किचर मे पत्थर फेकिएगा तो किचर आपको ही पड़ेगे ।
~
आज कला के पढ़े लिखे युवा भी लड़ाई झगड़े और मर पिट के लिए तैयार हो जाते है ,वो भी उससे जिसकी कोई औकाद नही है ,जिसका कोई बैकग्राउंड नही है , जिसकी कोई इज्जत नही है , वो रोड छाप होते है ,इस तरह के आदमी से भूल कर भी कभी नही उलझने और बकवास करने चाहिए । जैसे रिक्शा चालक , रोड पे गाड़ी चलने वाले ड्राईवर और खलासी , रेलवे स्टेशन के पास दुकान करने वाले , कोठी , और फिर लफंगे सब जो रोड पे अवरगिरि करने वाले (इस तरह के लड़के सब के कुछ बेक ग्राउंड नही होते है , रोड पे रहना ,कमेंट पास करना , कार्ड खेलना जुवा खेलना यही उन लोग की पहचान है , बात बात में आपस में गली गौलोज करना ,देख के ही पता लग जायेंगे ) और बहुत कुछ है ,इस तरह के आदमी के कभी नही मुह लगाना चाहिए । मैंने बहुत को देखा है , हाथापाई करते , इस सब की क्या औकात ह।ै हमेसा रोड पे रहता ,हमेशा आप देखिएगा की इस सब के आदमी से हमेसा दिन में दो तिन बार लड़ाई ,गली गौलोज करते आपको भी मिल जायेगे ।वो सब ऐसे माहौल में रहकर ,हमेसा मुह से कुछ अपशब्द निकाल ही देता है , वो ये नही देखता की सामने वाले कैसा आदमी है , यहाँ तक तो अगर कोई बस में बैथ गए और उसके पास रूपये नही है या छुट्टे नही है ,बस से उतार देते है । अगर कुछ आप बोलेगे तो आपको ही उल्टा जबाब मिलते रहेगा ।उस टाइम तो सब गुस्से से आग बाबुल हो जाता है कोई गुस्से को बर्दास्त कर लेता है ,कोई उसे दो चार झापड़ लगा देता है । बात यह है की आप दो झापड़ लगा दिए उसको कोई फर्क नही परेगा , पर आपको अगर कुछ बोल देता है ,न जाने कब तक दिमाग में टेंसन रहता है , आप ये सोचते की वो जिसकी कोई औकात नही है वो हमको ऐसा बोल दिया । यहाँ तक तो देखे है लड़ाई के लिए भिर जाता है , अब इज्जत उसकी नही आपकी ख़राब होगी इतने आदमी के बिच में कुछ बोलना , अगल बगल के आदमी देखने लगते है ,की किस बात के बात लेकर लड़ाई हुआ ।आपको वो बात कितने दिनों तक टेंसन देते रहेगा । उसको तो कोई फर्क नही परेगा , क्योकि उकसा तो डेली का रूटिंग हो गया है , किसी न किसी से लड़ाई करना , बहस करना । उसे थोरे इज्जत प्रतिष्ठा का कोई दर है , डेली उकसा यही काम है ।पर आप तो कभी कभी जाते है , आपकी एक इज्जत प्रतिष्ठा होती है ।रिक्शा वाले के साथ ऐसा ऐसा घटना हो जाता है की अगर थोड़ी दूर आगे ,या गली में चलने को बोल दिए न जाने क्या क्या बोलने लगेगा , इतने रूपये में यही तक ,अब हम आगे नही जा सकते है , गली में जायेगे तो इतने रूपये और लेगें , उस टाइम सभी को बहुत गुस्सा आता है , किसी का मन करता की उसको दो झापड़ लगा दे , कुछ तो लगा भी देता है , अगर आपके पास थोड़ा सामान है तो और नाटक स्टार्ट कर देता है ,अब हम आगे नही जायेगा , आप यही तक बोले थे उस समय और रूपये माँगने लगते है । अब क्या कीजियेगा रोडछाप रोड जैसे उसके बिचार होते है । इसी तरह कुछ दूकानदार वाले होते है , बेचने टाइम कितने मोटीवेट करते है , इतने दिन की गैरन्टी ,जब कुछ खराबी हो जाये तो ,फिर उसका नाटक स्टार्ट ,कल आना परसो आना ,आज स्टाप नही नही ,compnay वाले से बात नही हुआ है , इतने बार आपको बुलाएंगे की सबको गुस्सा आ जाता है । उस टाइम तो मन करता इसको बहुत पिटाई करे ।आखिर कार मजबूरी में बार बार जाना पार्ट है । इसी तारह स्टेशन के बगल के दूकानदार का जयदा बढ़ा के प्राइस बोलता ,मजबूरी में हमको लेना पड़ता है ।आपको बहुत बहुत मिल जायेगे ऐसे ।
" इसतरह के आदमी से अगर आप मुह लगते है ,इज्जत उसकी नही आपकी ही जायेगी "
अगर इस तरह के आदमी को सबक सिखाना है ,समय का इंतजार कीजिये , और आप जयदा की संख्या में हो और उसे ऐसा डराये ।4,5 के ग्रुप में जाइये और जमकर डोज दीजिये ,इतना डरा दीजिये की आने वाले समय में किसी और के साथ ऐसा न करे ।लेकिन सीघ्र कोई काम मत कीजिये ,समय का प्रतीक्षा कीजिये और जमकर बरिशिए । ताकि उसकी औकात पता चल जाये ,और दोबारा किसी कस्टमर से मुह फट हो कर बात न करे । अगर सीघ्र कोई काम करते है तो परेशानी आपकी बढेगी , सायद कोई काम से आप जा रहे है तो वो काम छूट जाये ऐसे झमेले में । अकेले मत करिये ग्रुप में ताकि आपका दबदबा उसपे बना रहे ।मर पिट मत कीजिये ,बस धमाका के छोर दीजिये ।
मैं यह नही कहता की सारा कोई ऐसा ही होता है। पर कुछ होते है जरूर,ये आपको भी पता है और हमलोगों को भी।
धन्यबाद ,ये हमारे अपने विचार है ।
हो सकता मैं गलत भी हो सकता हूँ ।
**************************************
लक(भाग्य) और मेहनत ?
लक और मेहनत के सबके अपना अपना मनना होता है ।
मैं क्या मानता हूँ ,वो मैं आपको बताता हूँ
जब कोई ब्यक्ति विषेस या किसी संस्था द्वरा कोई चीज प्रतियोगिता किया जाता है तो वह आपका लक नही आपके मेहनत काम आएगा । जो काम आपको पहले से पता है वह लक नही मेहनत काम आता है ,और जिस काम के बारे में पहले से कुछ पता नही पूरी तरह से अनजान है वह काम एक एक हो जाना वह लक है ।जैसे कही जा रहे हो और आपको लॉटरी मिल जाये ,या रूपये से भरे बैग मिल जाये , या कोई काम अनजाने पूरा हो जाना ,कोई आपको रस्ते में एक अच्छी लड़की मिल जाये और आपका उससे बात होने लगे ये सब लक होता है ,मतलब कोई अच्छा काम अस्कमात हो जाये तो उसे लक कहते है और अस्कमात बुरा काम हो जाये तो उसे बैडलक कहते है ,यही होता है सभी के साथ। मेहनत का लक से कोई लेना देना नही है , जब आप को प्रतियोगिता परीक्षा देने जा रहे है तो आपको वहाँ आपका मेहनत काम आएगा , मतलब जो काम करने का आपको पूर्व जानकारी है वह लक का कोई लेना देना नही है , बस आपका मेहनत काम आएगा ।अगर कोई अनपढ़ को प्रतियोगिता परीक्षा में बैठा दिया जाये तो क्या उकसा लक काम आएगा ,कदापि नही । हाँ जो मेहनत कर के गया होगा उसी से प्रश्न हल होएंगे जितने मेहनत किये होंगे जितने हल होंगे ।कोई निशानेबाज अगर अपने पाँच लक्ष्य को सधता है तो पाँच को भेद सकता है , क्यकी वह पहले से मेहनत किया है ।किसी अन्य आदमी को दे दिया जाये भेदने के लिए तो सायद कोई न लगे या फिर एक लग जाये पर वह पाँच के पाँच अपने लक्ष्य पर नही भेद सकेंगे ।
बस मेरा मनना है
" जब कोई काम आपको पूर्व पता है उस काम को करना है उसके लिए मेहनत काम आते है ।और कोई काम या फिर कुछ और जिसका आपको पूर्व जानकारी नही है पर वह काम हो जाता है उसे लक कहते है "
इसलिए अपने लक पर नही अपने मेहनत पर विस्वास् कीजिये ।
अपने लक के भरोशे मत बैठिये ,मेहनत कीजिये और सफलता जरूर मिलेँगे ।
जिस काम लिए आप भाग्य के भरोशे बैठे वह अपने आप कभी नही पूरा होंगे क्योंकि वह काम आपको पहले से पता है ।
धन्यबाद।
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आज कला के पढ़े लिखे युवा भी लड़ाई झगड़े और मर पिट के लिए तैयार हो जाते है ,वो भी उससे जिसकी कोई औकाद नही है ,जिसका कोई बैकग्राउंड नही है , जिसकी कोई इज्जत नही है , वो रोड छाप होते है ,इस तरह के आदमी से भूल कर भी कभी नही उलझने और बकवास करने चाहिए । जैसे रिक्शा चालक , रोड पे गाड़ी चलने वाले ड्राईवर और खलासी , रेलवे स्टेशन के पास दुकान करने वाले , कोठी , और फिर लफंगे सब जो रोड पे अवरगिरि करने वाले (इस तरह के लड़के सब के कुछ बेक ग्राउंड नही होते है , रोड पे रहना ,कमेंट पास करना , कार्ड खेलना जुवा खेलना यही उन लोग की पहचान है , बात बात में आपस में गली गौलोज करना ,देख के ही पता लग जायेंगे ) और बहुत कुछ है ,इस तरह के आदमी के कभी नही मुह लगाना चाहिए । मैंने बहुत को देखा है , हाथापाई करते , इस सब की क्या औकात ह।ै हमेसा रोड पे रहता ,हमेशा आप देखिएगा की इस सब के आदमी से हमेसा दिन में दो तिन बार लड़ाई ,गली गौलोज करते आपको भी मिल जायेगे ।वो सब ऐसे माहौल में रहकर ,हमेसा मुह से कुछ अपशब्द निकाल ही देता है , वो ये नही देखता की सामने वाले कैसा आदमी है , यहाँ तक तो अगर कोई बस में बैथ गए और उसके पास रूपये नही है या छुट्टे नही है ,बस से उतार देते है । अगर कुछ आप बोलेगे तो आपको ही उल्टा जबाब मिलते रहेगा ।उस टाइम तो सब गुस्से से आग बाबुल हो जाता है कोई गुस्से को बर्दास्त कर लेता है ,कोई उसे दो चार झापड़ लगा देता है । बात यह है की आप दो झापड़ लगा दिए उसको कोई फर्क नही परेगा , पर आपको अगर कुछ बोल देता है ,न जाने कब तक दिमाग में टेंसन रहता है , आप ये सोचते की वो जिसकी कोई औकात नही है वो हमको ऐसा बोल दिया । यहाँ तक तो देखे है लड़ाई के लिए भिर जाता है , अब इज्जत उसकी नही आपकी ख़राब होगी इतने आदमी के बिच में कुछ बोलना , अगल बगल के आदमी देखने लगते है ,की किस बात के बात लेकर लड़ाई हुआ ।आपको वो बात कितने दिनों तक टेंसन देते रहेगा । उसको तो कोई फर्क नही परेगा , क्योकि उकसा तो डेली का रूटिंग हो गया है , किसी न किसी से लड़ाई करना , बहस करना । उसे थोरे इज्जत प्रतिष्ठा का कोई दर है , डेली उकसा यही काम है ।पर आप तो कभी कभी जाते है , आपकी एक इज्जत प्रतिष्ठा होती है ।रिक्शा वाले के साथ ऐसा ऐसा घटना हो जाता है की अगर थोड़ी दूर आगे ,या गली में चलने को बोल दिए न जाने क्या क्या बोलने लगेगा , इतने रूपये में यही तक ,अब हम आगे नही जा सकते है , गली में जायेगे तो इतने रूपये और लेगें , उस टाइम सभी को बहुत गुस्सा आता है , किसी का मन करता की उसको दो झापड़ लगा दे , कुछ तो लगा भी देता है , अगर आपके पास थोड़ा सामान है तो और नाटक स्टार्ट कर देता है ,अब हम आगे नही जायेगा , आप यही तक बोले थे उस समय और रूपये माँगने लगते है । अब क्या कीजियेगा रोडछाप रोड जैसे उसके बिचार होते है । इसी तरह कुछ दूकानदार वाले होते है , बेचने टाइम कितने मोटीवेट करते है , इतने दिन की गैरन्टी ,जब कुछ खराबी हो जाये तो ,फिर उसका नाटक स्टार्ट ,कल आना परसो आना ,आज स्टाप नही नही ,compnay वाले से बात नही हुआ है , इतने बार आपको बुलाएंगे की सबको गुस्सा आ जाता है । उस टाइम तो मन करता इसको बहुत पिटाई करे ।आखिर कार मजबूरी में बार बार जाना पार्ट है । इसी तारह स्टेशन के बगल के दूकानदार का जयदा बढ़ा के प्राइस बोलता ,मजबूरी में हमको लेना पड़ता है ।आपको बहुत बहुत मिल जायेगे ऐसे ।
" इसतरह के आदमी से अगर आप मुह लगते है ,इज्जत उसकी नही आपकी ही जायेगी "
अगर इस तरह के आदमी को सबक सिखाना है ,समय का इंतजार कीजिये , और आप जयदा की संख्या में हो और उसे ऐसा डराये ।4,5 के ग्रुप में जाइये और जमकर डोज दीजिये ,इतना डरा दीजिये की आने वाले समय में किसी और के साथ ऐसा न करे ।लेकिन सीघ्र कोई काम मत कीजिये ,समय का प्रतीक्षा कीजिये और जमकर बरिशिए । ताकि उसकी औकात पता चल जाये ,और दोबारा किसी कस्टमर से मुह फट हो कर बात न करे । अगर सीघ्र कोई काम करते है तो परेशानी आपकी बढेगी , सायद कोई काम से आप जा रहे है तो वो काम छूट जाये ऐसे झमेले में । अकेले मत करिये ग्रुप में ताकि आपका दबदबा उसपे बना रहे ।मर पिट मत कीजिये ,बस धमाका के छोर दीजिये ।
मैं यह नही कहता की सारा कोई ऐसा ही होता है। पर कुछ होते है जरूर,ये आपको भी पता है और हमलोगों को भी।
धन्यबाद ,ये हमारे अपने विचार है ।
हो सकता मैं गलत भी हो सकता हूँ ।
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लक(भाग्य) और मेहनत ?
लक और मेहनत के सबके अपना अपना मनना होता है ।
मैं क्या मानता हूँ ,वो मैं आपको बताता हूँ
जब कोई ब्यक्ति विषेस या किसी संस्था द्वरा कोई चीज प्रतियोगिता किया जाता है तो वह आपका लक नही आपके मेहनत काम आएगा । जो काम आपको पहले से पता है वह लक नही मेहनत काम आता है ,और जिस काम के बारे में पहले से कुछ पता नही पूरी तरह से अनजान है वह काम एक एक हो जाना वह लक है ।जैसे कही जा रहे हो और आपको लॉटरी मिल जाये ,या रूपये से भरे बैग मिल जाये , या कोई काम अनजाने पूरा हो जाना ,कोई आपको रस्ते में एक अच्छी लड़की मिल जाये और आपका उससे बात होने लगे ये सब लक होता है ,मतलब कोई अच्छा काम अस्कमात हो जाये तो उसे लक कहते है और अस्कमात बुरा काम हो जाये तो उसे बैडलक कहते है ,यही होता है सभी के साथ। मेहनत का लक से कोई लेना देना नही है , जब आप को प्रतियोगिता परीक्षा देने जा रहे है तो आपको वहाँ आपका मेहनत काम आएगा , मतलब जो काम करने का आपको पूर्व जानकारी है वह लक का कोई लेना देना नही है , बस आपका मेहनत काम आएगा ।अगर कोई अनपढ़ को प्रतियोगिता परीक्षा में बैठा दिया जाये तो क्या उकसा लक काम आएगा ,कदापि नही । हाँ जो मेहनत कर के गया होगा उसी से प्रश्न हल होएंगे जितने मेहनत किये होंगे जितने हल होंगे ।कोई निशानेबाज अगर अपने पाँच लक्ष्य को सधता है तो पाँच को भेद सकता है , क्यकी वह पहले से मेहनत किया है ।किसी अन्य आदमी को दे दिया जाये भेदने के लिए तो सायद कोई न लगे या फिर एक लग जाये पर वह पाँच के पाँच अपने लक्ष्य पर नही भेद सकेंगे ।
बस मेरा मनना है
" जब कोई काम आपको पूर्व पता है उस काम को करना है उसके लिए मेहनत काम आते है ।और कोई काम या फिर कुछ और जिसका आपको पूर्व जानकारी नही है पर वह काम हो जाता है उसे लक कहते है "
इसलिए अपने लक पर नही अपने मेहनत पर विस्वास् कीजिये ।
अपने लक के भरोशे मत बैठिये ,मेहनत कीजिये और सफलता जरूर मिलेँगे ।
जिस काम लिए आप भाग्य के भरोशे बैठे वह अपने आप कभी नही पूरा होंगे क्योंकि वह काम आपको पहले से पता है ।
धन्यबाद।
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