प्रकृति:-
दुनिया में जितने भी महान बैज्ञानिक बने है वह हमेशा प्राकृति से जुड़े रहे है
बैज्ञानिक उसी चीज की खोज करते है जो प्रकृति में पहले से बिद्दमान है ।
हम प्रकृति के रहस्य को तभी उजागर कर सकते है जब हम प्रकृति के साथ रहते है और उसे जानने की कोशिस करते है ।
पूरा ब्रह्माण्ड रहस्य से भरा परा है अभी तक हम नगण्य के बराबर ही पर्दा उठा है ।
जब कोई प्रकृति की रहस्य जानने की कोसिस करते है उसे सफलता अवश्य मिलती है ।
प्रकृति से जुड़ कर ही हम नई तकनिकी को बिकसित कर सकते है ।
जब कोई प्रकृति में बिद्दमन् ऊर्जा के अखण्ड स्रोत वाले प्रदार्थ की खोज करते है तो वह मानव के हित और सकारत्मक काम के लिए होता है । पर वह इंसान के विरुद्ध ही उपयोग के लिए करते है ।
नव मछली से , विवान पक्षी से न जाने कितने चीज की खोज हुई है वह प्रकृति का ही देन है ।
हम प्रकृति के महाप्रलय का पूर्व अनुमान लगा सकते है पर उसको रोक नही सकते है ।
हम आज है कल नही रहेगें ,पर प्रकृति पहले से है और आगे भी रहेगें ही ।
हम अपने फायदे के लिए प्रकृति को क्षति पंहुचा रहे है पर वस्तिबिक में वो हमारी ही क्षति है ।
प्रकृति ने सभी को सामान चीज दिए है उपयोग के लिए । पर वह जब जाती ,मजहब राष्ट के लिए आपस में लड़ते है तो वह इन्सानियत को ही हानि पहुचते है ।
हमारे लिए स्कूल ,घर ,देश समाज के हम ही कानून हम लोग ही बनाते है ,तोड़ते है तथा उसमे सुधार करते है ।पर प्रकृति का नियम सभी के लिए सामान है ,उसे कोई तोर नही सकता न ही उसमे कोई बदलाव कर सकता है ।
दुनिया में जितने भी महान बैज्ञानिक बने है वह हमेशा प्राकृति से जुड़े रहे है
बैज्ञानिक उसी चीज की खोज करते है जो प्रकृति में पहले से बिद्दमान है ।
हम प्रकृति के रहस्य को तभी उजागर कर सकते है जब हम प्रकृति के साथ रहते है और उसे जानने की कोशिस करते है ।
पूरा ब्रह्माण्ड रहस्य से भरा परा है अभी तक हम नगण्य के बराबर ही पर्दा उठा है ।
जब कोई प्रकृति की रहस्य जानने की कोसिस करते है उसे सफलता अवश्य मिलती है ।
प्रकृति से जुड़ कर ही हम नई तकनिकी को बिकसित कर सकते है ।
जब कोई प्रकृति में बिद्दमन् ऊर्जा के अखण्ड स्रोत वाले प्रदार्थ की खोज करते है तो वह मानव के हित और सकारत्मक काम के लिए होता है । पर वह इंसान के विरुद्ध ही उपयोग के लिए करते है ।
नव मछली से , विवान पक्षी से न जाने कितने चीज की खोज हुई है वह प्रकृति का ही देन है ।
हम प्रकृति के महाप्रलय का पूर्व अनुमान लगा सकते है पर उसको रोक नही सकते है ।
हम आज है कल नही रहेगें ,पर प्रकृति पहले से है और आगे भी रहेगें ही ।
हम अपने फायदे के लिए प्रकृति को क्षति पंहुचा रहे है पर वस्तिबिक में वो हमारी ही क्षति है ।
प्रकृति ने सभी को सामान चीज दिए है उपयोग के लिए । पर वह जब जाती ,मजहब राष्ट के लिए आपस में लड़ते है तो वह इन्सानियत को ही हानि पहुचते है ।
हमारे लिए स्कूल ,घर ,देश समाज के हम ही कानून हम लोग ही बनाते है ,तोड़ते है तथा उसमे सुधार करते है ।पर प्रकृति का नियम सभी के लिए सामान है ,उसे कोई तोर नही सकता न ही उसमे कोई बदलाव कर सकता है ।
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