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Friday, 18 December 2015

वाई-फ़ाई से 100 गुना तेज़ है लाई-फ़ाई

एलईडी बल्बImage copyrightThinkstock
अब डेटा ट्रांसफर के लिए ऐसी तकनीक आ चुकी है जो वाई-फ़ाई के मुक़ाबले 100 गुना तेज़ है.
और इस तकनीक को विकसित करने वाले हैं भारतीय तकनीशियन. लाई-फ़ाई का इसी सप्ताह एस्तोनिया के टालिन में परीक्षण किया गया.
लाई-फ़ाई से वाई-फ़ाई के मुक़ाबले आप 100 गुना तेज़ इंटरनेट चला सकते हैं और इसकी रफ़्तार एक गीगाबिट प्रति सेकेंड तक हो सकती है.
स्टार्टअप कंपनी वेलमेनी के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक सोलंकी ने बीबीसी को बताया कि यह तकनीक कॉल ड्रॉप जैसी समस्याओं के लिए रामबाण साबित हो सकती है.
दीपक सोलंकीImage copyrightDeepak Solanki
सोलंकी ने बताया कि उनकी कंपनी एस्तोनिया में पंजीकृत है लेकिन इसकी पूरी टीम भारतीय है.
यह पूछने पर कि क्या उन्हें भारत में कोई निवेशक नहीं मिला, सोलंकी कहते हैं कि ढाई साल पहले उन्होंने कोशिश की थी लेकिन यहां निवेशकों ने इसे कपोल कल्पना बताकर नकार दिया था.
लाई-फ़ाई चलाने के लिए आपको चाहिए बिजली का एक स्रोत जैसे एलईडी बल्ब, इंटरनेट कनेक्शन और एक फ़ोटो डिटेक्टर.
वेलमेनी ने एक गीगाबिट प्रति सेकेंड की रफ़्तार से डेटा भेजने के लिए एक लाई-फ़ाई बल्ब का इस्तेमाल किया. परीक्षण में पता चला कि सैद्धांतिक तौर पर यह रफ़्तार 224 गीगाबिट प्रति सेकेंड तक हो सकती है.
वाईफ़ाईImage copyrightthinkstock
यह परीक्षण एक ऑफ़िस में किया गया ताकि कर्मचारी इंटरनेट चला सकें. साथ ही एक औद्योगिक क्षेत्र में भी इसका परीक्षण हुआ जहां इसने एक स्मार्ट लाइटिंग सॉल्यूशन मुहैया कराया.
सोलंकी के मुताबिक़ यह तकनीक तीन से चार साल में उपभोक्ताओं तक पहुंच जाएगी.
उन्होंने कहा कि लाई-फ़ाई के इस्तेमाल के लिए मोबाइल पर एक डिवाइस लगानी होगी पर भविष्य में यह वाई-फ़ाई और ब्लूटूथ की तरह मोबाइल में ही इनबिल्ट होगी.
जहां रेडियो तरंगों के लिए स्पेक्ट्रम की सीमा है, वहीं विज़िबल लाइट स्पेक्ट्रम 10,000 गुना ज़्यादा व्यापक है. इसका मतलब यह है कि इसकी निकट भविष्य में खत्म होने की संभावना नहीं है.
मोबाइल टावरImage copyrightAgencies
इसमें सूचना को लाइट पल्सेज़ में एन्कोड किया जा सकता है जैसे रिमोट कंट्रोल में होता है.
एलईडी ब्रॉडबैंड कनेक्शन के लिए पर्याप्त डेटा ट्रांसमिट करने में सक्षम है और फिर भी यह सामान्य दूधिया रोशनी की तरह दिखता है.
लाई-फ़ाई शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले एडिनबरा विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हेराल्ड हास ने किया था. उन्होंने 2011 में टैड (टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट एंड डिजाइन) कांफ्रेंस में इसका प्रदर्शन किया था.
उन्होंने एक एलईडी बल्ब से वीडियो भेजकर दिखाया था. उनकी प्रस्तुति को क़रीब 20 लाख बार देखा जा चुका है.
प्रोफ़ेसर हास ने ऐसे भविष्य की कल्पना की थी जब बिजली के अरबों बल्ब वायरलैस हॉटस्पॉट बन जाएंगे.

led bulbImage copyright
लाई-फ़ाई का बड़ा लाभ यह है कि यह वाईफ़ाई की तरह दूसरे रेडियो सिग्नल में खलल नहीं डालता. यही कारण है कि इसका इस्तेमाल विमानों और दूसरे ऐसे स्थानों पर किया जा सकता है.
लेकिन इस तकनीक की कुछ खामियां भी हैं. इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि इसे घर के बाहर धूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि सूर्य की किरणें इसके सिग्नल में दखल देती हैं.
यह तकनीक दीवार के आरपार इस्तेमाल नहीं की जा सकती. इस तरह शुरुआत में यह वाई-फ़ाई नेटवर्क के पूरक के रूप में काम करेगी.
संकरे शहरी इलाक़ों या अस्पताल जैसी जगहों पर जहां वाई-फ़ाई सुरक्षित नहीं है, इसका उपयोग हो सकता है.
reference :-http://www.bbc.com/hindi/international/2015/11/151128_technique_data_transter_lifi_dp

Alfred Nobel Biography in hindi

स्वीडिश रसायनज्ञ अल्फ्रेड नोबेल बारूद और अन्य विस्फोटकों का आविष्कार किया। उन्होंने कहा कि नोबेल पुरस्कार संस्थान के लिए 355 पेटेंट से उसके विशाल भाग्य का इस्तेमाल किया jaye
                                                   Image result for biography of scientist nobel

सार
 21 अक्टूबर 1833 को जन्मे , स्टॉकहोम, स्वीडन में , अल्फ्रेड नोबेल एक युवक के रूप में अपने पिता के हथियारों के कारखाने में काम किया। बौद्धिक रूप से उत्सुक हैं, वह रसायन शास्त्र और विस्फोटकों के साथ प्रयोग करने के लिए पर चला गया। 1864 में , एक घातक विस्फोट अपने छोटे भाई को मार डाला। गहराई से प्रभावित किया , नोबेल एक सुरक्षित विस्फोटक विकसित: डायनामाइट । नोबेल दुनिया भर में सबसे बड़ी उपलब्धियों में देने के लिए जाना जाता है में आ गया है, जो नोबेल पुरस्कार की स्थापना के लिए उसके विशाल भाग्य का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि 1896 में एक स्ट्रोक की मृत्यु हो गई।
प्रारंभिक वर्षों
             अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल स्टॉकहोम, स्वीडन, इम्मानुअल और कैरोलीन नोबेल की आठ बच्चों के चौथे में, 21 अक्टूबर 1833 को हुआ था। अल्फ्रेड अक्सर एक बच्चे के रूप में बीमार था, लेकिन वह हमेशा जीवंत और उसके आसपास की दुनिया के बारे में उत्सुक था। वह एक कुशल इंजीनियर और तैयार आविष्कारक था, अल्फ्रेड के पिता स्वीडन में एक लाभदायक व्यवसाय स्थापित करने के लिए संघर्ष किया। अल्फ्रेड 4 था, उसके पिता एक नौकरी निर्माण विस्फोटकों लेने के लिए सेंट पीटर्सबर्ग, रूस, ले जाया गया। परिवार अल्फ्रेड नव समृद्ध होती माता-पिता रूस में निजी tutors के लिए उसे भेजा 1842 में उसका पीछा किया, और वह जल्दी से रसायन विज्ञान में महारत हासिल है और जर्मन और रूसी अंग्रेजी, फ्रेंच, साथ ही अपनी मूल भाषा, स्वीडिश में धाराप्रवाह बन गया।
 एक आविष्कार और एक विरासत
            अल्फ्रेड वह संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए ले जाया गया, रसायन शास्त्र का अध्ययन पेरिस में एक साल बिताने के बाद 18 वर्ष की उम्र में रूस छोड़ दिया है। पांच साल के बाद, वह रूस में लौटे और क्रीमियन युद्ध के लिए सैन्य उपकरण बनाने के लिए अपने पिता के कारखाने में काम करना शुरू किया। 1859 में, युद्ध के अंत में, कंपनी दिवालिया हो गया। परिवार स्वीडन वापस चले गए, और अल्फ्रेड जल्द ही विस्फोटकों के साथ प्रयोग शुरू कर दिया। अल्फ्रेड 29 था, जब 1864, में, परिवार के स्वीडिश कारखाने में एक बड़ा विस्फोट अल्फ्रेड के छोटे भाई एमिल सहित पांच लोगों को मार डाला। नाटकीय रूप से घटना से प्रभावित नोबेल एक सुरक्षित विस्फोटक विकसित करने के लिए निकल पड़े। 1867 में, उन्होंने कहा कि वह नामित क्या उत्पादन, नाइट्रोग्लिसरीन और एक शोषक पदार्थ का एक मिश्रण पेटेंट "बारूद।" 1888 में, अल्फ्रेड के भाई लुडविग फ्रांस में रहते हुए मृत्यु हो गई। एक फ्रांसीसी अखबार ग़लती बजाय लुडविग के अल्फ्रेड के मृत्युलेख प्रकाशित किया है, और डायनामाइट के अपने आविष्कार के लिए अल्फ्रेड की निंदा की। घटना से उकसाया और उन्होंने कहा कि वह याद किया जा सकता है, कैसे महसूस के साथ निराश, नोबेल नोबेल पुरस्कार भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए पुरुषों और महिलाओं को सम्मानित करने के लिए स्थापित करने के लिए अपनी संपत्ति के एक थोक अलग सेट, और शांति की ओर काम करने के लिए । स्वीडन के केंद्रीय बैंक, Sveriges Riksbank, अल्फ्रेड नोबेल के सम्मान में 1968 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार की स्थापना की। उन्होंने कहा कि सैन रेमो, इटली में, 10 दिसंबर, 1896 को एक स्ट्रोक की मृत्यु हो गई। व्यक्तियों के लिए करों और वसीयतें के बाद, नोबेल नोबेल पुरस्कार निधि के लिए (2008 में 250 करोड़ अमरीकी डॉलर के बराबर) 31,225,000 स्वीडिश क्रोनर छोड़ा

Career in Nanotechnology - नैनोटेक्नोलॉजी में बनाएं अपना कॅरियर

                             Nanotechnology
क्या आप कल्पना कर सकते हैं शक्कर के दाने के बराबर के किसी ऐसे कंप्यूटर की, जिसमें विश्व के सबसे बडे पुस्तकालय की समस्त पुस्तकों की समग्र जानकारी संग्रहीत हो या किसी ऐसी मशीन की, जो हमारी कोशिकाओं में घुसकर रोगकारक कीटाणुओं पर नजर रख सके या फिर छोटे-छोटे कार्बन परमाणुओं से बनाए गए किसी ऐसे टेनिस रैकेट की, जो साधारण रैकेट से कहीं अधिक हल्का और स्टील से कई गुना ज्यादा मजबूत हो। कपडों पर लगाए जा सकने वाले किसी ऐसे बायोसेंसर की कल्पना करके देखिए, जो जैव-युद्ध के जानलेवा हथियार एंथ्रेक्स (एक जीवाणु) के आक्रमण का पता महज कुछ मिनटों में लगा लेगा। परी-कथाओं जैसा लगता है न ये सब? पर ये कोरी कल्पना नहीं है। विज्ञान ने इन कल्पनाओं में वास्तविकता के रंग भर दिए हैं नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology) के जरिए।

क्या है नैनो टेक्नोलॉजी  (Nanotechnology)
नैनो-टेक्नोलॉजी वह अप्लाइड साइंस (Applied Science) है, जिसमें 100 नैनोमीटर (Nanometers) से छोटे पार्टिकल्स पर भी काम किया जाता है। आज इस तकनीक की मदद से हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यदि विस्तार से जानें, तो नैनो एक ग्रीक शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है बौना। नैनोटेक्नोलॉजी में काम आने वाले पदाथरें (Materials) को नैनोमैटेरियल्स (Nanomaterials) कहा जाता है। नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग वर्षो से बहुलक-पॉलीमर (Polymer) तथा कम्प्यूटर चिप्स (Computer Chips) में हो रहा है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी और कम्प्यूटर, भवन-निर्माण सामग्री (Building Construction), वस्त्र उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूर-संचार, घरेलू उपकरण, कागज और पैकिंग उद्योग, आहार, वैज्ञानिक उपकरण  (Scientific Equipment), चिकित्सा और स्वास्थ्य (Medical and Health), खेल जगत, ऑटोमोबाइल्स, अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science), कॉस्मेटिक्स, अनुसंधान और विकास (Research And Development) जैसे क्षेत्र में इसका उपयोग होता है।

कोर्स और योग्यता  (Educational Qualification)
समय के साथ-साथ करियर  (Career) के विकल्प बढ गए हैं। नैनोटेक्नोलॉजी में पीजी करने के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व गणित में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक या एमटेक करने के लिए मैटेरियल साइंस (Material Science), मैकेनिकल  (Mechanical), बायोमेडिकल, केमिकल, बायोटेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्प्यूटर साइंस में से किसी भी विषय से बीटेक की डिग्री आवश्यक है।

Nano Technologyफ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स  (Future Prospects)
नैनो टेक्नोलॉजी का कार्य क्षेत्र बहुत ही व्यापक और विस्तृत है। आज हर क्षेत्र में इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा है। इंजीनियरिंग साइंस, मैटेरियल साइंस (Engineering Science), इंस्ट्रूमेंटेशन, डिवाइस फेब्रिकेशन और ड्रग डिलीवरी सिस्टम (Device Fabrication and Drug Delivery Systems) में होने वाली हर नई खोज का कम से कम एक कंपोनेंट नैनो टेक्नोलॉजी से संबंधित होता है। दुनिया का शायद ही कोई क्षेत्र इससे अछूता रहा हो। बायो-मेडिकल अनुसंधान में तो नैनोमेडिसीन (Nanomedicine) ने जैसे करिश्मा कर दिखाया है और इस करिश्मे के पीछे हैं छोटे-छोटे नैनोपार्टिकल्स (Nanoparticles)। कोशिकाओं में ये पार्टिकल्स बडे आराम से, बेरोक-टोक घूम-फिर सकते हैं। खाद्य सामग्री निर्माण, संसाधन, सुरक्षा और डिब्बाबंदी का प्रत्येक चरण नैनोटेक्नोलॉजी के बिना अधूरा है। सूक्ष्मजीव प्रतिरोधक लेप (नैनोपेंट) भोजन को लम्बे समय तक खराब होने से बचाते हैं। भोजन में होने वाले जैविक और रासायनिक परिवर्तनों की पहचान और उपचार अब बहुत आसानी से किया जा सकता है। आसानी से साफ होने वाले तथा खरोंच प्रतिरोधी पौधों की पोषक पदार्थ ग्राहक क्षमता बढाने वाले और रोगों से बचाने वाले नैनोप्रोडक्ट्स (Nano Products) निश्चित ही कृषि क्षेत्र में क्रांति ला देंगे। अब बाजार में ऐसे नैनोलोशन (Nano Lotion) भी आ गए हैं, जो न केवल आपकी कोशिकाओं को जवान और तंदुरूस्त बनाएंगे, बल्कि बुढापे और बीमारियों से भी आपको कोसों दूर रखेंगे।

कहां मिलेगी नौकरी  (Jobs)
यह क्षेत्र देखने में भले ही आकर्षक हो, लेकिन इस क्षेत्र में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इसमें रिसर्च को तवज्जो दी जाती है। इस क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आप नैनो मेडिसिन, बायोइन्फोर्मेटिक्स, स्टेम सेल डेवलपमेंट (Stem Cell and Development), नैनो टॉक्सीकोलॉजी और नैनो पावर जनरेटिंग सेक्टर में संभावनाएं तलाश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र के छात्रों के लिए हेल्थ इंडस्ट्री, एग्रिकल्चर, एन्वॉयरनमेंट इंडस्ट्री, स्पेस रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, जेनेटिक्स, प्राइवेट रिसर्च इंस्टीट्यूट, बायोटेक्नोलॉजी, फोरेसिंक साइंस जैसे क्षेत्रों में भी काफी अवसर हैं। आप चाहें तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री, फार्मास्युटिकल कंपनियों में भी नौकरी की तलाश कर सकते हैं।

वेतन  (Salary)
वेतन आपकी योग्यता और अनुभव पर निर्भर करता है। इस क्षेत्र में कमाई की कोई सीमा नहीं है। दिनोंदिन बढती नैनो टेक्नोलॉजिस्ट की मांग ने इस क्षेत्र में कमाई के भी कई अवसर खोले हैं। वैसे, आपका वेतन (Salary) आपकी कंपनी पर निर्भर करता है। सरकारी सेक्टर (Public Sector) में एक एमटेक व्यक्ति 30 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि यह फ्यूचर के साथ-साथ वर्तमान का करियर है। यदि इससे संबंधित डिग्री, डिप्लोमा कोर्स कर लेते हैं, तो आपको बेहतर सैलरी अवश्य मिलेगी।

प्रमुख संस्थान (Main Institute)
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर, दिल्ली, मुंबई
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
नेशनल फिजिकल लेबोरेट्री, दिल्ली
गुरु गोविंद सिंह यूनिवर्सिटी, दिल्ली
गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, हरियाणा
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी, नोएडा
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सांइस, बेंगलुरु
मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल
अमृता सेंटर फॉर नैनोसाइंस, कोच्ची
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एंडवास साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरु

चाँद के बारे में रोचक तथ्य







1. अब तक सिर्फ 12 मनुष्य चाँद पर गए है.
 2. चांद धरती के आकार का शिर्फ 27 प्रतीशत हिस्सा ही है.
 3. चाँद का वजन लगभग 81,00,00,00,000(81 अरब) टन है
. 4. पूरा चाँद आधे चाँद से 9 गुना ज्यादा चमकदार होता है.
 5. नील आर्मस्ट्रोग ने चाँद पर जब अपना पहला कदम रखा तो उससे जो निशान चाँद की जमीन पर बना वह अब तक है और अगले कुछ लाखों सालो तक ऐसा ही रहेगा. क्योंकि चांद पर हवा तो है ही नही जो इसे मिटा दे. 6. जब अंतरिक्ष यात्री एलन सैपर्ड चाँद पर थे तब उन्होंने एक golf ball को hit मारा जोकि तकरीबन 800 मीटर दूर तक गई.
 7. अगर आप का वजन धरती पर 60 किलो है तो चाँद की low gravity की वजह से चाँद पर आपका वजन 10 किलो ही होगा.
 8. चाँद पर पड़े काले धब्बों को चीन में चाँद पर मेढ़क कहा जाता है.
 9. जब सारे अपोलो अंतरिक्ष यान चाँद से वापिस आए तब वह कुल मिलाकर 296 चट्टानों के टुकड़े लेकर आए जिनका द्रव्यमान(वजन) 382 किलो था.
10. चाँद का सिर्फ 59 प्रतीशत हिस्सा ही धरती से दिखता है.
11. चाँद धरती के ईर्ध-गिर्द घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरह रखता है इसलिए चाँद का दूसरा पासा आज तक धरती से किसी मनुष्य ने नही देखा.
 12. चाँद का व्यास धरती के व्यास का सिर्फ चौथा हिस्सा है और लगभग 49 चाँद धरती में समा सकते हैं.
 13. क्या आपको पता है चाँद हर साल धरती से 4 सैटीमीटर दूर खिसक रहा है. अब से 50 अरब साल बाद चाँद धरती के ईर्द-गिर्द एक चक्कर 47 दिन में पूरा करेगा जो कि अब 27.3 दिनो में कर रहा है. पर यह होगा नही क्योकि अब से 5 अरब साल बाद ही धरती सुर्य के साथ खत्म हो जाएगी.
 14. सौर मंडल के 63 उपग्रहो में चाँद का आकार 5 वे नंम्बर पर है.
15. चाँद का क्षेत्रफल अफरीका के क्षेत्रफल के बराबर है.
 16. Mans Huygons चाँद की सबसे ऊँची चोटी है. इसकी लंम्बाई लगभग 4700 मीटर है. (माउंट ऐवरेसट की 8848 मीटर है).
 17. चाँद पर पानी भारत की खोज है. भारत से पहले भी कई वैज्ञानिको का मानना था कि चाँद पर पानी होगा परन्तु किसी ने खोजा नही. 18. चाँद के दिन का तापनान 180 डिगरी सेलसीयस तक पहुँच जाता है जब कि रात का -153 डिगरी सेलसीयस तक.

Sunday, 6 December 2015

जाने अचार्य चाणक्य ;चाणक्यनीती "3

     1)धन बिहिन पुरुष को वेश्या
        , शक्तिहीन राजा को प्रजा ,
            जिस पेड़ का फल झर गया हो ,
    ये पेड़ को पक्षी त्याग देता है ,
     और भोजन करने के बाद अथिति उस घर को त्याग देता है ।

      2 )संसारिक तप से जलते हुए आदमियो के तीन विश्राम स्थल है ,
            पुत्र ,स्त्री ,और सज्जनो का संग ।

   3)अकेले में तप , 
    दो आदमियोँ से पाथन ,
       तिन से गायन , 
        चार आदमियों से रास्ता , 
    पाँच आदमियो के समूह से खेती 
   ओरजयद मनुष्यो के समूह के द्वारा युद्ध सम्प्पन होता है।

    4)जिस धर्म में दया का उपदेश न हो ,
      उस धर्म को त्याग देना चाहिए ।
       जिस गुरु में विद्या न हो उसे त्याग देना चाहिए ,
     हमेसा नाराज रहने वाली स्त्री को त्याग दे और स्नेह बिहिन भाई बंधू को त्याग दे ।

     5)यह कैसा समय है ,
       मेरे कौन-कौन से मित्र है ,
     यह कैसा देश है ,
     इस समय हमारी आमदनी कितनी है और खर्च कितना है  , 
      मैं किसके अधीन हूँ ,मुझमे कितनी शक्ति है ,
     इस बातों को बार -बार सोचते रहना चाहिए ।

  6) आलस्य से विध्या
 पराया हाथ में गया धन ,
    बिज की कमी से खेती
     और सेनापति बिहिन सेना नष्ट हो जाती है ।

      7) अभ्यास से विद्या की और शील से कुल की रक्षा होती है ।
        गुण से मनुष्य की पहचान होती है 
      और आँख देखने से क्रोध का पता चल जाता है ।

    8) वेद को ,पण्डित को ,
    सदाचार और अशांत मनुष्य को जो बदनाम करना चाहते है ,
    वे ब्यर्थ का कष्ट और अपना समय बर्बाद करते है ।

   9)  दान दरिद्रता को नष्ट कर देता है 
      ,शील दुःख को नष्ट क्र देता है 
       ,बुद्धि अज्ञान को ,
     और बिचार भय को नष्ट  कर  देता है ।

10)  काम के समन को रोज नहीं 
, मोह के सामान कोई सत्रु नही ,
  क्रोध के सामान कोई अग्नि नही 
 और ज्ञान से बढ़कर कोई सुख नही है ।

   11) जैसे रगरने , काटने ,तपने और पीटने से सोने (gold) की परीक्षा होती है  
      उसी तरह शील ,गुन और कर्म ,त्याग इन चारो से मनुष्य की परीक्षा होती है ।

Saturday, 5 December 2015

जाने अचार्य चाणक्य की चंक्यनिती " 2

जाने अचार्य चाणक्य की  ''चाणक्यनीत  " 2

1)जिसका पुत्र वास् में हो ,
स्त्री आज्ञाकारी हो , 
और प्राप्त धन से वह संतुष्ट है ,
 उसके लिए यहाँ स्वर्ग है ।
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2)वे ही पुत्र , पुत्र है  जो पिता के भक्त है ,
 वही पिता ,पिता है जो अपनी संतान का उचित भरण पोषण करता है । 
वही मित्र ,मित्र है जिस पर अपना विस्वास हो ।
 वही स्त्री ,स्त्री है ,जहा पर आपका हिर्दय आनंदित होता हो ।
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3)जो पीठ पीछे आपका काम विगरता हो , 
और मुह पर मीठी मीठी बाते करता हो , 
ऐसे मित्र को त्याग देना चाहिए ।
वैसे जैसे किसी घड़े में गले तक पानी भरा हो , 
किन्तु मुह पर थोड़ा सा दूध दाल दिया हो
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4)कुमित्र पर कभी नहीं विस्वास ना करे ,
 और मित्र पर भी नहीं ,
 हो सकता है , वह मित्र कभी बिगड़ जाये ,
तो सरे आपके गुप्त भेद खोल दे ।
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5)जो बात मन में सोचे ,
उसे बचन से प्रकशित न करे ,
 उस गुप्त काम को मंत्रणा द्वरा रक्षा करे , 
और उसे गुप्त ढंग से ही काम में लावे ।
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6)पहला कष्ट है ,मुर्ख होना , 
दूसरा कष्ट है जवानी । 
और सब कष्ट से बढ़कर है पराये घर में रहना ।
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7)हर एक पहर पर माणिक नहीं होता , 
सब हाथियों के मस्तिक में शुक्त नहीं होता ,
सज्जन सवर्त्र नही होते , 
और सब जंगलो में चन्दन नही मिलते ।
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8)जो माता अपने पुत्र को नहीं पढ़ाती , वह सत्रु है । 
उसी प्रकार पुत्र को नहीं पढने वाले पिता , पुत्र का बैरी है ।
 क्योकि सभा में उसी तरह सोभित नहीं होता जैसे हंसो के बिच में बगुला ।

9)स्त्री का वियोग ,
 अपने जनों के द्वरा अपमान , 
युद्ध में बचा हुआ सत्रु , 
दुष्ट राजा की सेबा ,
दरिद्रता और स्वार्थी की सभा ,
 ये बातें अग्नि के बिना ही शरीर को जलाती है ।
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10)नदी के तत पर लगे पेड़ 
, पराये घर में रखने वाले धन ,
 बिना मंत्री के राजा , ये सीघ्र ही नष्ट हो जाते है ।
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11)ब्राह्मनो का बल  बिद्यया है , 
राजाओ की बाल उनकी सेना है ,
वैश्यो का बाल धन है , 
और शूद्रो की बाल दिवजाति की सेबा है ।

Thursday, 3 December 2015

Marie Curie Biography in hindi

मैरी क्यूरी रेडियोधर्मिता और नोबेल पुरस्कार से दो बार एक विजेता पर अपने काम के लिए मशहूर एक पोलिश में जन्मे फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी था ।
                                                  Image result for marie curie
सार वारसा, पोलैंड में 7 नवंबर 1867 , पर मारिया Skłodowska जन्मे, मैरी क्यूरी दो अलग-अलग क्षेत्रों ( भौतिकी और रसायन विज्ञान) में पुरस्कार जीतने के लिए नोबेल पुरस्कार और एकमात्र महिला जीतने वाली पहली महिला बनीं। क्यूरी के प्रयासों , उसके पति पियरे क्यूरी के साथ , पियरे की मौत , एक्स-रे के आगे विकास के बाद , पोलोनियम और रेडियम की खोज हुई और । वह 4 जुलाई 1934 को निधन हो गया ।
प्रारंभिक जीवन:-

 बेहतर मैरी क्यूरी के रूप में जाना जाता है मारिया Skłodowska, 1867 उसके माता पिता दोनों शिक्षक थे, 7 नवंबर को आधुनिक दिन पोलैंड में वारसॉ में पैदा हुआ था, और वह भाई बहन Zosia, Józef, Bronya और हेला निम्नलिखित, पांच बच्चों में सबसे छोटी थी। एक बच्चे के रूप में क्यूरी उसके पिता, Wladyslaw, एक गणित और भौतिकी के प्रशिक्षक के बाद लिया। वह एक उज्ज्वल और जिज्ञासु मन था और स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। लेकिन त्रासदी जल्दी मारा, और वह केवल 10 साल का था, जब क्यूरी तपेदिक के लिए, उसकी माँ, Bronislawa खो दिया है। उसके माध्यमिक विद्यालय में एक शीर्ष छात्र, क्यूरी पुरुषों केवल विश्वविद्यालय के वारसॉ उपस्थित नहीं हो सके। वह बजाय ", अस्थायी विश्वविद्यालय" वारसॉ में गुप्त रूप से आयोजित भूमिगत, अनौपचारिक वर्गों का एक सेट अपनी शिक्षा जारी रखा। क्यूरी और उसकी बहन Bronya दोनों एक अधिकारी की डिग्री कमाने के लिए विदेश जाने का सपना देखा था, लेकिन वे और अधिक स्कूली शिक्षा के लिए भुगतान करने के लिए वित्तीय संसाधनों का अभाव है। व्याकुल, क्यूरी उसकी बहन के साथ एक समझौते पर काम किया। उसने कहा कि वह स्कूल में था, जबकि Bronya का समर्थन करने के लिए काम करना होगा और वह अपनी पढ़ाई पूरी की बाद Bronya एहसान वापस कर देगा।
मोटे तौर पर पांच साल के लिए, क्यूरी एक शिक्षक और एक अध्यापिका के रूप में काम किया। वह भौतिक विज्ञान , रसायन विज्ञान और गणित के बारे में पढ़ने , अध्ययन करने के लिए उसे खाली समय का इस्तेमाल किया। वह पेरिस में सोरबोन में दाखिला लिया , जहां 1891 में, क्यूरी अंत में पेरिस के लिए अपना रास्ता बना दिया । वह अपनी पढ़ाई में खुद को फेंक दिया, लेकिन इस समर्पण के लिए एक व्यक्तिगत लागत था। कम पैसे के साथ , क्यूरी मक्खन रोटी और चाय पर बच गया है, और उसके स्वास्थ्य कभी कभी क्योंकि उसे गरीब आहार का सामना करना पड़ा। क्यूरी 1893 में भौतिक विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर ली है और अगले वर्ष गणित में एक और डिग्री प्राप्त की। इस बार के आसपास, वह स्टील के विभिन्न प्रकार और उनके चुंबकीय गुण पर एक अध्ययन करने के लिए एक कमीशन प्राप्त किया। क्यूरी में काम करने के लिए एक प्रयोगशाला की जरूरत है, और एक सहयोगी फ्रांसीसी भौतिकशास्त्री पियरे क्यूरी के लिए उसे शुरू । एक रोमांस प्रतिभाशाली जोड़ी के बीच विकसित की है, और वे एक वैज्ञानिक गतिशील जोड़ी बन गई। इस जोड़ी को 26 जुलाई 1895 को शादी कर ली ।
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Discoveries:-

 मैरी और पियरे क्यूरी समर्पित वैज्ञानिकों और एक दूसरे के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। सबसे पहले, वे अलग अलग परियोजनाओं पर काम किया। वह हेनरी Becquerel, यूरेनियम विल्हेम कॉनराड एक्स द्वारा पाया एक्स-रे से रे, कमजोर किरणों बंद डाले जो पता चला कि एक फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी के काम के साथ मोहित हो गया था। क्यूरी यूरेनियम किरणों पर उसे अपने प्रयोगों का आयोजन, कुछ ही कदम आगे Becquerel का काम ले लिया। वह किरणों कोई फर्क नहीं पड़ता, यूरेनियम की हालत या फार्म स्थिर बनी हुई है कि खोज की। रे, वह सिद्धांत दिया, तत्व की परमाणु संरचना से आया है। इस क्रांतिकारी विचार परमाणु भौतिकी के क्षेत्र बनाया है और क्यूरी खुद को घटना का वर्णन करने के लिए शब्द रेडियोधर्मिता गढ़ा। मैरी और पियरे 1897 में एक बेटी है, आइरीन था, लेकिन उनके काम को धीमा नहीं किया। पियरे रेडियोधर्मिता की उसे अन्वेषण के साथ मैरी मदद करने के लिए अपने काम को एक तरफ रख दिया। खनिज pitchblende के साथ काम करते हुए, जोड़ी वे पोलैंड की मेरी जन्मभूमि के बाद, तत्व पोलोनियम नामित 1898 में एक नया रेडियोधर्मी तत्व की खोज की। उन्होंने यह भी pitchblende में एक और रेडियोधर्मी सामग्री की उपस्थिति का पता चला है, और उस रेडियम बुलाया। 1902 में, curies वे एक अद्वितीय रासायनिक तत्व के रूप में अपने अस्तित्व का प्रदर्शन, शुद्ध रेडियम की एक decigram का उत्पादन किया था कि घोषणा की।
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Science Celebrity:-

विज्ञान सेलिब्रिटी वह भौतिक विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बन गई जब मैरी क्यूरी 1903 में इतिहास रच दिया। वह रेडियोधर्मिता पर उनके काम के लिए, उसके पति और हेनरी Becquerel के साथ-साथ प्रतिष्ठित सम्मान जीता। उनकी नोबेल पुरस्कार जीत के साथ curies उनके वैज्ञानिक प्रयासों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति विकसित की है, और वे अपने अनुसंधान जारी रखने की अपनी पुरस्कार राशि का इस्तेमाल किया। वे एक दूसरे बच्चे, बेटी ईव, अगले वर्ष का स्वागत किया। 1906 में, Marie एक जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा। वह गलती से एक घोड़ा गाड़ी के सामने कदम रखा के बाद उसके पति पियरे पेरिस में मारा गया था। उसकी काफी दु: ख के बावजूद, वह संस्था की पहली महिला बनने के प्रोफेसर, सोरबोन में उनके शिक्षण के बाद पदभार संभाल लिया है। क्यूरी अपने दूसरे नोबेल पुरस्कार, रसायन शास्त्र में इस बार जीतने, 1911 में एक और बड़ा सम्मान प्राप्त किया। वह रेडियम और पोलोनियम की उसकी खोज के लिए चुना है, और दो नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले वैज्ञानिक बन गया था। वह अकेला पुरस्कार प्राप्त किया है, जबकि वह उसे स्वीकृति व्याख्यान में अपने दिवंगत पति के साथ संयुक्त रूप से सम्मान साझा की है। इस बार के आसपास, क्यूरी भौतिकी में पहली सोल्वे कांग्रेस में भाग लेने के लिए, अल्बर्ट आइंस्टीन और मैक्स प्लैंक सहित अन्य प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के साथ शामिल हो गए। वे अपने क्षेत्र में कई groundbreaking खोजों पर चर्चा के लिए एकत्र हुए। अपने पति के पूर्व छात्र, पॉल Langevin, के साथ उसके रिश्ते सार्वजनिक हो गया जब क्यूरी 1911 में प्रसिद्धि के नकारात्मक पक्ष का अनुभव किया। क्यूरी Langevin की शादी को तोड़ने के लिए प्रेस में यह कहकर मजाक उड़ाया गया था। क्यूरी की ओर प्रेस 'नकारात्मकता फ्रांस में विद्वेष बढ़ती से हिस्से में कम से कम प्रभावित था। प्रथम विश्व युद्ध 1914 में बाहर तोड़ दिया, क्यूरी कारण मदद करने के लिए उसे समय और संसाधनों को समर्पित कर दिया। वह क्षेत्र में पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के उपयोग के हिमायती हैं, और इन चिकित्सा वाहनों उपनाम अर्जित "लिटिल curies।" युद्ध के बाद, क्यूरी उसे अनुसंधान के लिए अग्रिम के लिए उसे सेलिब्रिटी का इस्तेमाल किया। वह 1921 में संयुक्त राज्य अमेरिका के दो बार की यात्रा की और 1929- में रेडियम खरीदने के लिए और वारसॉ में एक रेडियम अनुसंधान संस्थान की स्थापना के लिए धन जुटाने के लिए।