अपने बच्चों को मां अक्सर चांद कहकर बुलाती है पर अपनी लोरियों में कहती है कि चांद उसके मामा हैं. वही बच्चा जब किशोरावस्था में पहुंचता है तो चांद में उसे अपना महबूब नजर आने लगता है. पर चांद के उपर अगर किसी का सचमुच कॉपीराईट है तो वे हैं कवि और फिल्मी गीतकार. इन्होंने चांद और इंसान के रिश्तों की इतनी तरह से व्याख्या की है कि अगर कभी चांद इन कविताओं को पढ़ ले तो वो भी इंसानों के साथ अपने रिलेशनशिप स्टेटस को लेकर कनफ्यूज हो जाए. अगर कविता-कहानी की बात छोड़ भी दें तो क्या सचमुच चांद के साथ हमारा संबंध इतना आत्मीय है कि उसके ना रहने से हमारे जीवन में कुछ फर्क पड़ेगा?
अगर आप यह सोच रहें हैं कि हम ऐसा बेतुका सवाल क्यों पूछ रहें हैं, भला चांद कहां जाएगा? तो आपको बता दे कि चांद पर इतना भरोसा न करें क्योंकि यह हमेशा-हमेशा के लिए धरती के पास यूं ही नहीं रहने वाला. आपकी जानकारी के लिए यह बता दें कि हर साल चांद धरती से 3.8 सेमी दूर जा रहा है. भले ही यह दूरी बेहद कम है लेकिन संभव है कि एक दिन चांद इस धरती और हम धरतीवासियों को छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए अनंत अंतरिक्ष में खो जाए. यह बात अलग है कि ऐसी स्थिति करोड़ो साल बाद आएगी पर अगर हम अपनी सोच को करोड़ो साल आगे ले जा सकें तो एक दफा सोच कर देखिए कि क्या होगा अगर हमारी धरती मम्मी के भाई यानी चंदू मामा हमें छोड़कर चले जाएं.
चलिए सबसे पहले हम आपको धरती मां और चंदा मामा के बीच वैज्ञानिक रिश्ते के बारे में बताते हैं. आप अगर चांद की जन्म कि कहानी देखेंगे तो आपको कतई यह हैरानी नहीं होगी कि चांद धरती का भाई कैसे है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी चांद धरती का छोटा भाई है. कुछ 5 करोड़ साल छोटा! उम्र का यह अंतर भले ही आपका बहुत अधिक लगे पर अगर इसे धरती और चांद कि उम्र के संदर्भ में देखें तो यह अंतर कुछ नहीं है. तब न सूर्य का परिवार यानी सोलर फैमिली वैसी थी जैसी आज है और न हीं धरती. सूर्य का परिवार तब अपने शैशव आवस्था में था और तब धरती की एक जुड़वा बहन भी हुआ करती थी.
वैज्ञीनिकों ने धरती के इस जुड़वा बहन का नाम थिया रखा है. थिया भी उसी कक्षा में घूमती थी जिसमें की धरती. उन दोनों में एक भीषण टक्कर हुई. इसके बाद थिया का एक बड़ा हिस्सा धरती में समा गया जिससे पृथ्वी का आयतन बढ़ गया और उसका गुरूत्वाकर्षण भी. इस टक्कर से उत्पन्न हुए ढेरों मलबे पृथ्वी के चारो और चक्कर काटने लगे. समय के साथ इस मलबे के टुकड़े आपस में जुड़ने लगे और एक नए अंतरिक्ष पिंड का जन्म हुआ. यह पिंड है धरती का एकमात्र उपग्रह, हमारा चांद.
पर चांद का रिश्ता सिर्फ धरती तक ही सीमित नहीं है. इसका हम सबकी जिंदगियों से भी गहरा संबंध है. अगर चांद न होता या चांद न रहे तो शायद धरती पर इतना विविध जीवन संभाव ना हो पाए. चांद का धरती के मौसम को स्थिर करने में एक अहम योगदान है. अगर चांद न हो तो धरती का तापमान कभी 100 डिग्री के पार चला जाता तो कभी शून्य से नीचे. कम से कम ऐसी परिस्थितियों में मानव जीवन का पनपना तो असंभव होगा.
अगर चांद न हो तो धरती की अपनी कक्षा पर घूमने की गति और बढ़ जाएगी यानी दिन रात तब ऐसे नहीं होंगे जैसे हुआ करते हैं. तब एक दिन लगभग 6-8 घंटे का ही होगा और साल में होंगे तकरीबन 1000-1400 दिन. रातें और काली होंगी, समुद्र में लहरे इतनी उंची नहीं उठेंगी और धरती पर कभी चंद्र या सूर्य ग्रहण नहीं लगेगा. तो समझ गए न किस कदर गहरा रिश्ता है हम सब कि जिंदगी और चांद का और क्यों चांद को हम मामा, बेटा या महबूब कहकर आत्मीयता जताते हैं
reference :-http://socialissues.jagranjunction.com/2014/12/10/birth-history-of-moon/

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