सदैब संदेह करने वाले ब्यक्ति के लिए ,
प्रसन्नता न इस लोक में है न कही और,
प्रसन्नता न इस लोक में है न कही और,
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क्रोध से भ्रम पैदा होता है ,
भ्रम से बुद्धि ब्यार्ग होती है ,
जब बुद्धि ब्यार्ग होती है तब तर्क नष्ट हो जाती है ,
तब ब्यक्ति का पतन हो जाता है ।
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जो मन को नियंत्रण नही करता ,
उनके लिए वह सत्रु के समान कार्य करता है ।
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अपने अनुशार कार्य करो ,
क्योकि वास्तब में कार्य करना निष्कयता से बेहतर है ।
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मनुष्य अपने विस्वास् से निर्मित होता है ,
जैसा वह विस्वास् करता है वैसा वह बन जाता है ।
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नर्क के तीन द्वार है ,वासना ,क्रोध ,लालच ।
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इस जीबन में न कुछ खोता है ,न ही ब्यर्थ होता है ।
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मन अशांत है ,उसे नियंत्रण करना कठिन है ,
पर इसे अभ्याश से वास् में किया जा सकता है ।
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लोग आपके अपमान के बारे में हमेसा बात करैंगे ,
सम्मानीत ब्यक्ति के लिए अपमान भी बदतर है ।
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ब्यक्ति जो चाहे बन सकता है ,
यदि वह विस्वास् के साथ इच्छित बस्तु पर लगातार चिंतन करें ।
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हर आदमी का विस्वास् उसकी प्रकृति के अनुशार होता है ।
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अप्राकृतिक कार्य हमेसा तनाव पैदा करता है ।
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किसी का काम पूर्णतया करने से अच्छा है,
की अपना काम करें ,भले ही आपूर्णता से करना पड़े ।
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मै सभी प्राणी को सामान रूप से देखता हूँ ,
न कोई मुझे कम और अधिक प्रिय है ,
लेकिन जो मेरी प्रेम पुर्बक आराधना करते है,
मैं उनके जीबन में आ जाता हूँ
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बुद्धिमान ब्यक्ति कामुक सुख में आनंद नही लेता है ।
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जब कोई भी ,जिस देवी देबता की पूजा विस्वास् के साथ इच्छा रखता है ,
मैं उसका विस्वास् उसी देबता में दृढ कर देता हूँ
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केबल मन ही किसी का मित्र और सत्रु होता है ।
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