:-गलती कोई भी कर सकता है :-
गलती करना मनुष्य का स्वाभाब है । एक बार गलती करके ,बार बार फिर वही गलती करना ,स्वभाब की सहजता नहीं माना जा सकता है । इसे चरित्र का दोष माना जाता है । जीबन में हमारि सफलता इस पर निर्भर करती है की हम् अपनी गलती से कितना सीखते है ।गलती की पुनवर्ती न हो ,इसके लिए हम कितना साबधान रहते है ।किसी गलती के लिए यह कहना की 'ठीक है ,गलती हो गई तो क्या हुआ ?लापरवाह की निशानी है । गलती की इस उपेक्षा के बड़े दूरगामी प्राभाव होते है और तब हम यह याद नही रख पाते है की यह हमारी किस गलती का फल है ।इसलिए गलती होने पर अच्छा यही होता है की हम उससे कुछ सीखे ।
गांधीजी कहते थे -गलतियों करके ,उनको मंजूर करके ,उन्हें सुधार करके ही मैं आगे बढ़ सकता हूँ। ठोकर लगे और दर्द उठे तभी तो मैं कुछ पता हू। अगर हम गलतियों को शिक्षक मने तो हम बहुत कुछ सिख सकते है ।
" गलती ज्ञान की शिक्षा है ।जब तुम गलती करो तो उसे बहुत देर तक मत देखो । उसके कारन को ले लो और आगे की ओर देखो ।भूत बदला नही जा सकता है,भविस्य अभी भी तुम्हारे हाथ में है "
गलती करना मनुष्य का स्वाभाब है । एक बार गलती करके ,बार बार फिर वही गलती करना ,स्वभाब की सहजता नहीं माना जा सकता है । इसे चरित्र का दोष माना जाता है । जीबन में हमारि सफलता इस पर निर्भर करती है की हम् अपनी गलती से कितना सीखते है ।गलती की पुनवर्ती न हो ,इसके लिए हम कितना साबधान रहते है ।किसी गलती के लिए यह कहना की 'ठीक है ,गलती हो गई तो क्या हुआ ?लापरवाह की निशानी है । गलती की इस उपेक्षा के बड़े दूरगामी प्राभाव होते है और तब हम यह याद नही रख पाते है की यह हमारी किस गलती का फल है ।इसलिए गलती होने पर अच्छा यही होता है की हम उससे कुछ सीखे ।
गांधीजी कहते थे -गलतियों करके ,उनको मंजूर करके ,उन्हें सुधार करके ही मैं आगे बढ़ सकता हूँ। ठोकर लगे और दर्द उठे तभी तो मैं कुछ पता हू। अगर हम गलतियों को शिक्षक मने तो हम बहुत कुछ सिख सकते है ।
" गलती ज्ञान की शिक्षा है ।जब तुम गलती करो तो उसे बहुत देर तक मत देखो । उसके कारन को ले लो और आगे की ओर देखो ।भूत बदला नही जा सकता है,भविस्य अभी भी तुम्हारे हाथ में है "
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