fb likes

Sunday, 12 July 2015

किसकी कल्पना थी एटम बम ? ,news

क्या आपको पता था कि परमाणु बम की परिकल्पना सबसे पहले अंग्रेज़ी भाषा के साहित्यकार एचजी वेल्स ने की थी?
यही सच है. साल 1914 में एचजी वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ प्रकाशित हुई. इसमें उन्होंने यूरेनियम से बनने वाले एक ऐसे बम की परिकल्पना की थी जो अनंत काल तक फटता ही रहेगा. कल्पना की गई थी कि इस बम की ताक़त भी असीमित होगी.

हवाई जहाज़ से बमबारी की कल्पना

इतना ही नहीं. वेल्स ने तो यहां तक सोच लिया था कि इसे हवाई जहाज़ से ज़मीन पर गिराया जाएगा.
null
पर वेल्स ने शायद यह नहीं सोचा था कि उनके एक दोस्त विंस्टन चर्चिल और भौतिक शास्त्र के एक वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड उनकी परिकल्पना को सच्चाई में बदल देंगे.
उस समय यह माना जाता था कि ठोस पदार्थ बहुत ही छोटे छोटे कणों से बना होता है. साइंस म्यूज़ियम के क्यूरेटर एंड्र्यू नैहम का कहना है, “जब यह साफ़ हो गया कि रदरफ़ोर्ड के परमाणु में सघन न्यूक्लीयस है, तो यह समझा गया कि वह एक स्प्रिंग की तरह है.”
एचजी वेल्स नई नई खोजों से काफ़ी प्रभावित थे. यह भी देखा गया कि वे आने वाले आविष्कारों के बारे में पहले से ही अनुमान लगा लेते थे, जो कई बार सही साबित होते थे.

वेल्स-चर्चिल मुलाक़ात

null
ब्रिटिश राजनेता चर्चिल ने एचजी वेल्स के नोट्स पढ़े और बहुत ही प्रभावित हुए. वे ख़ुद भी साहित्यकार थे. उन्होंने वेल्स से मुलाक़ात भी की थी.
नारंगी के आकार के परमाणु बम के बारे में सबसे पहले सोचने का श्रेय ग्राहम फार्मलो को है. लेकिन यह एचजी वेल्स की किताब से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था.
ब्रितानी वैज्ञानिकों ने 1932 में परमाणु को विखंडित करने में कामयाबी हासिल कर ली, हालांकि उस समय भी ज़्यादातर लोग यह मानते थे कि इससे बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा नहीं निकल सकती है.
उसी साल हंगरी के वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड ने वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ पढ़ी थी. उन्होंने इस पर यक़ीन किया कि परमाणु के विखंडन से बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकल सकती है. उन्होंने इस पर एक लेख भी लिखा, जो वेल्स के विचारों के बहुत ही नज़दीक था.

चेन रिएक्शन

null
स्ज़िलर्ड ने ही सितंबर 1933 में ‘चेन रिएक्शन’ की बात कही थी. उन्होंने लंदन के रसेल स्क्वैयर पर ट्रैफ़िक सिग्नल को देखा तो उनके दिमाग में यह बात आई. उन्होंने लिखा, “मेरे मन में यकायक यह ख्याल आया कि यदि परमाणु को न्यूट्रॉन से तोड़ जाए, जिससे दो न्यूट्रॉन निकले और उसमें से एक न्यूट्रॉन निकल कर फिर ऐसा ही करने लगे, तो मुझे लगता है कि न्यूक्लियर ‘चेन रिएक्शन’ शुरू हो जाएगा.”
reference :-http://www.bbc.com/hindi/science/2015/07/150705_hg_wells_first_to_imagine_atom_bomb_pm

No comments:

Post a Comment