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Thursday, 13 October 2016

Science and technology in Hindi

Science and technology
विज्ञानं हमे ज्ञानबां बनाता है ,लेकिन दशर्न हमे बुद्धिमान बनाता है ।

विज्ञानं की तिन बिधियों है सिद्धांत ,प्रयोग और सिमुलेशन ।

विज्ञानं की बहुत साडी कल्पनायें गलत है ,यह पूरी तरह ठीक है ,यही परिकल्पनाएँ ही सत्य प्राप्ति के झोरेखे है ।

हम किसी वि चीज को पूर्ण ठीक तरीके से परिभाषित नही कर सकते है ,अगर ऐसा करने की कोशिश करे तो हम  भी उस बैचारीक पक्षपात के शिकार हो जायेंगे जिसके सीकर दार्शनिक होते है ।

पर्याप्त रूप के विकसित किसी तकनिकी और जादू में अंतर नही किया जा सकता है ।

सभ्यता की कहानी सार रूप में इंजीनियरिंग की कहानी है वह लम्बा और विकत संघर्स जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिए काम करने के लिए किया गया ।

इंजीनियर इतिहास का निर्माता रहा है और आज भी है ।

वैज्ञानिक इस संसार का ,जैसे ही उस रूप में अध्यन करते है ।इंजीनियर वह संसार बनाता हैं जो कभी था ही नही ।

मशीनी कारन के लिए यह जरुरी है की वह भी मशीन की तरह सोचे ।

इंजीनियरिंग संख्याओं में की जाती है  संख्या के वीना विश्लेषण एक मात्र राय है ।

जिसके बारे में आप बात कर रहे है ,अगर आप उसे माप और संख्या में ब्यक्त कर सकते है तो आप उस विषय में कुछ जानते है ।अगर आप उसे मांप नही सकते है तो आप का ज्ञान थोड़ा बहुत सतही है और अशांतोष जनक है ।

तकनिकी के ऊपर ही तकनीक का निर्माण होता है । हम तकनीक रूप से विकाश नही कर सकते है ,यदि हममे यह समझ नही है की सरल के वीना जटिल का अस्तिव संभव नही है ।

तकनीक और विज्ञानं भी प्रकृतिक में ब्याप्त है कोई इसे बहार से लेकर नही आया है ।

अगर कुछ करने के लिए गलत तरीका है तो किसी न तो यह करना पड़ेगा ।

धर्म कला ,विज्ञानं  वास्तब में एक ही बृक्ष की शाखा और प्रशाखा है ।

विज्ञानं और वैज्ञानिक कार्यों में सफलता असीमित या बड़े संसाधनों का प्रावधान करने से नही मिलती बल्कि यह समस्याओं को बुद्धिमानी और सतर्कता से चुनने से मिलती है , और जो बढ़कर है वह है निरंतर कठोर परिश्रम ।

एक मशीन 50 साधारण मनुष्यों का काम कर सकते है ,पर एक  असाधारण मनुष्यों का काम नही कर सकती है ।
***************************************** तकनिकी का विकाश आदमी के सोच का देन है ।

काम समय में अधिक से अधिक प्रॉडक्ट हो ये भी आदमी की सोच की देन है ।

तकनिकी से से आपस में जुड़े होते है पर वास्तब में वह हमको अपने से दुरी बढाने का काम करते है ।

तकनीक से आदमी की जरूरते पूरा हो सकती है पर वास्तबिक खुसी नही ।

तकनिकी हमे क्षण भंगुर खुसी से सकते है पर वास्तबिक खुसी नही ।

आवश्यकता ही तकनिकी की जननी है ।

आर्टिफिशल intelliance (रोबोट ,कंप्यूटर, atutomation work) हमसे तिब्र सोच और कर सकते है पर उसको भी हमने ही बनाया है ।

तकनीकी से हमे बहुत कुछ आसान हो सकता है पर उसके दुष्यपरिणाम भी घातक है ।
(Altrasound से लिंग ज्ञात करना जिससे लड़की में कमी )

तकनिकी तब तक हमरे सकारत्मक कार्य के लिए और मानब हित के लिए है जब तक वह बैज्ञानिक के पास है ,जैसे ही वह तकनिकी बाजार में ब्यपार के लिए आते है तो वह हमारे लिए घातक हो जाते है ।

तकनीक सिर्फ वही काम कर सकता है जिसके निर्देश पहले हमने दे रखा है ।

तकनीक हमारे अनुशार चलते है न की हम उनके अनुशार ।

तकनीक हमसे अधिक फ़ास्ट काम कर सकता है ,पर उसे और अधिक फ़ास्ट उसमे सुधर कर हम कर  सकते है ।

तकनीक हमारे लिए लाभ करी और हानिकारक दोनों है वह हम पे निर्भर करता है की हम उसका उपयोग कैसे करते है ।

अगर तकनिकी का विकाश नही होगा तो ,आजकल हमारे सभी जरूरत भी पूरा नही हो पायेंगे ।

तकनिकी से हम घातक हथियार बन सकते है पर उसे नष्ट करने वाले मानब ही क्र सकते है ।
तकनीक आदमी की कल्पना का देन है , जैसा हम कल्पना करते है आने वाले समय में वही उपकरण बन जाते है ।

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Friday, 7 October 2016

Prakriti in hindi

प्रकृति:-

दुनिया में जितने भी महान बैज्ञानिक बने है वह हमेशा प्राकृति से जुड़े रहे है

बैज्ञानिक उसी चीज की खोज करते है जो प्रकृति में पहले से बिद्दमान है ।

हम प्रकृति के रहस्य को तभी उजागर कर सकते है जब हम प्रकृति के साथ रहते है और उसे जानने की कोशिस करते है ।

पूरा ब्रह्माण्ड रहस्य से भरा परा है अभी तक हम नगण्य के बराबर ही पर्दा उठा है ।

जब कोई प्रकृति की रहस्य जानने की कोसिस करते है उसे सफलता अवश्य मिलती है ।

प्रकृति से जुड़ कर ही हम नई तकनिकी को  बिकसित कर सकते है ।

जब कोई प्रकृति में बिद्दमन् ऊर्जा के अखण्ड स्रोत वाले प्रदार्थ की खोज करते है तो वह मानव के हित और सकारत्मक काम के लिए होता है । पर वह इंसान के विरुद्ध ही उपयोग के लिए करते है ।

नव मछली से , विवान पक्षी से न जाने कितने चीज की खोज हुई है वह प्रकृति का ही देन है ।

हम प्रकृति के महाप्रलय का पूर्व अनुमान लगा सकते है पर उसको रोक नही सकते है ।

हम आज है कल नही रहेगें ,पर प्रकृति पहले से है और आगे भी रहेगें ही ।

हम अपने फायदे के लिए प्रकृति को क्षति पंहुचा रहे है पर वस्तिबिक में वो हमारी ही क्षति है ।

प्रकृति ने सभी को सामान चीज दिए है उपयोग के लिए । पर वह जब जाती ,मजहब राष्ट के लिए आपस में लड़ते है तो वह इन्सानियत को ही हानि पहुचते है ।

हमारे लिए स्कूल ,घर ,देश समाज के हम ही कानून हम लोग ही  बनाते है ,तोड़ते है तथा उसमे सुधार करते है ।पर प्रकृति का नियम सभी के लिए सामान है ,उसे कोई तोर नही सकता न ही उसमे कोई बदलाव कर सकता है ।

Thursday, 6 October 2016

Acchi bate in hindi -18

आजकल के युवा दूसरे के बहकावे में आकर   नकारत्मक बिचार शिकार हो जाते है , उसे ही सच मानने लगते है ।अपने आप प्रश्न कीजिये और सोचिये की ये सही है या गलत और जब पूर्ण रूप से विस्वास हो जाये तब कोई एक्शन लीजिये । इतिहास वह नही लिखते जो इतिहास में घटित बुरे घटना को , किसी के द्वारा किये गए बुरे काम , किसी के  विरुद्ध लिए गलत फैसले का , वर्तमान में उजागर करने से  नही लिखते है  ।इतिहास वो लिखते है जो भुत की गलतियों को जानकर और उसे वर्तमान  में एषा  गलती  दोबारा न हो  ,सुधारने के लिए  की शिख देने इतिहास रचते है ।
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आहकल यह देखा गया है , हमेशा दूसरे की तारीफ करने लगते है , तारीफ में अपना कीमती समय नष्ट मत कीजिये । आप भी सकारात्मक काम कीजिये और और महान आदमी की जिबनी पढ़कर उसे अपने जीबन में उतारिये और अपने महान लक्ष्य को अंजाम तक पहुचाइए और खुद भी अपने आपको को तारीफ के काबिल बनाइये।
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आहकल यह देखा गया है , हमेशा दूसरे की तारीफ करने लगते है , तारीफ में अपना कीमती समय नष्ट मत कीजिये । आप भी सकारात्मक काम कीजिये और और महान आदमी की जिबनी पढ़कर उसे अपने जीबन में उतारिये और अपने महान लक्ष्य को अंजाम तक पहुचाइए और खुद भी अपने आपको को तारीफ के काबिल बनाइये।
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अपने आप को पहचानिये और अपने लक्ष्य को पूरा कीजिये ।
अगर आप बाइक चलना जानते है तो , वो कोई बीके क्यों न हो चाहे हीरो हो , प्लसर हो , बजाज हो ,बुलेट हो , कितने भी cc के हो , 100cc वाले हो 300cc वाले हो आप चला ही लीजियेगा । अगर pc ऑपरेट करने वाले है , तो wondo हो xp हो या linux हो , कोई भी क्यों न हो आप ऑपरेट क्र ही लीजियेगा ।
आप एयर गन चलने जानते है तो आप कोई भी गन चला सकते है चाहे उसमे कितने ही mm की बुलेट क्यों न लगते है । अगर आप पढ़ने लिखने जानते है तो आप अपने कोई भी लक्ष्य को पूरा क्र सकते है , बस आपको थोड़ा ही मेहनत करते है , पर आपमें धर्य है तो ।

Tuesday, 4 October 2016

Scitech in hindi (Scitech-1)-newtons low of motion

Newton’s laws of motions

isaacnewton.jpg
न्यूटन गति के तीन नियम तो हर कोई जनता है| लेकिन इन नियमो के अधार
पर हमारे आस पास होने वाली घटनाओं के बारे में आप सायद ही जानते
होंगे | इन तीन नियमो से जुङी कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिसे जान के आप कहेंगे
की ये न्यूटन के इश नियम से होता है |
न्यूटन गति का पर्थम नियम :-
न्यूटन गति का पर्थम नियम के अनुसार कोई भी बस्तु अपने प्रारंभिक अभास्ता
में रहनी चाहती है जब तक कोई बाहरी बल लगाकर उशकी अबस्था में परिबर्तन
न किआ जाये| न्यूटन गति का पर्थम नियम को जङत्व का नियम भी
कहा जाता है| न्यूटन गति का पर्थम नियम से हमे बल कि परिभाषा मिलती है |
न्यूटन गति के पर्थम नियम पर अधारित कुछ उदाहरण जो हम अपने डेली
लाइफ में देखते और करते हैं :-

(i) रुकी हुई गाड़ी के अचानक चल पड़ने से उसमे बैठे यात्री पीछे की ओरे
झुक जाता है|
(ii) चलती हुई गाड़ी के अचानक रुक जाने से उसमे बैठे यात्री आगे की ओरे
झुक जाता है|
(iii) पेड़ की टहनियों को हिलाने से उष टहनी में लगा फल निचे गिर जाता है |
(iv) कम्बल को हाथ में  पकड़ कर डंडे से मरने पर धूल के कण झरकर निचे
गिर जाते हैं |
(v) गोली मरने से काँच में गोल छेद हो जाता है , परुन्तु पत्थर से मारने पर काँच
टुकरे टुकर हो जाता है |
(vi) हथौरी को डंटे के कसने के लिए , डंटे को जामिन पर मरते हैं हथौरी को नही |
न्यूटन गति का द्वितीया नियम :-
किसी बस्तु के संबेग (momentum) परिबर्तन कि दर उष बस्तु पर आरोपित बल
के समनुपति होता है तथा संबेग परिबर्तन बल की दिसा में होता है | F = ma
अर्थात न्यूटन गति के द्वितीया नियम से हमे बल का ब्यंजक प्राप्त होता है |
न्यूटन गति के द्वितीया नियम पर अधारित कुछ उदाहरण जो हम अपने डेली लाइफ
में देखते और करते हैं :-

(i) क्रिकेट प्लेयर  तेजी से आती हुई गेंद को रोकने के लिया अपने हाथ को पीछे
की तरफ खीच लेता है ताकि संबेग कम हो जाये और प्लेयर को  चोट कम लगे |
(ii) हाई जंप और लौग जंप के दौरान मैदान की मिट्टी खोद कर हलकी कर दी जाती
है ताकि संबेग कम हो जाये और कूदने पर चोट कम लगे |
(iii) अधिक गहराई तक किल को ठोकने  के लिया भरी हौथारे का प्रोयाग किआ जाता है
ताकि मास को बढ़ा के फाॅर्स की मात्र को बढ़ाया जा सके और किल अधिक गहरई
तक जा सके |
(iv) सामान बेग से आती हुई क्रिकेट गेंद एबं टेनिस गेंद में से टेनिस गेंद को कैच
करना आसान होता है |
(v) गद्दा या मिट्टी के फर्श पे गिरने पर कम चोट लगता है , सीमेंट से बने फर्श पर गिरने
की तुलना में क्योकि गद्दा और मिट्टी संबेग को कम कर देती है | जब की सीमेंट से बने फर्श
संबेग को कम नही कर पता है |
(vi) गारी में स्प्रिंग या शॉक अब्जोर्बर इश लिया लगाये जाते हैं ताकि झटके कम लगे |
(vii) कराटे खिलारी द्वारा इटो की पट्टी (slab) को तोरना |
न्यूटन गति का तृतिया नियम :-
इश नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर परुन्तु बिपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है |
(every action has equal and opposite reaction).
न्यूटन गति के तृतिया नियम पर अधारित कुछ उदाहरण जो हम अपने डेली
लाइफ में देखते और करते हैं :-

(i) बंदूक से गोली चलाने पर पीछे की ओरे झटका लगना |
(ii) नाव को आगे बढ़ाने के लिया चप्पु से पानी को पीछे की और धकेलना |
(iii) नाव पर से किनारे पर कूदते पर नाव का पीछे की ओरे हटना |
(iv) कुआँ से पानी खिचते समय रस्सी का टूटने पर व्यक्ति का पीछे की और गिरना |
(v) उचाई से कूदने पर चोट लगना |
(vi) राकेट का आगे बढना |
(vii) इशी नियम के अधार पर तैराक आगे बढता है |

Acchi bate 18

किचर मे  पत्थर फेकिएगा तो किचर आपको ही पड़ेगे ।
~
आज कला के पढ़े लिखे युवा भी लड़ाई झगड़े और मर पिट के लिए तैयार हो जाते है ,वो भी उससे जिसकी कोई औकाद नही है ,जिसका कोई बैकग्राउंड नही है , जिसकी कोई इज्जत नही है , वो रोड छाप होते है ,इस तरह के आदमी से भूल कर भी कभी नही उलझने और बकवास करने चाहिए । जैसे रिक्शा चालक , रोड पे गाड़ी चलने वाले ड्राईवर और खलासी , रेलवे स्टेशन के पास दुकान करने वाले , कोठी , और फिर लफंगे सब जो रोड पे अवरगिरि करने वाले (इस तरह के लड़के सब के कुछ बेक ग्राउंड नही होते है , रोड पे रहना ,कमेंट पास करना , कार्ड खेलना जुवा खेलना यही उन लोग की पहचान है , बात बात में आपस में गली गौलोज करना ,देख के ही पता लग जायेंगे ) और बहुत कुछ है ,इस तरह के आदमी के कभी नही मुह लगाना चाहिए । मैंने बहुत को देखा है , हाथापाई करते , इस सब की क्या औकात ह।ै हमेसा रोड पे रहता ,हमेशा आप देखिएगा की इस सब के आदमी से हमेसा दिन में दो तिन बार लड़ाई ,गली गौलोज करते आपको भी मिल जायेगे ।वो सब ऐसे माहौल में रहकर ,हमेसा मुह से कुछ अपशब्द निकाल ही देता है , वो ये नही देखता की सामने वाले कैसा आदमी है , यहाँ तक तो अगर कोई बस में बैथ गए और उसके पास रूपये नही है या छुट्टे नही है ,बस से उतार देते है । अगर कुछ आप बोलेगे तो आपको ही उल्टा जबाब मिलते रहेगा ।उस टाइम तो सब गुस्से से आग बाबुल हो जाता है कोई गुस्से को बर्दास्त कर लेता है ,कोई उसे दो चार झापड़ लगा देता है । बात यह है की आप दो झापड़ लगा दिए उसको कोई फर्क नही परेगा , पर आपको अगर कुछ बोल देता है ,न जाने कब तक दिमाग में टेंसन रहता है , आप ये सोचते की वो जिसकी कोई औकात नही है वो हमको ऐसा बोल दिया । यहाँ तक तो देखे है लड़ाई के लिए भिर जाता है , अब इज्जत उसकी नही आपकी ख़राब होगी इतने आदमी के बिच में कुछ बोलना , अगल बगल के आदमी देखने लगते है ,की किस बात के  बात लेकर लड़ाई हुआ ।आपको वो बात कितने दिनों तक टेंसन देते रहेगा । उसको तो कोई फर्क नही परेगा , क्योकि उकसा तो डेली का रूटिंग हो गया है , किसी न किसी से लड़ाई करना , बहस करना । उसे थोरे इज्जत प्रतिष्ठा का कोई दर है , डेली उकसा यही काम है ।पर आप तो कभी कभी जाते है , आपकी एक इज्जत प्रतिष्ठा होती है ।रिक्शा वाले के साथ ऐसा ऐसा घटना हो जाता है की अगर थोड़ी दूर आगे ,या गली में चलने को बोल दिए न जाने क्या क्या बोलने लगेगा , इतने रूपये में यही तक ,अब हम आगे नही जा सकते है , गली में जायेगे तो इतने रूपये और लेगें , उस टाइम सभी को बहुत गुस्सा आता है , किसी का मन करता की उसको दो झापड़ लगा दे , कुछ तो लगा भी देता है , अगर आपके पास थोड़ा सामान है तो और नाटक स्टार्ट कर देता है ,अब हम आगे नही जायेगा , आप यही तक बोले थे उस समय और रूपये माँगने लगते है । अब क्या कीजियेगा रोडछाप रोड जैसे उसके बिचार होते है । इसी तरह कुछ दूकानदार वाले होते है , बेचने टाइम कितने मोटीवेट करते है , इतने दिन की गैरन्टी ,जब कुछ खराबी हो जाये तो ,फिर उसका नाटक स्टार्ट ,कल आना परसो आना ,आज स्टाप नही नही ,compnay वाले से बात नही हुआ है , इतने बार आपको बुलाएंगे की सबको गुस्सा आ जाता है । उस टाइम तो मन करता इसको बहुत पिटाई करे ।आखिर कार मजबूरी में बार बार जाना पार्ट है । इसी तारह स्टेशन के बगल के दूकानदार का जयदा बढ़ा के प्राइस बोलता ,मजबूरी में हमको लेना पड़ता है ।आपको बहुत बहुत मिल जायेगे ऐसे ।
" इसतरह  के आदमी से अगर आप मुह लगते है ,इज्जत उसकी नही आपकी ही जायेगी "
अगर इस तरह के आदमी को सबक सिखाना है ,समय का इंतजार कीजिये , और आप जयदा की संख्या में हो और उसे ऐसा डराये  ।4,5 के ग्रुप में जाइये और जमकर डोज दीजिये ,इतना डरा दीजिये की आने वाले समय में किसी और के साथ ऐसा न करे ।लेकिन सीघ्र कोई काम मत कीजिये ,समय का प्रतीक्षा कीजिये और जमकर बरिशिए । ताकि उसकी औकात पता चल जाये ,और दोबारा किसी कस्टमर से मुह फट हो कर बात न करे । अगर सीघ्र कोई काम करते है तो परेशानी आपकी बढेगी , सायद कोई काम से आप जा रहे है तो वो काम छूट जाये ऐसे झमेले में । अकेले मत करिये ग्रुप में ताकि आपका दबदबा उसपे बना रहे ।मर पिट  मत कीजिये ,बस धमाका के छोर दीजिये ।
मैं यह नही कहता की सारा कोई ऐसा ही होता है। पर कुछ होते है जरूर,ये आपको भी पता है और हमलोगों को भी।
धन्यबाद ,ये हमारे अपने विचार है ।
हो सकता मैं गलत भी हो सकता हूँ ।
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लक(भाग्य) और मेहनत ?
लक और मेहनत के सबके अपना अपना मनना होता है ।
मैं क्या मानता हूँ ,वो मैं आपको बताता हूँ
जब कोई ब्यक्ति विषेस या किसी संस्था द्वरा कोई चीज प्रतियोगिता किया जाता है तो वह आपका लक नही आपके मेहनत काम आएगा । जो काम आपको पहले से पता है वह लक नही मेहनत काम आता है ,और जिस काम के बारे में पहले से कुछ पता नही पूरी तरह से अनजान है वह काम एक एक हो जाना वह लक है ।जैसे कही जा रहे हो और आपको लॉटरी मिल जाये ,या रूपये से भरे बैग मिल जाये , या कोई काम अनजाने पूरा हो जाना ,कोई आपको रस्ते में एक अच्छी लड़की मिल जाये और आपका उससे बात होने लगे ये सब लक होता है ,मतलब कोई अच्छा काम अस्कमात हो जाये तो उसे लक कहते है और अस्कमात बुरा काम हो जाये तो उसे बैडलक कहते है ,यही होता है सभी के साथ। मेहनत का लक से कोई लेना देना नही है , जब आप को प्रतियोगिता परीक्षा देने जा रहे है तो आपको वहाँ आपका मेहनत काम आएगा , मतलब जो काम करने का आपको पूर्व जानकारी है वह लक का कोई लेना देना नही है , बस आपका मेहनत काम आएगा ।अगर कोई अनपढ़ को प्रतियोगिता परीक्षा में बैठा दिया जाये तो क्या उकसा लक काम आएगा ,कदापि नही । हाँ जो मेहनत कर के गया होगा उसी से प्रश्न हल होएंगे जितने मेहनत किये होंगे जितने  हल होंगे ।कोई निशानेबाज अगर अपने पाँच लक्ष्य को सधता है तो पाँच को भेद सकता है , क्यकी वह पहले से मेहनत किया है ।किसी अन्य आदमी को दे दिया जाये भेदने के लिए तो सायद कोई न लगे या फिर एक लग जाये पर वह पाँच के पाँच अपने लक्ष्य पर नही भेद सकेंगे ।
बस मेरा मनना है
" जब कोई काम आपको पूर्व पता है उस काम को करना है उसके लिए मेहनत काम आते है ।और कोई काम या फिर कुछ और जिसका आपको पूर्व जानकारी नही है पर वह काम हो जाता है उसे लक कहते है "
इसलिए अपने लक पर नही अपने मेहनत पर विस्वास् कीजिये ।
अपने लक के भरोशे मत बैठिये ,मेहनत कीजिये और सफलता जरूर मिलेँगे ।
जिस काम लिए आप भाग्य के भरोशे बैठे वह अपने आप कभी नही पूरा होंगे क्योंकि वह काम आपको पहले से पता है ।
धन्यबाद।

Saturday, 1 October 2016

Acchi bate -17

नकारत्मक चीज हमलोगो पर जल्दी हावी होता है ।
और तो और हमलोग दूसरे की गलती को हर सम्भब ढूढनेप्रयास करते है , दूसरे की गलती को खोजने में न जाने हम अपने शारीर का ऊर्जा कितना हिस्सा नष्ट क्र देते है , पर मिलता है उससे क्या कुछ । अगर वही ऊर्जा हम अपने गलती को ढूढ़ने का प्रयास करैंगे तो अपना भला होगा और साथ ही साथ हमसे जुड़े कितने का उद्धार होगा ।जो जिस अवस्था में है उसे रहने दीजिये सायद वह मेहनत कर उस मुकाम तक पंहुचा होगा । और हम क्या करते है उसे निचे दिखने का हर सम्भब प्रयास करता है उससे आपका कुछ फ़ायदा नही है बल्कि वह ऊपर और उठेगा ।वैसे भी कहा गया है
" अगर आपके विरोधी बढ़ रहे है और आपको निचे दिखने वाले बढ़ रहे है सोच लीजिये आप तरक्की कर रहे है "
इसलिए अपने विचार को सकारात्मक दिशा दे और अपने मेहनत से अपनी ऊचाइयों को छुएँ।
एक स्टोरी आप को सुनाता हूँ:-
एक बार की बात है एक चित्रकार थे , वह चित्र अच्छा बनते थे । वह एक चित्र बनाकर चौरहे पर लगा दिए और उसमे लिख दिए जो भी आदमी इस चित्र को देखे और उसमे कहाँ पर ख़राब है उसे क़लम से सुधारने के वह लिख दे । इसी तरह बहुत से आदमी वहाँ से गुजरने वाले कुछ लिख देते थे । कुछ दिन बाद जब चित्रकार उसे देखे तो उसे लगा की हम इतने ख़राब चित्र बनये थे । एस हो गया था की चित्र ही नही दिख रहा था इतने लोगो ने उसे सुधारने के लिए थे । फिर चित्रकार उसी के जैसा चित्र बनये और वही पर लगा दिए बस इस बार ये लिख दिए की जो भी इस चौराहे से गुजरे और चित्र देखे और उसे जो जहँ अच्छा लगे उसे वहाँ पर कलम से लिख दे । कुछ दिन बाद जब चित्रकार उसको देखे तो दंग रह गए ।इस बार वह एक भी शब्द कुछ नही लिखा था ।
मतलब की हमलोग गलती ढूढ़ने का हर संभम प्रयास करते है  जबकि अच्छी बातों की तरफ ध्यान भी नही देते है ।
धन्यबाद
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कुछ को लगता है , हम शांत और अहिंसा के परवर्ती के लोग है , है हमलोग , तब तक अहिंसा के परवर्ती और शांति की परवर्ती को बनये रखते है जब तक हममे सहने की शक्ति है , आप कुछ बोलेगे मेरे बारे चुप रहैंगे , मेरा बुराई करोगे चुप रहेंगे , एक 2 झापड़ लगा दोगे , फिर भी हम चुप रहेंगे , हर सम्भब अपने आप को शान्ति और अहिंसा को पालन करने का प्रयास करते है , क्योकि ये चीज हमे अपने पूर्वजो से विरासत में मिला है । इसका मतलब ये नही हमे लड़ाई करने नही आता है ,मुहतोड़ जबाब कभी भी दे सकते है । संसार में भारत का नाम हर एक ब्यक्ति को संत परवर्ती के नाम से जाना जाता है ,क्योकि वह लड़ाई झगड़ा , हिंसा का प्रयोग बहुत कम मात्रा में करते है ।
जब आप हिंसा और निर्दोष को मारकरऔर देश को क्षति पहुच हमेसा हमे युद्ध के लिए हमे   मजबूर करोगे तो हम चुप रहकर बैठने वाले नही , जमकर आपका सामना करैंगे और ऐसा कोहराम मचाएंगे की    हमारे निर्दोष आदमी और देश की क्षति पहुचने वाले का नाम तक मिटा देगें ।
" हम शांति का पक्ष लेंगे, अहिंशा का पक्ष लेंगे , प्यार से एक बार नही 2 बार 3 बार समझायेंगे ,फिर भी आप नही समझे तो सस्त्र उठायेंगे और जब सस्त्र एक बार उठा लेते तो अपने दुश्मनों का शर्बनाश कर देते ।"
हमे मजबूर मत कीजिये-------