1)धन बिहिन पुरुष को वेश्या
, शक्तिहीन राजा को प्रजा ,
जिस पेड़ का फल झर गया हो ,
ये पेड़ को पक्षी त्याग देता है ,
और भोजन करने के बाद अथिति उस घर को त्याग देता है ।
2 )संसारिक तप से जलते हुए आदमियो के तीन विश्राम स्थल है ,
पुत्र ,स्त्री ,और सज्जनो का संग ।
3)अकेले में तप ,
दो आदमियोँ से पाथन ,
तिन से गायन ,
चार आदमियों से रास्ता ,
पाँच आदमियो के समूह से खेती
ओरजयद मनुष्यो के समूह के द्वारा युद्ध सम्प्पन होता है।
4)जिस धर्म में दया का उपदेश न हो ,
उस धर्म को त्याग देना चाहिए ।
जिस गुरु में विद्या न हो उसे त्याग देना चाहिए ,
हमेसा नाराज रहने वाली स्त्री को त्याग दे और स्नेह बिहिन भाई बंधू को त्याग दे ।
5)यह कैसा समय है ,
मेरे कौन-कौन से मित्र है ,
यह कैसा देश है ,
इस समय हमारी आमदनी कितनी है और खर्च कितना है ,
मैं किसके अधीन हूँ ,मुझमे कितनी शक्ति है ,
इस बातों को बार -बार सोचते रहना चाहिए ।
6) आलस्य से विध्या
पराया हाथ में गया धन ,
पराया हाथ में गया धन ,
बिज की कमी से खेती
और सेनापति बिहिन सेना नष्ट हो जाती है ।
7) अभ्यास से विद्या की और शील से कुल की रक्षा होती है ।
गुण से मनुष्य की पहचान होती है
और आँख देखने से क्रोध का पता चल जाता है ।
8) वेद को ,पण्डित को ,
सदाचार और अशांत मनुष्य को जो बदनाम करना चाहते है ,
वे ब्यर्थ का कष्ट और अपना समय बर्बाद करते है ।
9) दान दरिद्रता को नष्ट कर देता है
,शील दुःख को नष्ट क्र देता है
,बुद्धि अज्ञान को ,
और बिचार भय को नष्ट कर देता है ।
10) काम के समन को रोज नहीं
, मोह के सामान कोई सत्रु नही ,
क्रोध के सामान कोई अग्नि नही
और ज्ञान से बढ़कर कोई सुख नही है ।
11) जैसे रगरने , काटने ,तपने और पीटने से सोने (gold) की परीक्षा होती है
उसी तरह शील ,गुन और कर्म ,त्याग इन चारो से मनुष्य की परीक्षा होती है ।
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