इस साल रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों टॉमस लिंडाल, पॉल मॉडरिश और अज़ीज सैंकर को दिया जाएगा.
उन्हें ये पुरस्कार डीएनए की मरम्मत पर उनके अध्ययन के लिए दिया जा रहा है.
'रॉयल स्वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज़' का कहना है कि इन वैज्ञानिकों के अध्ययन ने इस बात को समझने में मदद की कि कैंसर जैसी परिस्थितियों में स्थिति किस तरह बिगड़ सकती है.
इन वैज्ञानिकों ने बताया कि कोशिकाएं किस तरह क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत करती हैं.
गर्व
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पुरस्कार के तहत मिलने वाली 80 लाख स्वीडिश क्रोनर की राशि को तीनों विजेताओं में बराबर-बराबर बांटा जाएगा.
ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट में कार्यरत टॉमस लिंडाल ने कहा, "इस पुरस्कार के लिए ख़ुद को चुने जाने पर मुझे ख़ुशी भी है और गर्व भी."
इससे पहले मंगलवार को भौतिकी शास्त्र का नोबेल जापान के तकाकी काजिता और कनाडा के आर्थर मैकडोनाल्ड को देने की घोषणा की गई.
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