेखे है ।

हम किसी वि चीज को पूर्ण ठीक तरीके से परिभाषित नही कर सकते है ,अगर ऐसा करने की कोशिश करे तो हम  भी उस बैचारीक पक्षपात के शिकार हो जायेंगे जिसके सीकर दार्शनिक होते है ।

पर्याप्त रूप के विकसित किसी तकनिकी और जादू में अंतर नही किया जा सकता है ।

सभ्यता की कहानी सार रूप में इंजीनियरिंग की कहानी है वह लम्बा और विकत संघर्स जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिए काम करने के लिए किया गया ।

इंजीनियर इतिहास का निर्माता रहा है और आज भी है ।

वैज्ञानिक इस संसार का ,जैसे ही उस रूप में अध्यन करते है ।इंजीनियर वह संसार बनाता हैं जो कभी था ही नही ।

मशीनी कारन के लिए यह जरुरी है की वह भी मशीन की तरह सोचे ।

इंजीनियरिंग संख्याओं में की जाती है  संख्या के वीना विश्लेषण एक मात्र राय है ।

जिसके बारे में आप बात कर रहे है ,अगर आप उसे माप और संख्या में ब्यक्त कर सकते है तो आप उस विषय में कुछ जानते है ।अगर आप उसे मांप नही सकते है तो आप का ज्ञान थोड़ा बहुत सतही है और अशांतोष जनक है ।

तकनिकी के ऊपर ही तकनीक का निर्माण होता है । हम तकनीक रूप से विकाश नही कर सकते है ,यदि हममे यह समझ नही है की सरल के वीना जटिल का अस्तिव संभव नही है ।

तकनीक और विज्ञानं भी प्रकृतिक में ब्याप्त है कोई इसे बहार से लेकर नही आया है ।

अगर कुछ करने के लिए गलत तरीका है तो किसी न तो यह करना पड़ेगा ।

धर्म कला ,विज्ञानं  वास्तब में एक ही बृक्ष की शाखा और प्रशाखा है ।

विज्ञानं और वैज्ञानिक कार्यों में सफलता असीमित या बड़े संसाधनों का प्रावधान करने से नही मिलती बल्कि यह समस्याओं को बुद्धिमानी और सतर्कता से चुनने से मिलती है , और जो बढ़कर है वह है निरंतर कठोर परिश्रम ।

एक मशीन 50 साधारण मनुष्यों का काम कर सकते है ,पर एक  असाधारण मनुष्यों का काम नही कर सकती है ।
***************************************** तकनिकी का विकाश आदमी के सोच का देन है ।

काम समय में अधिक से अधिक प्रॉडक्ट हो ये भी आदमी की सोच की देन है ।

तकनिकी से से आपस में जुड़े होते है पर वास्तब में वह हमको अपने से दुरी बढाने का काम करते है ।

तकनीक से आदमी की जरूरते पूरा हो सकती है पर वास्तबिक खुसी नही ।

तकनिकी हमे क्षण भंगुर खुसी से सकते है पर वास्तबिक खुसी नही ।

आवश्यकता ही तकनिकी की जननी है ।

आर्टिफिशल intelliance (रोबोट ,कंप्यूटर, atutomation work) हमसे तिब्र सोच और कर सकते है पर उसको भी हमने ही बनाया है ।

तकनीकी से हमे बहुत कुछ आसान हो सकता है पर उसके दुष्यपरिणाम भी घातक है ।
(Altrasound से लिंग ज्ञात करना जिससे लड़की में कमी )

तकनिकी तब तक हमरे सकारत्मक कार्य के लिए और मानब हित के लिए है जब तक वह बैज्ञानिक के पास है ,जैसे ही वह तकनिकी बाजार में ब्यपार के लिए आते है तो वह हमारे लिए घातक हो जाते है ।

तकनीक सिर्फ वही काम कर सकता है जिसके निर्देश पहले हमने दे रखा है ।

तकनीक हमारे अनुशार चलते है न की हम उनके अनुशार ।

तकनीक हमसे अधिक फ़ास्ट काम कर सकता है ,पर उसे और अधिक फ़ास्ट उसमे सुधर कर हम कर  सकते है ।

तकनीक हमारे लिए लाभ करी और हानिकारक दोनों है वह हम पे निर्भर करता है की हम उसका उपयोग कैसे करते है ।

अगर तकनिकी का विकाश नही होगा तो ,आजकल हमारे सभी जरूरत भी पूरा नही हो पायेंगे ।

तकनिकी से हम घातक हथियार बन सकते है पर उसे नष्ट करने वाले मानब ही क्र सकते है ।
तकनीक आदमी की कल्पना का देन है , जैसा हम कल्पना करते है आने वाले समय में वही उपकरण बन जाते है ।

******************************************************************************************