कुछ कहते है की आतंकबाद का कोई महजब नही होता है । तो फिर इतने आतंकबाद आते कहा से है , जो कितने निर्दोष का जान ले लेता है । आतंकबाद वह है जो परिशिक्षण के लिए जगह देता है , बन्दुक देता है था अपने देश में पनाह देता है ।अगर अच्छे आदमी भी चोर के साथ रहता है तो वह भी चोर ही कहलाता है । जो सांप को पलता है उसे भी सांप काटने का दर रहता है , ऐसा की सांप काटे उस सांप को मार दे या उसे अपने घर से बहार कर दे । कुत्ते भी काटते है पर घर वाले को नही नही बाहर वाले को क्योकि उसे अपने और पराये का ज्ञान होता है ।
इसलिये सांप पलने वाले सतर्क हो जाये क्योंकी जब उसके पूछ पर पैर पड़ेगें वो काटने से चूकेंगे नही ।
यही सत्य है ।
शंकर भगवान ने भस्मासुर बनये थे , थे असुर पर जब वो आतंक करना सुरु किये देबता सब भी उसे छुपने और भागने लगे । यहाँ तक की भगवान शंकर भी । अंत में कितने मुश्किल के साथ उसको समाप्त किया गया भगवान बिष्णु के द्वारा ।
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सस्त्र से 2 , 3 , 4, 10 , 20 को अपने सामने झुका सकते है । पर वो तब तक ही झुकेंगे जब तक आप के शस्त्र है । और जब बुद्धि का प्रयोग कर आप झुकाते है हाँ थोड़ा समय लग सकता है ,तो वह फिर कभी आपके सामने सर नही उठायेगे ।और आपके फेन हो जायेंगे और शस्त्र से झुकाया हुआ सर आपके दुश्मन हो जायेंगे ।
"अपने लक्ष्य तक पहुचने का दो रास्ते होते है , एक आसान और एक कठिन | आसान रास्ता आपको अपने लक्ष्य के काफी समीप लगेगा , पर वास्तब में वो आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने देगा नही ।और कठिन रस्ते और थोड़ा दूर लगेंगे पर वह आपको अपने लक्ष्य तक पंहुचा देगा ।"
आप पता होगा
company की प्रोडक्ट खरीदते है तो आपको एक बार रुलाता है मतलब जयदा रुपया लगता हैं
पर जब कोई ओडनारी प्रॉडक्ट ख़रीदते है तो आप को बार बार रुलाता है मतलब 2 महीने चलाइये ये ख़राब वो ख़राब आखिर में useless हो जाता हैं ।
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कोई अच्छे स्कूल में पढ़ने से कोई महान नही बना जाता । अगर कोई ख़राब स्कूल में पढ़कर अगर कोई महान काम करता है तो वो वह स्कूल नाम भी बढ़ जाता है।
कोई उच्चय जाती या निम्न जाती में हो अगर वह बुरे काम करते तो वह हमेसा के लिए उसके इज्जत ख़राब हो जाते । अगर निम्न जाती के हो अगर अच्छे काम क़र जाते है हमेसा के लिए नाम हो जाता है ।
अगर वह किसी धर्म के ब्यक्ति हो और धर्म के नाम पर किसी को कष्ट और बुरे काम करते है , बल्कि धर्म या महजब बल्कि आदमी बुरे है , कोई भी धर्म की निब रखने वाले कोई वह तो महान् ही आदमी होएंगे ने जिसने इतने बड़े आदमी को आपने महजब में जोरा । जैसे बौद्ध , जैन , सिख , ईसाई और न जाने कितने सबके आदर करने चाहिए ।
कोई अच्छे राजनितिक पार्टी नही होते , बल्कि उस पार्टी को बनाने वाले और उस पार्टी की कयर्कता पर निर्भर करता है । एक समय में कोई पार्टी अच्छे होते है , कभी वही पार्टी बेकार हो जाते है , समय के साथ सारा कुछ परवर्तन शील है , कोई राजनितिक तब तक अच्छे रहेंगे जब तक वह अच्छे आदमी कार्यकर्ता रहेंगे ।
जाती धर्म महजब से उपर उठकर सोचिये की देश की विकाश में योगदान दीजिये । अपना मूल्य चुनिए और देश को आगे बढाइये ।
इसलिये सांप पलने वाले सतर्क हो जाये क्योंकी जब उसके पूछ पर पैर पड़ेगें वो काटने से चूकेंगे नही ।
यही सत्य है ।
शंकर भगवान ने भस्मासुर बनये थे , थे असुर पर जब वो आतंक करना सुरु किये देबता सब भी उसे छुपने और भागने लगे । यहाँ तक की भगवान शंकर भी । अंत में कितने मुश्किल के साथ उसको समाप्त किया गया भगवान बिष्णु के द्वारा ।
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सस्त्र से 2 , 3 , 4, 10 , 20 को अपने सामने झुका सकते है । पर वो तब तक ही झुकेंगे जब तक आप के शस्त्र है । और जब बुद्धि का प्रयोग कर आप झुकाते है हाँ थोड़ा समय लग सकता है ,तो वह फिर कभी आपके सामने सर नही उठायेगे ।और आपके फेन हो जायेंगे और शस्त्र से झुकाया हुआ सर आपके दुश्मन हो जायेंगे ।
"अपने लक्ष्य तक पहुचने का दो रास्ते होते है , एक आसान और एक कठिन | आसान रास्ता आपको अपने लक्ष्य के काफी समीप लगेगा , पर वास्तब में वो आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने देगा नही ।और कठिन रस्ते और थोड़ा दूर लगेंगे पर वह आपको अपने लक्ष्य तक पंहुचा देगा ।"
आप पता होगा
company की प्रोडक्ट खरीदते है तो आपको एक बार रुलाता है मतलब जयदा रुपया लगता हैं
पर जब कोई ओडनारी प्रॉडक्ट ख़रीदते है तो आप को बार बार रुलाता है मतलब 2 महीने चलाइये ये ख़राब वो ख़राब आखिर में useless हो जाता हैं ।
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कोई अच्छे स्कूल में पढ़ने से कोई महान नही बना जाता । अगर कोई ख़राब स्कूल में पढ़कर अगर कोई महान काम करता है तो वो वह स्कूल नाम भी बढ़ जाता है।
कोई उच्चय जाती या निम्न जाती में हो अगर वह बुरे काम करते तो वह हमेसा के लिए उसके इज्जत ख़राब हो जाते । अगर निम्न जाती के हो अगर अच्छे काम क़र जाते है हमेसा के लिए नाम हो जाता है ।
अगर वह किसी धर्म के ब्यक्ति हो और धर्म के नाम पर किसी को कष्ट और बुरे काम करते है , बल्कि धर्म या महजब बल्कि आदमी बुरे है , कोई भी धर्म की निब रखने वाले कोई वह तो महान् ही आदमी होएंगे ने जिसने इतने बड़े आदमी को आपने महजब में जोरा । जैसे बौद्ध , जैन , सिख , ईसाई और न जाने कितने सबके आदर करने चाहिए ।
कोई अच्छे राजनितिक पार्टी नही होते , बल्कि उस पार्टी को बनाने वाले और उस पार्टी की कयर्कता पर निर्भर करता है । एक समय में कोई पार्टी अच्छे होते है , कभी वही पार्टी बेकार हो जाते है , समय के साथ सारा कुछ परवर्तन शील है , कोई राजनितिक तब तक अच्छे रहेंगे जब तक वह अच्छे आदमी कार्यकर्ता रहेंगे ।
जाती धर्म महजब से उपर उठकर सोचिये की देश की विकाश में योगदान दीजिये । अपना मूल्य चुनिए और देश को आगे बढाइये ।
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