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Saturday, 4 July 2015

क्वांटम कंप्यूटर



क्वांटम कंप्यूटर का विकास वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बहुत बड़ा लक्ष्य है, क्योंकि इससे कंप्यूटिंग की दुनिया में बड़ी क्रांति आ जाएगी। शायद इसी वजह से एनएसए ने इसे अपने 'कोड-भेदी मिशन" का हिस्सा बनाया है।
कंप्यूटर में रखी जाने वाली महत्वपूर्ण व संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा के लिए एक कवच होता है, जिसे हम तकनीकी भाषा में 'एनक्रिप्शन" कहते हैं।
अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) एक ऐसा क्वांटम कंप्यूटर बनाना चाहती है, जो दुनियाभर के कंप्यूटरों में रखे बैंकिंग, मेडिकल, व्यापारिक और सरकारी रिकार्डों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हर तरह के एनक्रिप्शन को भेद सके।
कुछ समय पूर्व वॉशिंगटन पोस्ट ने एडवर्ड स्नोडेन द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज के आधार पर यह चौंकाने वाली जानकारी दी थी। ध्यान रहे कि ' व्हिसलब्लोअर" स्नोडेन ने इंटरनेट संदेशों और फोन संवादों की खुफियागिरी जैसी एनएसए की गोपनीय कारर्वाइयों के बारे में पहले भी सनसनीखेज दस्तावेज लीक किए थे।
स्नोडेन के दस्तावेज के अनुसार इस कंप्यूटर पर 8 करोड़ डॉलर के बजट से चलाए जा रहे एक विशेष अनुसंधान कार्यक्रम के तहत काम हो रहा है। इस कार्यक्रम का नाम है 'पेनिट्रेटिंग हार्ड टार्गेट्स" (कठिन लक्ष्यों को भेदना)।
क्वांटम कंप्यूटर का विकास वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बहुत बड़ा लक्ष्य है, क्योंकि इससे कंप्यूटिंग की दुनिया में बड़ी क्रांति आ जाएगी। यह कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर की तुलना में कई गुना तेज गति से काम करेगा। शायद इसी वजह से एनएसए ने इसे अपने 'कोड-भेदी मिशन" का हिस्सा बनाया है।
इस टेक्नोलॉजी से सभी तरह के एनक्रिप्शन को तोड़ा जा सकता है अथवा कूटबद्ध संकेतों को पढ़ा जा सकता है। इनमें ऐसे एनक्रिप्शन भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल वेबसाइटों, वित्तीय लेन-देन और सरकारी गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
सूचनाओं की हिफाजत के लिए जिन एनक्रिप्शन टूल्स का इस्तेमाल होता है, उनमें 'आरएसए" भी शामिल है, जो सबसे मजबूत कवच माना जाता है। लेकिन क्वांटम कंप्यूटर इसे भी भेद सकता है।
स्नोडेन द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज से पता चलता है कि अमेरिकी एजेंसी अपना सारा काम मेरीलैंड में कॉलेज पार्क स्थित प्रयोगशाला में खास धातु के बक्सों में कर रही है, जिन्हें 'फैराडे केजेस" भी कहा जाता है। ये बक्से इस तरह से बनाए गए हैं कि विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा बाहर न जा सके। क्वांटम कंप्यूटिंग के नाजुक प्रयोग जारी रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
दुनिया के वैज्ञानिक क्वांटम कंप्यूटर पर कई वर्षों से काम कर रहे हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी में यूरोपीय संघ व स्विट्जरलैंड ने पिछले दशक के दौरान काफी प्रगति की है और वे इस दौड़ में अमेरिका के करीब पहुंच गए हैं। भौतिकशास्त्री रिचर्ड फेनमन ने 1981 में वैज्ञानिकों को क्वांटम फिजिक्स पर आधारित कंप्यूटर बनाने की चुनौती दी थी। लेकिन अभी तक सारा काम सैद्धांतिक तौर पर ही हुआ है।
अभी यह कहना मुश्किल है कि सुपर कंप्यूटर से भी तेज कंप्यूटर बनाने का सपना कब पूरा होगा। कुछ विशेषज्ञों की राय में क्वांटम कंप्यूटर का लक्ष्य अगले दस साल में हासिल हो सकता है। कुछ कंपनियों का दावा है कि वे छोटे क्वांटम कंप्यूटर पहले से बना रही हैं। डी-वेव सिस्टम्स नामक एक कनाडाई कंपनी का कहना है कि वह 2009 से क्वांटम कंप्यूटर बना रही है। उसने 2012 में गूगल, नासा व यूनिवर्सिटीज स्पेस रिसर्च एसोसिएशन को ऐसे कंप्यूटर बेचे थे।
क्वांटम टेक्नोलॉजी पर आधारित कंप्यूटर उन समस्याओं को सेकंडों या मिनटों में हल कर देंगे, जिनके लिए मौजूदा सुपर कंप्यूटरों को अरबों वर्ष खर्चने पड़ेंगे। क्वांटम कंप्यूटर एक साथ लाखों गणनाएं कर सकेगा। यह मनुष्य द्वारा अब तक बनाया गया सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर होगा। वर्तमान कंप्यूटरों में सूचनाएं बिट्स में होती हैं। जिस तरह लाइट को 'ऑन" और 'ऑफ" किया जाता है, सूचना का बिट एक या शून्य के रूप में ही हो सकता है।
लेकिन क्वांटम कंप्यूटर में सूचना की बुनियादी इकाई, क्यूबिट अथवा क्वांटम बिट में एक और शून्य दोनों एक साथ हो सकते हैं। इस बुनियादी अंतर की वजह से ही क्वांटम कंप्यूटर एक साथ लाखों गणनाएं कर सकता है। मौजूदा सुपर कंप्यूटर तेजी से गणनाएं तो कर सकते हैं, लेकिन एक बार में वे सीमित गणनाएं ही कर सकते हैं।
क्यूबिट को संभालना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि उनका जीवनकाल अल्पकालिक होता है। क्वांटम कंप्यूटर अणुओं और परमाणुओं की ताकत का इस्तेमाल मेमोरी और प्रोसेसिंग के कार्यों के लिए करेंगे। नई मशीनें उन गणितीय समस्याओं को हल कर सकेंगी, जिन्हें सुलझाना अभी मनुष्य के बूते में नहीं है।
भविष्य में संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखने या उन्हें पढ़ने में क्वांटम कंप्यूटिंग बहुत मददगार होगी। वैज्ञानिक समुदाय के लिए क्वांटम कंप्यूटरों के विविध उपयोग संभव हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का
निर्माण शामिल है।
दूसरी तरफ एनएसए को डर है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। इससे दूसरे देशों की गोपनीय सूचनाओं में सेंध लगाने की उसकी क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी सचमुच अपने मिशन में कामयाब हो पाएगी?अमेरिकी एजेंसी के क्वांटम कंप्यूटर कार्यक्रम पर फिलहाल अटकलें ही लगाई जा सकती हैं।
हालांकि अनेक भौतिकशास्त्रियों व कंप्यूटर विज्ञानियों का मानना है कि अमेरिकी एजेंसी दुनिया की दूसरी प्रयोगशालाओं में चल रही क्वांटम रिसर्च से आगे नहीं है।

Reference :http://naidunia.jagran.com/editorial/sampadikya-information-for-dent-in-quantum-computers-32961

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