धन्यबाद ।
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Thursday, 1 December 2016
Acchi bate :-20
धन्यबाद ।
Thursday, 24 November 2016
अच्छी बातें -19
धन्यबाद
Thursday, 13 October 2016
Science and technology in Hindi
विज्ञानं हमे ज्ञानबां बनाता है ,लेकिन दशर्न हमे बुद्धिमान बनाता है ।
विज्ञानं की तिन बिधियों है सिद्धांत ,प्रयोग और सिमुलेशन ।
विज्ञानं की बहुत साडी कल्पनायें गलत है ,यह पूरी तरह ठीक है ,यही परिकल्पनाएँ ही सत्य प्राप्ति के झोरेखे है ।
हम किसी वि चीज को पूर्ण ठीक तरीके से परिभाषित नही कर सकते है ,अगर ऐसा करने की कोशिश करे तो हम भी उस बैचारीक पक्षपात के शिकार हो जायेंगे जिसके सीकर दार्शनिक होते है ।
पर्याप्त रूप के विकसित किसी तकनिकी और जादू में अंतर नही किया जा सकता है ।
सभ्यता की कहानी सार रूप में इंजीनियरिंग की कहानी है वह लम्बा और विकत संघर्स जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिए काम करने के लिए किया गया ।
इंजीनियर इतिहास का निर्माता रहा है और आज भी है ।
वैज्ञानिक इस संसार का ,जैसे ही उस रूप में अध्यन करते है ।इंजीनियर वह संसार बनाता हैं जो कभी था ही नही ।
मशीनी कारन के लिए यह जरुरी है की वह भी मशीन की तरह सोचे ।
इंजीनियरिंग संख्याओं में की जाती है संख्या के वीना विश्लेषण एक मात्र राय है ।
जिसके बारे में आप बात कर रहे है ,अगर आप उसे माप और संख्या में ब्यक्त कर सकते है तो आप उस विषय में कुछ जानते है ।अगर आप उसे मांप नही सकते है तो आप का ज्ञान थोड़ा बहुत सतही है और अशांतोष जनक है ।
तकनिकी के ऊपर ही तकनीक का निर्माण होता है । हम तकनीक रूप से विकाश नही कर सकते है ,यदि हममे यह समझ नही है की सरल के वीना जटिल का अस्तिव संभव नही है ।
तकनीक और विज्ञानं भी प्रकृतिक में ब्याप्त है कोई इसे बहार से लेकर नही आया है ।
अगर कुछ करने के लिए गलत तरीका है तो किसी न तो यह करना पड़ेगा ।
धर्म कला ,विज्ञानं वास्तब में एक ही बृक्ष की शाखा और प्रशाखा है ।
विज्ञानं और वैज्ञानिक कार्यों में सफलता असीमित या बड़े संसाधनों का प्रावधान करने से नही मिलती बल्कि यह समस्याओं को बुद्धिमानी और सतर्कता से चुनने से मिलती है , और जो बढ़कर है वह है निरंतर कठोर परिश्रम ।
एक मशीन 50 साधारण मनुष्यों का काम कर सकते है ,पर एक असाधारण मनुष्यों का काम नही कर सकती है ।
***************************************** तकनिकी का विकाश आदमी के सोच का देन है ।
काम समय में अधिक से अधिक प्रॉडक्ट हो ये भी आदमी की सोच की देन है ।
तकनिकी से से आपस में जुड़े होते है पर वास्तब में वह हमको अपने से दुरी बढाने का काम करते है ।
तकनीक से आदमी की जरूरते पूरा हो सकती है पर वास्तबिक खुसी नही ।
तकनिकी हमे क्षण भंगुर खुसी से सकते है पर वास्तबिक खुसी नही ।
आवश्यकता ही तकनिकी की जननी है ।
आर्टिफिशल intelliance (रोबोट ,कंप्यूटर, atutomation work) हमसे तिब्र सोच और कर सकते है पर उसको भी हमने ही बनाया है ।
तकनीकी से हमे बहुत कुछ आसान हो सकता है पर उसके दुष्यपरिणाम भी घातक है ।
(Altrasound से लिंग ज्ञात करना जिससे लड़की में कमी )
तकनिकी तब तक हमरे सकारत्मक कार्य के लिए और मानब हित के लिए है जब तक वह बैज्ञानिक के पास है ,जैसे ही वह तकनिकी बाजार में ब्यपार के लिए आते है तो वह हमारे लिए घातक हो जाते है ।
तकनीक सिर्फ वही काम कर सकता है जिसके निर्देश पहले हमने दे रखा है ।
तकनीक हमारे अनुशार चलते है न की हम उनके अनुशार ।
तकनीक हमसे अधिक फ़ास्ट काम कर सकता है ,पर उसे और अधिक फ़ास्ट उसमे सुधर कर हम कर सकते है ।
तकनीक हमारे लिए लाभ करी और हानिकारक दोनों है वह हम पे निर्भर करता है की हम उसका उपयोग कैसे करते है ।
अगर तकनिकी का विकाश नही होगा तो ,आजकल हमारे सभी जरूरत भी पूरा नही हो पायेंगे ।
तकनिकी से हम घातक हथियार बन सकते है पर उसे नष्ट करने वाले मानब ही क्र सकते है ।
तकनीक आदमी की कल्पना का देन है , जैसा हम कल्पना करते है आने वाले समय में वही उपकरण बन जाते है ।
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Friday, 7 October 2016
Prakriti in hindi
दुनिया में जितने भी महान बैज्ञानिक बने है वह हमेशा प्राकृति से जुड़े रहे है
बैज्ञानिक उसी चीज की खोज करते है जो प्रकृति में पहले से बिद्दमान है ।
हम प्रकृति के रहस्य को तभी उजागर कर सकते है जब हम प्रकृति के साथ रहते है और उसे जानने की कोशिस करते है ।
पूरा ब्रह्माण्ड रहस्य से भरा परा है अभी तक हम नगण्य के बराबर ही पर्दा उठा है ।
जब कोई प्रकृति की रहस्य जानने की कोसिस करते है उसे सफलता अवश्य मिलती है ।
प्रकृति से जुड़ कर ही हम नई तकनिकी को बिकसित कर सकते है ।
जब कोई प्रकृति में बिद्दमन् ऊर्जा के अखण्ड स्रोत वाले प्रदार्थ की खोज करते है तो वह मानव के हित और सकारत्मक काम के लिए होता है । पर वह इंसान के विरुद्ध ही उपयोग के लिए करते है ।
नव मछली से , विवान पक्षी से न जाने कितने चीज की खोज हुई है वह प्रकृति का ही देन है ।
हम प्रकृति के महाप्रलय का पूर्व अनुमान लगा सकते है पर उसको रोक नही सकते है ।
हम आज है कल नही रहेगें ,पर प्रकृति पहले से है और आगे भी रहेगें ही ।
हम अपने फायदे के लिए प्रकृति को क्षति पंहुचा रहे है पर वस्तिबिक में वो हमारी ही क्षति है ।
प्रकृति ने सभी को सामान चीज दिए है उपयोग के लिए । पर वह जब जाती ,मजहब राष्ट के लिए आपस में लड़ते है तो वह इन्सानियत को ही हानि पहुचते है ।
हमारे लिए स्कूल ,घर ,देश समाज के हम ही कानून हम लोग ही बनाते है ,तोड़ते है तथा उसमे सुधार करते है ।पर प्रकृति का नियम सभी के लिए सामान है ,उसे कोई तोर नही सकता न ही उसमे कोई बदलाव कर सकता है ।
Thursday, 6 October 2016
Acchi bate in hindi -18
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आहकल यह देखा गया है , हमेशा दूसरे की तारीफ करने लगते है , तारीफ में अपना कीमती समय नष्ट मत कीजिये । आप भी सकारात्मक काम कीजिये और और महान आदमी की जिबनी पढ़कर उसे अपने जीबन में उतारिये और अपने महान लक्ष्य को अंजाम तक पहुचाइए और खुद भी अपने आपको को तारीफ के काबिल बनाइये।
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आहकल यह देखा गया है , हमेशा दूसरे की तारीफ करने लगते है , तारीफ में अपना कीमती समय नष्ट मत कीजिये । आप भी सकारात्मक काम कीजिये और और महान आदमी की जिबनी पढ़कर उसे अपने जीबन में उतारिये और अपने महान लक्ष्य को अंजाम तक पहुचाइए और खुद भी अपने आपको को तारीफ के काबिल बनाइये।
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अपने आप को पहचानिये और अपने लक्ष्य को पूरा कीजिये ।
अगर आप बाइक चलना जानते है तो , वो कोई बीके क्यों न हो चाहे हीरो हो , प्लसर हो , बजाज हो ,बुलेट हो , कितने भी cc के हो , 100cc वाले हो 300cc वाले हो आप चला ही लीजियेगा । अगर pc ऑपरेट करने वाले है , तो wondo हो xp हो या linux हो , कोई भी क्यों न हो आप ऑपरेट क्र ही लीजियेगा ।
आप एयर गन चलने जानते है तो आप कोई भी गन चला सकते है चाहे उसमे कितने ही mm की बुलेट क्यों न लगते है । अगर आप पढ़ने लिखने जानते है तो आप अपने कोई भी लक्ष्य को पूरा क्र सकते है , बस आपको थोड़ा ही मेहनत करते है , पर आपमें धर्य है तो ।
Tuesday, 4 October 2016
Scitech in hindi (Scitech-1)-newtons low of motion
Newton’s laws of motions

पर हमारे आस पास होने वाली घटनाओं के बारे में आप सायद ही जानते
होंगे | इन तीन नियमो से जुङी कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिसे जान के आप कहेंगे
की ये न्यूटन के इश नियम से होता है |
न्यूटन गति का पर्थम नियम के अनुसार कोई भी बस्तु अपने प्रारंभिक अभास्ता
में रहनी चाहती है जब तक कोई बाहरी बल लगाकर उशकी अबस्था में परिबर्तन
न किआ जाये| न्यूटन गति का पर्थम नियम को जङत्व का नियम भी
कहा जाता है| न्यूटन गति का पर्थम नियम से हमे बल कि परिभाषा मिलती है |
लाइफ में देखते और करते हैं :-
(i) रुकी हुई गाड़ी के अचानक चल पड़ने से उसमे बैठे यात्री पीछे की ओरे
झुक जाता है|
(ii) चलती हुई गाड़ी के अचानक रुक जाने से उसमे बैठे यात्री आगे की ओरे
झुक जाता है|
(iii) पेड़ की टहनियों को हिलाने से उष टहनी में लगा फल निचे गिर जाता है |
(iv) कम्बल को हाथ में पकड़ कर डंडे से मरने पर धूल के कण झरकर निचे
गिर जाते हैं |
(v) गोली मरने से काँच में गोल छेद हो जाता है , परुन्तु पत्थर से मारने पर काँच
टुकरे टुकर हो जाता है |
(vi) हथौरी को डंटे के कसने के लिए , डंटे को जामिन पर मरते हैं हथौरी को नही |
किसी बस्तु के संबेग (momentum) परिबर्तन कि दर उष बस्तु पर आरोपित बल
के समनुपति होता है तथा संबेग परिबर्तन बल की दिसा में होता है | F = ma
अर्थात न्यूटन गति के द्वितीया नियम से हमे बल का ब्यंजक प्राप्त होता है |
में देखते और करते हैं :-
(i) क्रिकेट प्लेयर तेजी से आती हुई गेंद को रोकने के लिया अपने हाथ को पीछे
की तरफ खीच लेता है ताकि संबेग कम हो जाये और प्लेयर को चोट कम लगे |
(ii) हाई जंप और लौग जंप के दौरान मैदान की मिट्टी खोद कर हलकी कर दी जाती
है ताकि संबेग कम हो जाये और कूदने पर चोट कम लगे |
(iii) अधिक गहराई तक किल को ठोकने के लिया भरी हौथारे का प्रोयाग किआ जाता है
ताकि मास को बढ़ा के फाॅर्स की मात्र को बढ़ाया जा सके और किल अधिक गहरई
तक जा सके |
(iv) सामान बेग से आती हुई क्रिकेट गेंद एबं टेनिस गेंद में से टेनिस गेंद को कैच
करना आसान होता है |
(v) गद्दा या मिट्टी के फर्श पे गिरने पर कम चोट लगता है , सीमेंट से बने फर्श पर गिरने
की तुलना में क्योकि गद्दा और मिट्टी संबेग को कम कर देती है | जब की सीमेंट से बने फर्श
संबेग को कम नही कर पता है |
(vi) गारी में स्प्रिंग या शॉक अब्जोर्बर इश लिया लगाये जाते हैं ताकि झटके कम लगे |
(vii) कराटे खिलारी द्वारा इटो की पट्टी (slab) को तोरना |
इश नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर परुन्तु बिपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है |
(every action has equal and opposite reaction).
लाइफ में देखते और करते हैं :-
(i) बंदूक से गोली चलाने पर पीछे की ओरे झटका लगना |
(ii) नाव को आगे बढ़ाने के लिया चप्पु से पानी को पीछे की और धकेलना |
(iii) नाव पर से किनारे पर कूदते पर नाव का पीछे की ओरे हटना |
(iv) कुआँ से पानी खिचते समय रस्सी का टूटने पर व्यक्ति का पीछे की और गिरना |
(v) उचाई से कूदने पर चोट लगना |
(vi) राकेट का आगे बढना |
(vii) इशी नियम के अधार पर तैराक आगे बढता है |
Acchi bate 18
~
आज कला के पढ़े लिखे युवा भी लड़ाई झगड़े और मर पिट के लिए तैयार हो जाते है ,वो भी उससे जिसकी कोई औकाद नही है ,जिसका कोई बैकग्राउंड नही है , जिसकी कोई इज्जत नही है , वो रोड छाप होते है ,इस तरह के आदमी से भूल कर भी कभी नही उलझने और बकवास करने चाहिए । जैसे रिक्शा चालक , रोड पे गाड़ी चलने वाले ड्राईवर और खलासी , रेलवे स्टेशन के पास दुकान करने वाले , कोठी , और फिर लफंगे सब जो रोड पे अवरगिरि करने वाले (इस तरह के लड़के सब के कुछ बेक ग्राउंड नही होते है , रोड पे रहना ,कमेंट पास करना , कार्ड खेलना जुवा खेलना यही उन लोग की पहचान है , बात बात में आपस में गली गौलोज करना ,देख के ही पता लग जायेंगे ) और बहुत कुछ है ,इस तरह के आदमी के कभी नही मुह लगाना चाहिए । मैंने बहुत को देखा है , हाथापाई करते , इस सब की क्या औकात ह।ै हमेसा रोड पे रहता ,हमेशा आप देखिएगा की इस सब के आदमी से हमेसा दिन में दो तिन बार लड़ाई ,गली गौलोज करते आपको भी मिल जायेगे ।वो सब ऐसे माहौल में रहकर ,हमेसा मुह से कुछ अपशब्द निकाल ही देता है , वो ये नही देखता की सामने वाले कैसा आदमी है , यहाँ तक तो अगर कोई बस में बैथ गए और उसके पास रूपये नही है या छुट्टे नही है ,बस से उतार देते है । अगर कुछ आप बोलेगे तो आपको ही उल्टा जबाब मिलते रहेगा ।उस टाइम तो सब गुस्से से आग बाबुल हो जाता है कोई गुस्से को बर्दास्त कर लेता है ,कोई उसे दो चार झापड़ लगा देता है । बात यह है की आप दो झापड़ लगा दिए उसको कोई फर्क नही परेगा , पर आपको अगर कुछ बोल देता है ,न जाने कब तक दिमाग में टेंसन रहता है , आप ये सोचते की वो जिसकी कोई औकात नही है वो हमको ऐसा बोल दिया । यहाँ तक तो देखे है लड़ाई के लिए भिर जाता है , अब इज्जत उसकी नही आपकी ख़राब होगी इतने आदमी के बिच में कुछ बोलना , अगल बगल के आदमी देखने लगते है ,की किस बात के बात लेकर लड़ाई हुआ ।आपको वो बात कितने दिनों तक टेंसन देते रहेगा । उसको तो कोई फर्क नही परेगा , क्योकि उकसा तो डेली का रूटिंग हो गया है , किसी न किसी से लड़ाई करना , बहस करना । उसे थोरे इज्जत प्रतिष्ठा का कोई दर है , डेली उकसा यही काम है ।पर आप तो कभी कभी जाते है , आपकी एक इज्जत प्रतिष्ठा होती है ।रिक्शा वाले के साथ ऐसा ऐसा घटना हो जाता है की अगर थोड़ी दूर आगे ,या गली में चलने को बोल दिए न जाने क्या क्या बोलने लगेगा , इतने रूपये में यही तक ,अब हम आगे नही जा सकते है , गली में जायेगे तो इतने रूपये और लेगें , उस टाइम सभी को बहुत गुस्सा आता है , किसी का मन करता की उसको दो झापड़ लगा दे , कुछ तो लगा भी देता है , अगर आपके पास थोड़ा सामान है तो और नाटक स्टार्ट कर देता है ,अब हम आगे नही जायेगा , आप यही तक बोले थे उस समय और रूपये माँगने लगते है । अब क्या कीजियेगा रोडछाप रोड जैसे उसके बिचार होते है । इसी तरह कुछ दूकानदार वाले होते है , बेचने टाइम कितने मोटीवेट करते है , इतने दिन की गैरन्टी ,जब कुछ खराबी हो जाये तो ,फिर उसका नाटक स्टार्ट ,कल आना परसो आना ,आज स्टाप नही नही ,compnay वाले से बात नही हुआ है , इतने बार आपको बुलाएंगे की सबको गुस्सा आ जाता है । उस टाइम तो मन करता इसको बहुत पिटाई करे ।आखिर कार मजबूरी में बार बार जाना पार्ट है । इसी तारह स्टेशन के बगल के दूकानदार का जयदा बढ़ा के प्राइस बोलता ,मजबूरी में हमको लेना पड़ता है ।आपको बहुत बहुत मिल जायेगे ऐसे ।
" इसतरह के आदमी से अगर आप मुह लगते है ,इज्जत उसकी नही आपकी ही जायेगी "
अगर इस तरह के आदमी को सबक सिखाना है ,समय का इंतजार कीजिये , और आप जयदा की संख्या में हो और उसे ऐसा डराये ।4,5 के ग्रुप में जाइये और जमकर डोज दीजिये ,इतना डरा दीजिये की आने वाले समय में किसी और के साथ ऐसा न करे ।लेकिन सीघ्र कोई काम मत कीजिये ,समय का प्रतीक्षा कीजिये और जमकर बरिशिए । ताकि उसकी औकात पता चल जाये ,और दोबारा किसी कस्टमर से मुह फट हो कर बात न करे । अगर सीघ्र कोई काम करते है तो परेशानी आपकी बढेगी , सायद कोई काम से आप जा रहे है तो वो काम छूट जाये ऐसे झमेले में । अकेले मत करिये ग्रुप में ताकि आपका दबदबा उसपे बना रहे ।मर पिट मत कीजिये ,बस धमाका के छोर दीजिये ।
मैं यह नही कहता की सारा कोई ऐसा ही होता है। पर कुछ होते है जरूर,ये आपको भी पता है और हमलोगों को भी।
धन्यबाद ,ये हमारे अपने विचार है ।
हो सकता मैं गलत भी हो सकता हूँ ।
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लक(भाग्य) और मेहनत ?
लक और मेहनत के सबके अपना अपना मनना होता है ।
मैं क्या मानता हूँ ,वो मैं आपको बताता हूँ
जब कोई ब्यक्ति विषेस या किसी संस्था द्वरा कोई चीज प्रतियोगिता किया जाता है तो वह आपका लक नही आपके मेहनत काम आएगा । जो काम आपको पहले से पता है वह लक नही मेहनत काम आता है ,और जिस काम के बारे में पहले से कुछ पता नही पूरी तरह से अनजान है वह काम एक एक हो जाना वह लक है ।जैसे कही जा रहे हो और आपको लॉटरी मिल जाये ,या रूपये से भरे बैग मिल जाये , या कोई काम अनजाने पूरा हो जाना ,कोई आपको रस्ते में एक अच्छी लड़की मिल जाये और आपका उससे बात होने लगे ये सब लक होता है ,मतलब कोई अच्छा काम अस्कमात हो जाये तो उसे लक कहते है और अस्कमात बुरा काम हो जाये तो उसे बैडलक कहते है ,यही होता है सभी के साथ। मेहनत का लक से कोई लेना देना नही है , जब आप को प्रतियोगिता परीक्षा देने जा रहे है तो आपको वहाँ आपका मेहनत काम आएगा , मतलब जो काम करने का आपको पूर्व जानकारी है वह लक का कोई लेना देना नही है , बस आपका मेहनत काम आएगा ।अगर कोई अनपढ़ को प्रतियोगिता परीक्षा में बैठा दिया जाये तो क्या उकसा लक काम आएगा ,कदापि नही । हाँ जो मेहनत कर के गया होगा उसी से प्रश्न हल होएंगे जितने मेहनत किये होंगे जितने हल होंगे ।कोई निशानेबाज अगर अपने पाँच लक्ष्य को सधता है तो पाँच को भेद सकता है , क्यकी वह पहले से मेहनत किया है ।किसी अन्य आदमी को दे दिया जाये भेदने के लिए तो सायद कोई न लगे या फिर एक लग जाये पर वह पाँच के पाँच अपने लक्ष्य पर नही भेद सकेंगे ।
बस मेरा मनना है
" जब कोई काम आपको पूर्व पता है उस काम को करना है उसके लिए मेहनत काम आते है ।और कोई काम या फिर कुछ और जिसका आपको पूर्व जानकारी नही है पर वह काम हो जाता है उसे लक कहते है "
इसलिए अपने लक पर नही अपने मेहनत पर विस्वास् कीजिये ।
अपने लक के भरोशे मत बैठिये ,मेहनत कीजिये और सफलता जरूर मिलेँगे ।
जिस काम लिए आप भाग्य के भरोशे बैठे वह अपने आप कभी नही पूरा होंगे क्योंकि वह काम आपको पहले से पता है ।
धन्यबाद।
Saturday, 1 October 2016
Acchi bate -17
और तो और हमलोग दूसरे की गलती को हर सम्भब ढूढनेप्रयास करते है , दूसरे की गलती को खोजने में न जाने हम अपने शारीर का ऊर्जा कितना हिस्सा नष्ट क्र देते है , पर मिलता है उससे क्या कुछ । अगर वही ऊर्जा हम अपने गलती को ढूढ़ने का प्रयास करैंगे तो अपना भला होगा और साथ ही साथ हमसे जुड़े कितने का उद्धार होगा ।जो जिस अवस्था में है उसे रहने दीजिये सायद वह मेहनत कर उस मुकाम तक पंहुचा होगा । और हम क्या करते है उसे निचे दिखने का हर सम्भब प्रयास करता है उससे आपका कुछ फ़ायदा नही है बल्कि वह ऊपर और उठेगा ।वैसे भी कहा गया है
" अगर आपके विरोधी बढ़ रहे है और आपको निचे दिखने वाले बढ़ रहे है सोच लीजिये आप तरक्की कर रहे है "
इसलिए अपने विचार को सकारात्मक दिशा दे और अपने मेहनत से अपनी ऊचाइयों को छुएँ।
एक स्टोरी आप को सुनाता हूँ:-
एक बार की बात है एक चित्रकार थे , वह चित्र अच्छा बनते थे । वह एक चित्र बनाकर चौरहे पर लगा दिए और उसमे लिख दिए जो भी आदमी इस चित्र को देखे और उसमे कहाँ पर ख़राब है उसे क़लम से सुधारने के वह लिख दे । इसी तरह बहुत से आदमी वहाँ से गुजरने वाले कुछ लिख देते थे । कुछ दिन बाद जब चित्रकार उसे देखे तो उसे लगा की हम इतने ख़राब चित्र बनये थे । एस हो गया था की चित्र ही नही दिख रहा था इतने लोगो ने उसे सुधारने के लिए थे । फिर चित्रकार उसी के जैसा चित्र बनये और वही पर लगा दिए बस इस बार ये लिख दिए की जो भी इस चौराहे से गुजरे और चित्र देखे और उसे जो जहँ अच्छा लगे उसे वहाँ पर कलम से लिख दे । कुछ दिन बाद जब चित्रकार उसको देखे तो दंग रह गए ।इस बार वह एक भी शब्द कुछ नही लिखा था ।
मतलब की हमलोग गलती ढूढ़ने का हर संभम प्रयास करते है जबकि अच्छी बातों की तरफ ध्यान भी नही देते है ।
धन्यबाद
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कुछ को लगता है , हम शांत और अहिंसा के परवर्ती के लोग है , है हमलोग , तब तक अहिंसा के परवर्ती और शांति की परवर्ती को बनये रखते है जब तक हममे सहने की शक्ति है , आप कुछ बोलेगे मेरे बारे चुप रहैंगे , मेरा बुराई करोगे चुप रहेंगे , एक 2 झापड़ लगा दोगे , फिर भी हम चुप रहेंगे , हर सम्भब अपने आप को शान्ति और अहिंसा को पालन करने का प्रयास करते है , क्योकि ये चीज हमे अपने पूर्वजो से विरासत में मिला है । इसका मतलब ये नही हमे लड़ाई करने नही आता है ,मुहतोड़ जबाब कभी भी दे सकते है । संसार में भारत का नाम हर एक ब्यक्ति को संत परवर्ती के नाम से जाना जाता है ,क्योकि वह लड़ाई झगड़ा , हिंसा का प्रयोग बहुत कम मात्रा में करते है ।
जब आप हिंसा और निर्दोष को मारकरऔर देश को क्षति पहुच हमेसा हमे युद्ध के लिए हमे मजबूर करोगे तो हम चुप रहकर बैठने वाले नही , जमकर आपका सामना करैंगे और ऐसा कोहराम मचाएंगे की हमारे निर्दोष आदमी और देश की क्षति पहुचने वाले का नाम तक मिटा देगें ।
" हम शांति का पक्ष लेंगे, अहिंशा का पक्ष लेंगे , प्यार से एक बार नही 2 बार 3 बार समझायेंगे ,फिर भी आप नही समझे तो सस्त्र उठायेंगे और जब सस्त्र एक बार उठा लेते तो अपने दुश्मनों का शर्बनाश कर देते ।"
हमे मजबूर मत कीजिये-------
Wednesday, 28 September 2016
Acchi bate -16
इसलिये सांप पलने वाले सतर्क हो जाये क्योंकी जब उसके पूछ पर पैर पड़ेगें वो काटने से चूकेंगे नही ।
यही सत्य है ।
शंकर भगवान ने भस्मासुर बनये थे , थे असुर पर जब वो आतंक करना सुरु किये देबता सब भी उसे छुपने और भागने लगे । यहाँ तक की भगवान शंकर भी । अंत में कितने मुश्किल के साथ उसको समाप्त किया गया भगवान बिष्णु के द्वारा ।
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सस्त्र से 2 , 3 , 4, 10 , 20 को अपने सामने झुका सकते है । पर वो तब तक ही झुकेंगे जब तक आप के शस्त्र है । और जब बुद्धि का प्रयोग कर आप झुकाते है हाँ थोड़ा समय लग सकता है ,तो वह फिर कभी आपके सामने सर नही उठायेगे ।और आपके फेन हो जायेंगे और शस्त्र से झुकाया हुआ सर आपके दुश्मन हो जायेंगे ।
"अपने लक्ष्य तक पहुचने का दो रास्ते होते है , एक आसान और एक कठिन | आसान रास्ता आपको अपने लक्ष्य के काफी समीप लगेगा , पर वास्तब में वो आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने देगा नही ।और कठिन रस्ते और थोड़ा दूर लगेंगे पर वह आपको अपने लक्ष्य तक पंहुचा देगा ।"
आप पता होगा
company की प्रोडक्ट खरीदते है तो आपको एक बार रुलाता है मतलब जयदा रुपया लगता हैं
पर जब कोई ओडनारी प्रॉडक्ट ख़रीदते है तो आप को बार बार रुलाता है मतलब 2 महीने चलाइये ये ख़राब वो ख़राब आखिर में useless हो जाता हैं ।
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कोई अच्छे स्कूल में पढ़ने से कोई महान नही बना जाता । अगर कोई ख़राब स्कूल में पढ़कर अगर कोई महान काम करता है तो वो वह स्कूल नाम भी बढ़ जाता है।
कोई उच्चय जाती या निम्न जाती में हो अगर वह बुरे काम करते तो वह हमेसा के लिए उसके इज्जत ख़राब हो जाते । अगर निम्न जाती के हो अगर अच्छे काम क़र जाते है हमेसा के लिए नाम हो जाता है ।
अगर वह किसी धर्म के ब्यक्ति हो और धर्म के नाम पर किसी को कष्ट और बुरे काम करते है , बल्कि धर्म या महजब बल्कि आदमी बुरे है , कोई भी धर्म की निब रखने वाले कोई वह तो महान् ही आदमी होएंगे ने जिसने इतने बड़े आदमी को आपने महजब में जोरा । जैसे बौद्ध , जैन , सिख , ईसाई और न जाने कितने सबके आदर करने चाहिए ।
कोई अच्छे राजनितिक पार्टी नही होते , बल्कि उस पार्टी को बनाने वाले और उस पार्टी की कयर्कता पर निर्भर करता है । एक समय में कोई पार्टी अच्छे होते है , कभी वही पार्टी बेकार हो जाते है , समय के साथ सारा कुछ परवर्तन शील है , कोई राजनितिक तब तक अच्छे रहेंगे जब तक वह अच्छे आदमी कार्यकर्ता रहेंगे ।
जाती धर्म महजब से उपर उठकर सोचिये की देश की विकाश में योगदान दीजिये । अपना मूल्य चुनिए और देश को आगे बढाइये ।
Monday, 26 September 2016
अच्छी बातें-15
वह इतना शर्मसार हुआ कि एक साधु के पास पहुँचा और पूछा, ‘‘मैं अपनी गलती का प्रायश्चित करना चाहता हूँ।’’
साधु ने कहा कि पंखों से भरा एक थैला लाओ और उसे शहर के बीचों-बीच उड़ा दो। किसान ने ठीक वैसा ही किया, जैसा कि साधु ने उससे कहा था और फिर साधु के पास लौट आया।
लौटने पर साधु ने उससे कहा, ‘‘अब जाओ और जितने भी पंख उड़े हैं उन्हें बटोर कर थैले में भर लाओ।’’
नादान किसान जब वैसा करने पहुँचा तो उसे मालूम हुआ कि यह काम मुश्किल नहीं बल्कि असंभव है। खैर, खाली थैला ले, वह वापस साधु के पास आ गया। यह देख साधु ने उससे कहा, ‘‘ऐसा ही मुँह से निकले शब्दों के साथ भी होता है।’’
इसलिए हमेशा अपने शब्दों को तौल कर बोलें । महान दार्शनिक कन्फ्यूसियस ने कहा है-‘शब्दों को नाप तौल कर बोलो, जिससे तुम्हारी सज्जनता टपके।‘ भारतीय दार्शनिक जे. कृष्णमूर्ति के अनुसार -‘कम बोलो, तब बोलो जब यह विश्वास हो जाए कि जो बोलने जा रहे हो उससे सत्य, न्याय और नम्रता का व्यतिक्रम न होगा।‘
सोच का फर्क - story 8
आँखों में बुरी तरह जलन होती थी, वह डॉक्टर के पास गया लेकिन डॉक्टर उसकी इस बीमारी का इलाज नहीं कर पाया| सेठ के पास बहुत पैसा था उसने देश विदेश से बहुत सारे नीम- हकीम और डॉक्टर बुलाए| एक बड़े डॉक्टर ने बताया की आपकी आँखों में एलर्जी है| आपको कुछ दिन तक सिर्फ़ हरा रंग ही देखना होगा और कोई और रंग देखेंगे तो आपकी आँखों को परेशानी होगी|
अब क्या था, सेठ ने बड़े बड़े पेंटरों को बुलाया और पूरे महल को हरे रंग से रंगने के लिए कहा| वह बोला- मुझे हरे रंग से अलावा कोई और रंग दिखाई नहीं देना चाहिए मैं जहाँ से भी गुजरूँ, हर जगह हरा रंग कर दो|
इस काम में बहुत पैसा खर्च हो रहा था लेकिन फिर भी सेठ की नज़र किसी अलग रंग पर पड़ ही जाती थी क्यूंकी पूरे नगर को हरे रंग से रंगना को संभव ही नहीं था, सेठ दिन प्रतिदिन पेंट कराने के लिए पैसा खर्च करता जा रहा था|
वहीं शहर के एक सज्जन पुरुष गुजर रहा था उसने चारों तरफ हरा रंग देखकर लोगों से कारण पूछा| सारी बात सुनकर वह सेठ के पास गया और बोला सेठ जी आपको इतना पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं है मेरे पास आपकी परेशानी का एक छोटा सा हल है.. आप हरा चश्मा क्यूँ नहीं खरीद लेते फिर सब कुछ हरा हो जाएगा|
सेठ की आँख खुली की खुली रह गयी उसके दिमाग़ में यह शानदार विचार आया ही नहीं वह बेकार में इतना पैसा खर्च किए जा रहा था|
तो मित्रों, जीवन में हमारी सोच और देखने के नज़रिए पर भी बहुत सारी चीज़ें निर्भर करतीं हैं कई बार परेशानी का हल बहुत आसान होता है लेकिन हम परेशानी में फँसे रहते हैं| तो मित्रों इसे कहते हैं सोच का फ़र्क|
Saturday, 24 September 2016
अच्छी बातें-14
सब्र का फल
बात उस समय की है जब महात्मा बुद्ध विश्व भर में भ्रमण करते हुए बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे और लोगों को ज्ञान दे रहे थे|
एक बार महात्मा बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ एक गाँव में भ्रमण कर रहे थे| उन दिनों कोई वाहन नहीं हुआ करते थे सो लोग पैदल ही मीलों की यात्रा करते थे| ऐसे ही गाँव में घूमते हुए काफ़ी देर हो गयी थी| बुद्ध जी को काफ़ी प्यास लगी थी| उन्होनें अपने एक शिष्य को गाँव से पानी लाने की आज्ञा दी| जब वह शिष्य गाँव में अंदर गया तो उसने देखा वहाँ एक नदी थी जहाँ बहुत सारे लोग कपड़े धो रहे थे कुछ लोग नहा रहे थे तो नदी का पानी काफ़ी गंदा सा दिख रहा था|
शिष्य को लगा की गुरु जी के लिए ऐसा गंदा पानी ले जाना ठीक नहीं होगा, ये सोचकर वह वापस आ गया| महात्मा बुद्ध को बहुत प्यास लगी थी इसीलिए उन्होनें फिर से दूसरे शिष्य को पानी लाने भेजा| कुछ देर बाद वह शिष्य लौटा और पानी ले आया| महात्मा बुद्ध ने शिष्य से पूछा की नदी का पानी तो गंदा था फिर तुम साफ पानी कैसे ले आए| शिष्य बोला की प्रभु वहाँ नदी का पानी वास्तव में गंदा था लेकिन लोगों के जाने के बाद मैने कुछ देर इंतजार किया| और कुछ देर बाद मिट्टी नीचे बैठ गयी और साफ पानी उपर आ गया|
बुद्ध यह सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और बाकी शिष्यों को भी सीख दी कि हमारा ये जो जीवन है यह पानी की तरह है| जब तक हमारे कर्म अच्छे हैं तब तक सब कुछ शुद्ध है, लेकिन जीवन में कई बार दुख और समस्या भी आते हैं जिससे जीवन रूपी पानी गंदा लगने लगता है| कुछ लोग पहले वाले शिष्य की तरह बुराई को देख कर घबरा जाते हैं और मुसीबत देखकर वापस लौट जाते हैं, वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाते वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जो धैर्यशील होते हैं वो व्याकुल नहीं होते और कुछ समय बाद गंदगी रूपी समस्याएँ और दुख खुद ही ख़त्म हो जाते हैं|
तो मित्रों, इस कहानी की सीख यही है कि समस्या और बुराई केवल कुछ समय के लिए जीवन रूपी पानी को गंदा कर सकती है| लेकिन अगर आप धैर्य से काम लेंगे तो बुराई खुद ही कुछ समय बाद आपका साथ छोड़ देगी|
Story -7
Story 7
छोटी-छोटी बाधाओं को पहाड़ ना समझें, बिना समय गंवाएं उनसे लड़ें !
एक किसान था. उसके खेत में एक पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था और कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा और इस बार वही हुआ, किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया. किसान क्रोधित हो उठा, और उसने निश्चय किया कि आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.
वह तुरंत गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा और बोल, ” यह देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने मेरा बहुत नुक्सान किया है, और आज हम सभी को मिलकर इसे आज उखाड़कर खेत के बाहर फ़ेंक देना है.” और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा, पर यह क्या ! अभी उसने एक-दो बार ही मारा था कि पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया. साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा , “क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है , पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”
किसान भी आश्चर्य में पड़ गया सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था ! उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता तो ना उसे इतना नुकसान उठाना पड़ता और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता .
हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं और उनसे निपटने की बजाय तकलीफ उठाते रहते हैं. ज़रुरत इस बातकी है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें , और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी जिसे हम आसानी से हल पाकर आगे बढ़ सकते हैं.
Story -6
अपनी त्रुटियों पर विजय ही मनुष्य को महान बनाती है.
अपनी बहन इलाइजा के साथ एक किशोर बालक घूमने निकला। रास्ते में एक किसान की लड़की मिली। वह सिर पर अमरूदों का टोकरा रखे हुए उन्हें बेचने बाज़ार जा रही थी। इलाइजा ने भूल से टक्कर मार दी, जिससे सब अमरूद वहीं गिरकर गन्दे हो गये। कुछ फूट गये, कुछ में कीचड़ लग गई।
गरीब लड़की रो पड़ी। “अब मैं अपने माता पिता को क्या खिलाऊंगी जाकर, उन्हें कई दिन तक भूखा रहना पड़ेगा।” इस तरह अपनी दीनता व्यक्त करती हुई वह अमरूद वाली लड़की खड़ी रो रही थी। इलाइजा ने कहा- “भैया चलो भाग चलें, कोई आयेगा तो हम पर मार पड़ेगी और दण्ड भी देना पड़ेगा। अभी तो यहाँ कोई देखता भी नहीं।”
बहन देख ऐसा मत कह, जब लोग ऐसा मान लेते हैं कि यहाँ कोई नहीं देख रहा, तभी तो पाप होते हैं। जहाँ मनुष्य स्वयं उपस्थित है वहाँ एकान्त कैसा? उसके अन्दर बैठी हुई आत्मा ही गिर गई तो फिर ईश्वर भले ही दण्ड न दे वह आप ही मर जाता है। गिरी हुई आत्मायें ही संसार में कष्ट भोगती हैं, इसे तू नहीं जानती, मैं जानता हूँ।”
इतना कहकर उस बालक ने अपनी जेब में रखे सभी तीन आने पैसे उस ग्रामीण कन्या को दिये और उससे कहा-बहन तू मेरे साथ चल। हमने गलती की है तो उसका दण्ड भी हमें सहर्ष स्वीकार करना चाहिये, तुम्हारे फलों का मूल्य घर चल कर चुका दूँगा।”
तीनों घर पहुँचे, बालक ने सारी बात माँ को सुनाई। माँ ने एक तमाचा इलाइजा को जड़ा दूसरा उस लड़के को और गुस्से से बोली- “तुम लोग नाहक घूमने क्यों गये? घर खर्च के लिये पैसे नहीं, अब यह दण्ड कौन भुगते?”
बच्चे ने कहा- “माता जी! देख मेरे जब खर्च के पैसे तू इस लड़की को दे दे। मेरा दोपहर का विद्यालय का नाश्ता बन्द रहेगा, मुझे उसमें रत्ती भर भी आपत्ति नहीं है। अपनी गलती के लिये प्रायश्चित भी तो मुझे ही करना चाहिये।”
माँ ने उसके डेढ़ महीने के जेब खर्च के पैसे उस लड़की को दे दिये। लड़की प्रसन्न होकर घर चली गई। डेढ़ महीने तक विद्यालय में उस लड़के को कुछ भी नाश्ता नहीं मिला, इसमें उसने जरा भी अप्रसन्नता प्रकट नहीं की। अपनी मानसिक त्रुटियों पर इतनी गम्भीरता से विजय पाने वाला यही बालक आगे चलकर विश्व विजेता नैपोलियन बोनापार्ट के नाम से विश्व विख्यात हुआ।
अच्छी बातें -13
सुकरात और आईना
दार्शनिक सुकरात दिखने में कुरुप थे। वह एक दिन अकेले बैठे हुए आईना हाथ मे लिए अपना चेहरा देख रहे थे।
तभी उनका एक शिष्य कमरे मे आया ; सुकरात को आईना देखते हुए देख उसे कुछ अजीब लगा । वह कुछ बोला नही सिर्फ मुस्कराने लगा। विद्वान सुकरात शिष्य की मुस्कराहट देख कर सब समझ गए और कुछ देर बाद बोले ,”मैं तुम्हारे मुस्कराने का मतलब समझ रहा हूँ…….शायद तुम सोच रहे हो कि मुझ जैसा कुरुप आदमी आईना क्यों देख रहा है ?”
शिष्य कुछ नहीं बोला , उसका सिर शर्म से झुक गया।
सुकरात ने फिर बोलना शुरु किया , “शायद तुम नहीं जानते कि मैं आईना क्यों देखता हूँ”
“नहीं ” , शिष्य बोला ।
गुरु जी ने कहा “मैं कुरूप हूं इसलिए रोजाना आईना देखता हूं”। आईना देख कर मुझे अपनी कुरुपता का भान हो जाता है। मैं अपने रूप को जानता हूं। इसलिए मैं हर रोज कोशिश करता हूं कि अच्छे काम करुं ताकि मेरी यह कुरुपता ढक जाए। “
शिष्य को ये बहुत शिक्षाप्रद लगी । परंतु उसने एक शंका प्रकट की- ” तब गुरू जी, इस तर्क के अनुसार सुंदर लोगों को तो आईना नही देखना चाहिए ?”
“ऐसी बात नही!” सुकरात समझाते हुए बोले ,” उन्हे भी आईना अवश्य देखना चाहिए”! इसलिए ताकि उन्हे ध्यॉन रहे कि वे जितने सुंदर दीखते हैं उतने ही सुंदर काम करें, कहीं बुरे काम उनकी सुंदरता को ढक ना ले और परिणामवश उन्हें कुरूप ना बना दे ।
शिष्य को गुरु जी की बात का रहस्य मालूम हो गया। वह गुरु के आगे नतमस्तक हो गया।
प्रिय मित्रो, कहने का भाव यह है कि सुन्दरता मन व् भावों से दिखती है। शरीर की सुन्दरता तात्कालिक है जब कि मन और विचारों की सुन्दरता की सुगंध दूर-दूर तक फैलती है।
Friday, 23 September 2016
बुद्धि का बल - story 5
बुद्धि का बल
विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक सुकरात एक बार अपने शिष्यों के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे। तभी वहां एक ज्योतिषी आ पहुंचा।
वह सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए बोला ,' मैं ज्ञानी हूँ ,मैं किसी का चेहरा देखकर उसका चरित्र बता सकता हूँ। बताओ तुममें से कौन मेरी इस विद्या को परखना चाहेगा?'
सभी शिष्य सुकरात की तरफ देखने लगे।
सुकरात ने उस ज्योतिषी से अपने बारे में बताने के लिए कहा।
अब वह ज्योतिषी उन्हें ध्यान से देखने लगा।
सुकरात बहुत बड़े ज्ञानी तो थे लेकिन देखने में बड़े सामान्य थे , बल्कि उन्हें कुरूप कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी।
ज्योतिषी उन्हें कुछ देर निहारने के बाद बोला, ” तुम्हारे चेहरे की बनावट बताती है कि तुम सत्ता के विरोधी हो, तुम्हारे अंदर द्रोह करने की भावना प्रबल है। तुम्हारी आँखों के बीच पड़ी सिकुड़न तुम्हारे अत्यंत क्रोधी होने का प्रमाण देती है ….'
ज्योतिषी ने अभी इतना ही कहा था कि वहां बैठे शिष्य अपने गुरु के बारे में ये बातें सुनकर गुस्से में आ गए और उस ज्योतिषी को तुरंत वहां से जाने के लिए कहा।
पर सुकरात ने उन्हें शांत करते हुए ज्योतिषी को अपनी बात पूर्ण करने के लिए कहा।
ज्योतिषी बोला, ” तुम्हारा बेडौल सिर और माथे से पता चलता है कि तुम एक लालची ज्योतिषी हो, और तुम्हारी ठुड्डी की बनावट तुम्हारे सनकी होने के तरफ इशारा करती है।”
इतना सुनकर शिष्य और भी क्रोधित हो गए पर इसके उलट सुकरात प्रसन्न हो गए और ज्योतिषी को इनाम देकर विदा किया। शिष्य सुकरात के इस व्यवहार से आश्चर्य में पड़ गए और उनसे पूछा, ' गुरूजी, आपने उस ज्योतिषी को इनाम क्यों दिया, जबकि उसने जो कुछ भी कहाँ वो सब गलत है ?'
नहीं पुत्रों, ज्योतिषी ने जो कुछ भी कहा वो सब सच है, उसके बताये सारे दोष मुझमें हैं, मुझे लालच है, क्रोध है, और उसने जो कुछ भी कहा वो सब है, पर वह एक बहुत ज़रूरी बात बताना भूल गया, उसने सिर्फ बाहरी चीजें देखीं पर मेरे अंदर के विवेक को नही आंक पाया, जिसके बल पर मैं इन सारी बुराइयों को अपने वष में किये रहता हूँ, बस वह यहीं चूक गया, वह मेरे बुद्धि के बल को नहीं समझ पाया !”, सुकरात ने अपनी बात पूर्ण की।
अच्छी बातें -12
जो है ,वही रहे :-
आजकल के आदमी सारा कुछ बिना कुछ किये हुए ही पाना चाहता है ,वो हमेसा यही सोचता है की कोई शॉर्टत्रिक अपनाये जिससे वो जल्दी आमिर हो जाये , जल्दी को काम हो जाये । कुछ भी काम कुछ क्यों न हो बिना किये हुए पूरा हो नही सकता है , न ही कोई दैबिक चमत्कार से पूरा नही होता है ,अपने लक्ष्य को अंजाम तक पहुचने के लिए आपको काम करने होंगे ।कुछ महान काम करने के लिए सायद आपको भगवान भेजे होंगे , उस काम को भगवान के भरोशे मत छोड़िये , हो सकता है की भगवन ही आपके भोरोशे बैथे होंगे की उस काम को आप ही अंजाम देकर पूरा कर सके । कोई दैबिक चमत्कार के भोरेषे मत रहिये , आप अपने चमत्कार खुद कीजिये और दुनिया वाले को दिखाइए की कोई चमत्कार आप अपने हाथो और मन की शक्ति से पूरा किये है । कोई भी महान काम किये है उसके खुद के मेहनत और कठिन लगन का परिश्र्म है । कोई आदमी किसी उच्य जाती ,या धर्म में जन्म लेने से महान नही बनाता है , अगर ऐसा होता तो सारा कोई महान् ही नही बन जाते , किसी जाती या धर्म में पैदा होने से महान नही बनाता बल्कि उसको अपने काम को अंजाम देकर और अच्छी शिख से बनते है । यहाँ आजकल के कुछ युवा को देखा गया है की वो अपने जाती या अपने धर्म को अपने में श्रेस्ट मानता है । कौन से जाती श्रेस्ट है ,और कौन से धर्म श्रेस्ट है , ये हमेसा विबादिक मुद्दा रहता है , जाती धर्म को से ऊपर उठकर अपने आप को श्रेस्ट बनाने की कोशिस कीजिये , अच्छे काम कीजिए , अच्छे सोच रखिये , देश के बारे में सोचिये , अपने लक्ष्य तक पहुँचिये ,यही सब विचार आपको को अच्छे बनायेअंगे । जो " लोग किसी जाती या धर्म को ख़राब कहते है आपके सामने सोचिये की वो आदमी कभी कुछ नही कर कर सकता है , क्योकि उसका कुछ लक्ष्य होता नही ,फिजूल की बात करते रहता ,उसके पास कोई काम जो नही है , तो क्या करेगा ,कुछ न कुछ तो फालतू की बात करेगा ही न , इस तरह के आदमी को लात मरकर भगा दीजिये ,तब उसकी औकात पता चलेगा , वो हमेसा दूसरे जाती के बारे में ख़राब कहैँगे या धर्म के बारे में ।"" उससे बस आप ये पूछिये की तुम अपने धर्म के बारे में क्या जानते हो और जो तुम्हारे धर्म में अच्छी अच्छी बातें शिखाया गया है क्या तुम उकसा 2% भी पालन करते हो ," तब तो उसकी बोलती ही बंद हो जायेगी ।और वह आपके सामने से भागने की कोशिस करेगा , अगर बोले हाँ करते है तो पूछिये क्या क्या पालन करते हो ,कुछ का नाम हमको भी बताओ , तब तो वह रुकेगा नही वह से वह नो दो ग्यारह हो जायेगा । फिर वह कभी कही किसी जाती या धर्म का बारे में बोलने से 1000 बार सोचेगा । इंसान है ,इंसान के तरह सोचिये । " जब कोई बच्चा रोड पे एक्ससिडेंट होता है और बुरी तरह घायल हो जाता है और दर्द के मरे चिल्लाते है तो वहाँ देखने वाले के आँख में स्वत् अंशु आ जाते है । " या फिर उस बच्चे से पूछते है की तुम किस जाती या धर्म के हो । उस समय सब अपने अपने भगवान से यही प्रार्थना करते है की बच्चे जल्दी से ठीक हो जाये , हरेक आदमी के दिल में कुछ न कुछ दया जरूर रहता है , ।
एक कहानी है :-
एक गांव में एक संत आये हुए थे । उसी गांव में एक आदमी थे जिसका कोई काम नही हो रहा था ,वह उस काम को लेकर परेशान थे , उसी बात को लेकर वह गांव में ठहरे हुए साधू के पास गए और बोले महराज मेरा यह काम बहुत दिनों से नही हो रहा है ,तब साधू बोले बेटा " विवेक रखो और दया पालो " । वह आदमी साधू की बात सुनकर घर चल गए , अचानक उसका वह काम हो गया । तब वह भागते भागते साधू के पास आये और साधू को प्रणाम किये और साधू के बारे में अच्छी अच्छी प्रंससा किये और साधू फिर बोले " विवेक रखो और दया पालो ' । वह आदमी वहाँ से घर आये और पता चला की उस काम में और जटिल हो गया है , वह आदमी गुस्से के मारे साधू के पास आये और बुरा भला कह कर चल दिए , साधू फिर " विवेक रखो और दया पालो "। उसके जाने के बाद उसके शिष्य पूछे ,गुरूजी वह आदमी एक बार आपके बारे में अच्छा बोले और दूसरी बार में आपके बारे में बुरा कह कर चल दिए । तब साधू ने बोले
"परस्थिति बदलते ही आदमी के विचार बदल जाते है , मैं न तो उसके तारीफ से खुस हूँ न ही उसके गुस्से से "
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मन को लगता है की वह मेरा है तो वह मेरा हो जता है , अगर मन को लगता है वह मेरा नही है ,तो वह परया हो जाता है ।ब्यक्ति हो या बस्तु तेरा मेरा होते ही हमारे भाव बदलने लगता है । मन ही हँसता है और मन ही रोटा है ,। मन का ही सुख और दुःख है ,मन का ही संसार है ।महान बैज्ञानिक einstine कहते है "यह संसार जो बना है ,वह हमारी सोच का परिणाम है ।और यकह तब तक नही बदलता जब तक की आप नही बदलते ।
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