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Tuesday, 18 August 2015

चीन की दीवार – china Wall History In Hindi

                             china
चीन की दीवार का निर्माण चीन के प्रथम सामंत सम्राट छिन शहुंग के शालन काल में किया गया था , और मिंग राजवंश के काल में इस का पुनर्निर्माण किया गया , जो छै हजार किलोमीटर लम्बी है । लम्बी दीवार पर बड़ी संख्या में दर्रे बनाये गए ,जिन में से कुछ दर्रे विशेष महत्व रखते थे । लम्बी दीवार का प्रथम दर्रा शानहाईक्वान दर्रा कलहाता है , जो दुनिया के प्रथम दर्रे के नाम से मशहूर है , शानहाईक्वान दर्रा उत्तर चीन के हपै प्रांत व ल्याओ निन प्रांत की सीमा पर खड़ा है , यह लम्बी दीवार का आरंभ स्थल है। शानहाईक्वान दर्रा उत्तर में य्येन शान पर्वत से सटा हुआ है और दक्षिण में पो हाई समुद्र के तट तक पहुंचता है । दर्रे के क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य बहुत आकर्षक है , पर्वत पर हरियाली छायी है और समुद्र की जल राशि स्वच्छ और लहरेदार है । दर्रे का मुख्य दरवाजा पर्वत और समुद्र के बीच ऊंचा खड़ा नजर आता है । दर्रे पर आरोहित हुए दूर दृष्टि दौड़ाए , तो आलीशान और भव्य सुन्दर पहाड़ी समुद्री नजारा दिखता है , इसी कारण इस दर्रे का नाम शान हाई क्वान अर्थात गिर सागर का दर्रा रखा गया ।

चीन की दीवार 5वीं सदी ईसा पूर्व में बननी चालू हुई थी और 16 वीं सदी तक बनती रही।
यह दीवार चीन की उत्तरी सीमा पर बनाई गयी थी ताकि मंगोल आक्रमणकारियों को रोका जा सके।
चीन की यह दीवार संसार की सबसे लम्बी मानव निर्मित रचना है। जो लगभग 4000 मील (6,400 किलोमीटर) तक फैली है।
अंतरिक्ष से लिये गये पृथ्वी के चित्रों में भी यह नज़र आती है।
चीन की इस दीवार की चौड़ाई इतनी रखी गयी थी जिसपर 5 घुड़सवार या 10 पैदल सैनिक बगल-बगल में गश्त लगा सकें। इसकी सबसे ज़्यादा ऊँचाई 35 फुट है।
पुराने समय में तीर या भाले इतनी ऊँचाई को पार करके नहीं जा सकते थे और यह सुरक्षा देती थी।
बाद में इसमें निरीक्षण मीनारें बना कर दूर से आते शत्रुओं पर निगाह रखने के लिये भी इस्तेमाल किया गया और चीन को दूसरे देशों से अलग करने के लिये भी।
ऐसा कहा जाता है कि इसे बनाने में 3000 जानें गईं और कई मजदूर इसे अपनी पूरी ज़िन्दगी भर बनाते रहे.

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