जो है ,वही रहे :-
आजकल के आदमी सारा कुछ बिना कुछ किये हुए ही पाना चाहता है ,वो हमेसा यही सोचता है की कोई शॉर्टत्रिक अपनाये जिससे वो जल्दी आमिर हो जाये , जल्दी को काम हो जाये । कुछ भी काम कुछ क्यों न हो बिना किये हुए पूरा हो नही सकता है , न ही कोई दैबिक चमत्कार से पूरा नही होता है ,अपने लक्ष्य को अंजाम तक पहुचने के लिए आपको काम करने होंगे ।कुछ महान काम करने के लिए सायद आपको भगवान भेजे होंगे , उस काम को भगवान के भरोशे मत छोड़िये , हो सकता है की भगवन ही आपके भोरोशे बैथे होंगे की उस काम को आप ही अंजाम देकर पूरा कर सके । कोई दैबिक चमत्कार के भोरेषे मत रहिये , आप अपने चमत्कार खुद कीजिये और दुनिया वाले को दिखाइए की कोई चमत्कार आप अपने हाथो और मन की शक्ति से पूरा किये है । कोई भी महान काम किये है उसके खुद के मेहनत और कठिन लगन का परिश्र्म है । कोई आदमी किसी उच्य जाती ,या धर्म में जन्म लेने से महान नही बनाता है , अगर ऐसा होता तो सारा कोई महान् ही नही बन जाते , किसी जाती या धर्म में पैदा होने से महान नही बनाता बल्कि उसको अपने काम को अंजाम देकर और अच्छी शिख से बनते है । यहाँ आजकल के कुछ युवा को देखा गया है की वो अपने जाती या अपने धर्म को अपने में श्रेस्ट मानता है । कौन से जाती श्रेस्ट है ,और कौन से धर्म श्रेस्ट है , ये हमेसा विबादिक मुद्दा रहता है , जाती धर्म को से ऊपर उठकर अपने आप को श्रेस्ट बनाने की कोशिस कीजिये , अच्छे काम कीजिए , अच्छे सोच रखिये , देश के बारे में सोचिये , अपने लक्ष्य तक पहुँचिये ,यही सब विचार आपको को अच्छे बनायेअंगे । जो " लोग किसी जाती या धर्म को ख़राब कहते है आपके सामने सोचिये की वो आदमी कभी कुछ नही कर कर सकता है , क्योकि उसका कुछ लक्ष्य होता नही ,फिजूल की बात करते रहता ,उसके पास कोई काम जो नही है , तो क्या करेगा ,कुछ न कुछ तो फालतू की बात करेगा ही न , इस तरह के आदमी को लात मरकर भगा दीजिये ,तब उसकी औकात पता चलेगा , वो हमेसा दूसरे जाती के बारे में ख़राब कहैँगे या धर्म के बारे में ।"" उससे बस आप ये पूछिये की तुम अपने धर्म के बारे में क्या जानते हो और जो तुम्हारे धर्म में अच्छी अच्छी बातें शिखाया गया है क्या तुम उकसा 2% भी पालन करते हो ," तब तो उसकी बोलती ही बंद हो जायेगी ।और वह आपके सामने से भागने की कोशिस करेगा , अगर बोले हाँ करते है तो पूछिये क्या क्या पालन करते हो ,कुछ का नाम हमको भी बताओ , तब तो वह रुकेगा नही वह से वह नो दो ग्यारह हो जायेगा । फिर वह कभी कही किसी जाती या धर्म का बारे में बोलने से 1000 बार सोचेगा । इंसान है ,इंसान के तरह सोचिये । " जब कोई बच्चा रोड पे एक्ससिडेंट होता है और बुरी तरह घायल हो जाता है और दर्द के मरे चिल्लाते है तो वहाँ देखने वाले के आँख में स्वत् अंशु आ जाते है । " या फिर उस बच्चे से पूछते है की तुम किस जाती या धर्म के हो । उस समय सब अपने अपने भगवान से यही प्रार्थना करते है की बच्चे जल्दी से ठीक हो जाये , हरेक आदमी के दिल में कुछ न कुछ दया जरूर रहता है , ।
एक कहानी है :-
एक गांव में एक संत आये हुए थे । उसी गांव में एक आदमी थे जिसका कोई काम नही हो रहा था ,वह उस काम को लेकर परेशान थे , उसी बात को लेकर वह गांव में ठहरे हुए साधू के पास गए और बोले महराज मेरा यह काम बहुत दिनों से नही हो रहा है ,तब साधू बोले बेटा " विवेक रखो और दया पालो " । वह आदमी साधू की बात सुनकर घर चल गए , अचानक उसका वह काम हो गया । तब वह भागते भागते साधू के पास आये और साधू को प्रणाम किये और साधू के बारे में अच्छी अच्छी प्रंससा किये और साधू फिर बोले " विवेक रखो और दया पालो ' । वह आदमी वहाँ से घर आये और पता चला की उस काम में और जटिल हो गया है , वह आदमी गुस्से के मारे साधू के पास आये और बुरा भला कह कर चल दिए , साधू फिर " विवेक रखो और दया पालो "। उसके जाने के बाद उसके शिष्य पूछे ,गुरूजी वह आदमी एक बार आपके बारे में अच्छा बोले और दूसरी बार में आपके बारे में बुरा कह कर चल दिए । तब साधू ने बोले
"परस्थिति बदलते ही आदमी के विचार बदल जाते है , मैं न तो उसके तारीफ से खुस हूँ न ही उसके गुस्से से "
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मन को लगता है की वह मेरा है तो वह मेरा हो जता है , अगर मन को लगता है वह मेरा नही है ,तो वह परया हो जाता है ।ब्यक्ति हो या बस्तु तेरा मेरा होते ही हमारे भाव बदलने लगता है । मन ही हँसता है और मन ही रोटा है ,। मन का ही सुख और दुःख है ,मन का ही संसार है ।महान बैज्ञानिक einstine कहते है "यह संसार जो बना है ,वह हमारी सोच का परिणाम है ।और यकह तब तक नही बदलता जब तक की आप नही बदलते ।
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