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अगर आदमी के मन में लोभ ,मोह ,इर्ष्या ,घिर्ना ,वाशना है ,तो
तो वह घर बदल ले , मंदिर बदल ले ,मस्जिद बदल ले या फिर
धर्म बदल ले या फिर कितने ही धाम की यात्रा कर ले उन्हें
इन सब चीजो से छुटकारा नही मिल सकता है , वह इन सब
की भोग की लाससा की अग्नि में हमेशा जलता रहेगा |
वह जब तक आपने मन को वस में नही करता , और
नकारात्मक उठे हुए सोच को सकारात्मक सोच में बदलने
की कोसिस नही करते , तब तक वह इन चीजो से छुटकारा
नही पा सकता |जगह धर्म ,घर बदलने से कुछ नही होता
जब तक वह अपने आपको बदलने की कोसिस नही करता ,
आप को भगवन ने विसेस बनाया है , सही और गलत कम
को पहचाने का विसेस शक्ति दिए है |
""""""कुत्ते जब बैठते है तो पूछ से जमीन को साफ कर लेते है , और
कोई चीज खाने से पहले उसे सूंघ कर पता कर लेता है ,की
वह खाने लायक है या नही """ """""
आप लोग तो इन्शान है , इसलिए अपने " मन को साफ "कीजिये
मन के साफ होने से आपको वास्तिबिक शांति मिलेगी ,
आप के साथ साथ दुसरे का भी भला होगा |
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कुछ् के परवर्ती येसे होते है , मानो कुत्ते की पूछ को सीधे करने की कोशिस कर रहे है , लाख समझाओ, चाहे scintific way हो , physiological way se ho ya fir indian moral philosophy way se samjhao से हो , जितने भी तरीके से समझाने की कोशिस करो ब्यर्थ जायेगा । उस तरह के आदमी को कभी भूल से समझाने की कोशिस नही करना चाहिए । वे कुत्ते की पूछ की तरह होते है , क्योकि वह आदमी सोचता है की सारा कुछ हम ही जानते है ,और सब बेकार है । इस तरह के आदमी को बस उसी तरह के आदमी ही समझ सकता है जो थोड़ा उससे और टेढ़े है । बाँकी कोई नही समझा सकता । कुत्ते जब वह अकेले अपने गली में होता है तो वह अपने आप को शेर समझता है उस समय उसके पूछ हमेसा मुरा हुआ होता है ।पर जैसे ही वह अपने गली से बहार आता है तो अपने से मजबूत कुत्ते को देखकर उसके पूछ सीधे हो जाते है ।" लोहा ही लोहा को कटता है " इसलिए आप मत अफ़सोस कीजिये की आप उसको नही समझा पाये ।""भगवान् राम ने रावण को बहुत समझाने की कोशिस किये पर नही समझा पाएं । अंत में रावण के साथ क्या हुआ आपको पता ही है ,पूरा परिवार समेत विनास हुआ । किसी को समझाने में जल्दी वाजी मत कीजिये ।
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