Science and technology
विज्ञानं हमे ज्ञानबां बनाता है ,लेकिन दशर्न हमे बुद्धिमान बनाता है ।
विज्ञानं की तिन बिधियों है सिद्धांत ,प्रयोग और सिमुलेशन ।
विज्ञानं की बहुत साडी कल्पनायें गलत है ,यह पूरी तरह ठीक है ,यही परिकल्पनाएँ ही सत्य प्राप्ति के झोरेखे है ।
हम किसी वि चीज को पूर्ण ठीक तरीके से परिभाषित नही कर सकते है ,अगर ऐसा करने की कोशिश करे तो हम भी उस बैचारीक पक्षपात के शिकार हो जायेंगे जिसके सीकर दार्शनिक होते है ।
पर्याप्त रूप के विकसित किसी तकनिकी और जादू में अंतर नही किया जा सकता है ।
सभ्यता की कहानी सार रूप में इंजीनियरिंग की कहानी है वह लम्बा और विकत संघर्स जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिए काम करने के लिए किया गया ।
इंजीनियर इतिहास का निर्माता रहा है और आज भी है ।
वैज्ञानिक इस संसार का ,जैसे ही उस रूप में अध्यन करते है ।इंजीनियर वह संसार बनाता हैं जो कभी था ही नही ।
मशीनी कारन के लिए यह जरुरी है की वह भी मशीन की तरह सोचे ।
इंजीनियरिंग संख्याओं में की जाती है संख्या के वीना विश्लेषण एक मात्र राय है ।
जिसके बारे में आप बात कर रहे है ,अगर आप उसे माप और संख्या में ब्यक्त कर सकते है तो आप उस विषय में कुछ जानते है ।अगर आप उसे मांप नही सकते है तो आप का ज्ञान थोड़ा बहुत सतही है और अशांतोष जनक है ।
तकनिकी के ऊपर ही तकनीक का निर्माण होता है । हम तकनीक रूप से विकाश नही कर सकते है ,यदि हममे यह समझ नही है की सरल के वीना जटिल का अस्तिव संभव नही है ।
तकनीक और विज्ञानं भी प्रकृतिक में ब्याप्त है कोई इसे बहार से लेकर नही आया है ।
अगर कुछ करने के लिए गलत तरीका है तो किसी न तो यह करना पड़ेगा ।
धर्म कला ,विज्ञानं वास्तब में एक ही बृक्ष की शाखा और प्रशाखा है ।
विज्ञानं और वैज्ञानिक कार्यों में सफलता असीमित या बड़े संसाधनों का प्रावधान करने से नही मिलती बल्कि यह समस्याओं को बुद्धिमानी और सतर्कता से चुनने से मिलती है , और जो बढ़कर है वह है निरंतर कठोर परिश्रम ।
एक मशीन 50 साधारण मनुष्यों का काम कर सकते है ,पर एक असाधारण मनुष्यों का काम नही कर सकती है ।
***************************************** तकनिकी का विकाश आदमी के सोच का देन है ।
काम समय में अधिक से अधिक प्रॉडक्ट हो ये भी आदमी की सोच की देन है ।
तकनिकी से से आपस में जुड़े होते है पर वास्तब में वह हमको अपने से दुरी बढाने का काम करते है ।
तकनीक से आदमी की जरूरते पूरा हो सकती है पर वास्तबिक खुसी नही ।
तकनिकी हमे क्षण भंगुर खुसी से सकते है पर वास्तबिक खुसी नही ।
आवश्यकता ही तकनिकी की जननी है ।
आर्टिफिशल intelliance (रोबोट ,कंप्यूटर, atutomation work) हमसे तिब्र सोच और कर सकते है पर उसको भी हमने ही बनाया है ।
तकनीकी से हमे बहुत कुछ आसान हो सकता है पर उसके दुष्यपरिणाम भी घातक है ।
(Altrasound से लिंग ज्ञात करना जिससे लड़की में कमी )
तकनिकी तब तक हमरे सकारत्मक कार्य के लिए और मानब हित के लिए है जब तक वह बैज्ञानिक के पास है ,जैसे ही वह तकनिकी बाजार में ब्यपार के लिए आते है तो वह हमारे लिए घातक हो जाते है ।
तकनीक सिर्फ वही काम कर सकता है जिसके निर्देश पहले हमने दे रखा है ।
तकनीक हमारे अनुशार चलते है न की हम उनके अनुशार ।
तकनीक हमसे अधिक फ़ास्ट काम कर सकता है ,पर उसे और अधिक फ़ास्ट उसमे सुधर कर हम कर सकते है ।
तकनीक हमारे लिए लाभ करी और हानिकारक दोनों है वह हम पे निर्भर करता है की हम उसका उपयोग कैसे करते है ।
अगर तकनिकी का विकाश नही होगा तो ,आजकल हमारे सभी जरूरत भी पूरा नही हो पायेंगे ।
तकनिकी से हम घातक हथियार बन सकते है पर उसे नष्ट करने वाले मानब ही क्र सकते है ।
तकनीक आदमी की कल्पना का देन है , जैसा हम कल्पना करते है आने वाले समय में वही उपकरण बन जाते है ।
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विज्ञानं हमे ज्ञानबां बनाता है ,लेकिन दशर्न हमे बुद्धिमान बनाता है ।
विज्ञानं की तिन बिधियों है सिद्धांत ,प्रयोग और सिमुलेशन ।
विज्ञानं की बहुत साडी कल्पनायें गलत है ,यह पूरी तरह ठीक है ,यही परिकल्पनाएँ ही सत्य प्राप्ति के झोरेखे है ।
हम किसी वि चीज को पूर्ण ठीक तरीके से परिभाषित नही कर सकते है ,अगर ऐसा करने की कोशिश करे तो हम भी उस बैचारीक पक्षपात के शिकार हो जायेंगे जिसके सीकर दार्शनिक होते है ।
पर्याप्त रूप के विकसित किसी तकनिकी और जादू में अंतर नही किया जा सकता है ।
सभ्यता की कहानी सार रूप में इंजीनियरिंग की कहानी है वह लम्बा और विकत संघर्स जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिए काम करने के लिए किया गया ।
इंजीनियर इतिहास का निर्माता रहा है और आज भी है ।
वैज्ञानिक इस संसार का ,जैसे ही उस रूप में अध्यन करते है ।इंजीनियर वह संसार बनाता हैं जो कभी था ही नही ।
मशीनी कारन के लिए यह जरुरी है की वह भी मशीन की तरह सोचे ।
इंजीनियरिंग संख्याओं में की जाती है संख्या के वीना विश्लेषण एक मात्र राय है ।
जिसके बारे में आप बात कर रहे है ,अगर आप उसे माप और संख्या में ब्यक्त कर सकते है तो आप उस विषय में कुछ जानते है ।अगर आप उसे मांप नही सकते है तो आप का ज्ञान थोड़ा बहुत सतही है और अशांतोष जनक है ।
तकनिकी के ऊपर ही तकनीक का निर्माण होता है । हम तकनीक रूप से विकाश नही कर सकते है ,यदि हममे यह समझ नही है की सरल के वीना जटिल का अस्तिव संभव नही है ।
तकनीक और विज्ञानं भी प्रकृतिक में ब्याप्त है कोई इसे बहार से लेकर नही आया है ।
अगर कुछ करने के लिए गलत तरीका है तो किसी न तो यह करना पड़ेगा ।
धर्म कला ,विज्ञानं वास्तब में एक ही बृक्ष की शाखा और प्रशाखा है ।
विज्ञानं और वैज्ञानिक कार्यों में सफलता असीमित या बड़े संसाधनों का प्रावधान करने से नही मिलती बल्कि यह समस्याओं को बुद्धिमानी और सतर्कता से चुनने से मिलती है , और जो बढ़कर है वह है निरंतर कठोर परिश्रम ।
एक मशीन 50 साधारण मनुष्यों का काम कर सकते है ,पर एक असाधारण मनुष्यों का काम नही कर सकती है ।
***************************************** तकनिकी का विकाश आदमी के सोच का देन है ।
काम समय में अधिक से अधिक प्रॉडक्ट हो ये भी आदमी की सोच की देन है ।
तकनिकी से से आपस में जुड़े होते है पर वास्तब में वह हमको अपने से दुरी बढाने का काम करते है ।
तकनीक से आदमी की जरूरते पूरा हो सकती है पर वास्तबिक खुसी नही ।
तकनिकी हमे क्षण भंगुर खुसी से सकते है पर वास्तबिक खुसी नही ।
आवश्यकता ही तकनिकी की जननी है ।
आर्टिफिशल intelliance (रोबोट ,कंप्यूटर, atutomation work) हमसे तिब्र सोच और कर सकते है पर उसको भी हमने ही बनाया है ।
तकनीकी से हमे बहुत कुछ आसान हो सकता है पर उसके दुष्यपरिणाम भी घातक है ।
(Altrasound से लिंग ज्ञात करना जिससे लड़की में कमी )
तकनिकी तब तक हमरे सकारत्मक कार्य के लिए और मानब हित के लिए है जब तक वह बैज्ञानिक के पास है ,जैसे ही वह तकनिकी बाजार में ब्यपार के लिए आते है तो वह हमारे लिए घातक हो जाते है ।
तकनीक सिर्फ वही काम कर सकता है जिसके निर्देश पहले हमने दे रखा है ।
तकनीक हमारे अनुशार चलते है न की हम उनके अनुशार ।
तकनीक हमसे अधिक फ़ास्ट काम कर सकता है ,पर उसे और अधिक फ़ास्ट उसमे सुधर कर हम कर सकते है ।
तकनीक हमारे लिए लाभ करी और हानिकारक दोनों है वह हम पे निर्भर करता है की हम उसका उपयोग कैसे करते है ।
अगर तकनिकी का विकाश नही होगा तो ,आजकल हमारे सभी जरूरत भी पूरा नही हो पायेंगे ।
तकनिकी से हम घातक हथियार बन सकते है पर उसे नष्ट करने वाले मानब ही क्र सकते है ।
तकनीक आदमी की कल्पना का देन है , जैसा हम कल्पना करते है आने वाले समय में वही उपकरण बन जाते है ।
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