भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है जिसका मुख्यालय कर्नाटक प्रान्त की राजधानी बंगलोर में है। संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं। संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है। अन्तरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में उपग्रहों, प्रमोचक यानों, परिज्ञापी राकेटों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है।
इसरो के वर्तमान निदेशक ए एस किरण कुमार हैं। आज भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों को अपनी अंतरिक्ष क्षमता से व्यापारिक और अन्य स्तरों पर सहयोग कर रहा है। इसरो वर्तमान में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पी.एस.एल.वी.) एवंभूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जी.एस.एल.वी.) की सहायता से क्रमश: कृत्रिम एवं भू-स्थायी कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित करता है।
इसरो को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए साल 2014 के इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान:-
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान या पी.एस.एल.वी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा संचालित एक उपभोजित प्रक्षेपण प्रणाली है। भारत ने इसे अपने सुदूर संवेदी उपग्रह को सूर्य समकालिक कक्षा में प्रक्षेपित करने के लिये विकसित किया है। पीएसएलवी के विकास से पूर्व यह सुविधा केवल रूस के पास थी। पीएसएलवी छोटे आकार के उपग्रहों को भू-स्थिर कक्षा में भी भेजने में सक्षम है। अब तक पीएसएलवी की सहायता से ६४ अन्तरिक्षयान (२९ भारतीय + ३५ अन्तरराष्ट्रीय) विभिन्न कक्षाओं में प्रक्षेपित किये जा चुके हैं।[1] इससे इस की विश्वसनीयता एवं विविध कार्य करने की क्षमता सिद्ध हो चुकी है।
- आकार
- ऊंचाई : 44 m
- व्यास : 2.8 m
- द्रव्यमान : 294,000 kg
- चरणों की संख्या : 4
- भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान :-
क्रायोजेनिक्स:-
भौतिकी में अत्यधिक निम्न ताप उत्पन्न करने व उसके अनुप्रयोगों के अध्ययन को क्रायोजेनिक्स कहते है। क्रायोजेनिक का उद्गम यूनानी शब्द क्रायोस से बना है जिसका अर्थ होता है शीत यानी बर्फ की तरह शीतल। इस शाखा में शून्य डिग्री सेल्सियस से २५३ डिग्री नीचे के तापमान पर कां किया जाटा है। इस निम्न तापमान का उपयोग करने वाली प्रक्रियाओं और उपायों का क्रायोजेनिक अभियांत्रिकी के अंतर्गत अध्ययन करते हैं। जी.एस.एल.वी. रॉकेट में प्रयुक्त होने वाली द्रव्य ईंधन चालित इंजन में ईंधन बहुत कम तापमान पर भरा जाता है, इसलिए ऐसे इंजन क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन कहलाते हैं। इस तरह के रॉकेट इंजन में अत्यधिक ठंडी और द्रवीकृत गैसों को ईंधन और ऑक्सीकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस इंजन में हाइड्रोजन और ईंधन क्रमश: ईंधन और ऑक्सीकारक का कार्य करते हैं। ठोस ईंधन की अपेक्षा यह कई गुना शक्तिशाली सिद्ध होते हैं और रॉकेट को बूस्ट देते हैं। विशेषकर लंबी दूरी और भारी रॉकेटों के लिए यह तकनीक आवश्यक होती है।[2]
क्रायोजेनिक तकनीक का पहली बार प्रयोग लगभग पांच दशक पूर्व अमेरिका के एटलस सटूर नामक रॉकेट में सबसे पहले हुआ था। तब से अब तक क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन प्रौद्योगिकी में काफी सुधार हुआ है। अमेरिकी क्रायोजेनिक इंजनों में आर.एल.-१० नामक क्रायोजेनिक इंजन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। जी.एस.एल.वी. रॉकेट एरियन में एसएम-७ क्रायोजेनिक इंजन लगाया जाता है। जापान द्वारा विकसित क्रायोजेनिक इंजन का नाम एल.ई-५ है। पहले भारत को रूस से यह तकनीक मिल रही थी। १९९८ में हुए पोखरण परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर पाबंदी लगा दी और रूस का रास्ता बंद हो गया। किन्तु भारत में इससे पहले से ही इस तकनीक पर काम हो रहा था।
Organisation structure and facilities:-
ISRO is managed by the Department of Space (DoS) of the Government of India. DoS itself falls under the authority of the Prime Minister and the Space Commission, and manages the following agencies and institutes:[
- Indian Space Research Organisation
- Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), Thiruvananthapuram.
- Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC), Thiruvananthapuram.
- Satish Dhawan Space Centre (SDSC-SHAR), Sriharikota.
- ISRO Satellite Centre (ISAC), Bengaluru.
- Space Applications Centre (SAC), Ahmedabad.
- National Remote Sensing Centre (NRSC), Hyderabad.
- ISRO Inertial Systems Unit (IISU), Thiruvananthapuram.
- Development and Educational Communication Unit (DECU), Ahmedabad.
- Master Control Facility (MCF), Hassan.
- ISRO Telemetry, Tracking and Command Network (ISTRAC), Bengaluru.
- Laboratory for Electro-Optics Systems (LEOS), Bengaluru.
- Indian Institute of Remote Sensing (IIRS), Dehradun.
- Antrix Corporation - The marketing arm of ISRO.
- Physical Research Laboratory (PRL), Ahmedabad.
- National Atmospheric Research Laboratory (NARL), Gadanki.
- North-Eastern Space Applications Centre[20] (NE-SAC), Umiam.
- Semi-Conductor Laboratory (SCL), Mohali.
- Indian Institute of Space Science and Technology (IIST), Thiruvananthapuram - India's space universit
Launch vehicle fleet:-
Satellite Launch Vehicle (SLV)
Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV)
Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV)
Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark-III (GSLV III)
Satellite programs:-
he INSAT series
Main article: Indian National Satellite System
The IRS series
Main article: Indian Remote Sensing satellite
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