किताबें ,मित्रो में सबसे शांत और स्थाई मित्र होती है ,
सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान सलाहाकार होती है ,
और शिक्षकों में सबसे धर्यवान शिक्षक होते है ।
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दो तरह के शिक्षक होते है एक जो भयभीत कर देते है की आप हिल नही सकते ,
एक वह शिक्षक है जो आपके पीठ पीछे से ठप थपा दे और आप आसमान छु लेते है ।
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एक औसत दर्जे के शिक्षक बताता है ,
एक अच्छा शिक्षक समझाता है
और एक बेहतर शिक्षक कर के दिखता है ,
और एक महान शिक्षक प्रेरित करता है ।
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एक अच्छे अद्यापक सबसे अच्छे अद्यापक अपने सबसे अच्छे क्षात्र होकर बनता है ।।
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सहिष्णुता के अभ्यास में किसी का दुश्मन ही सबसे अच्छा शिक्षक होता है ।
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युद्ध में दो लोगोँ के साथ युद्ध चल रहा है ,तो वो दोनों मेरे गुरु के सामान कार्य करैंगे ,
एक की मैं अछी बात पकुरुगा और उसका अनुशरण करूँगा ,
और दूसरे का बुरी बात पकुरुगा और उसे अपने अंदर सही करुँगा ।
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अगर किसी देश को भर्ष्टाचार मुक्त और सुन्दर मन वाले लोगो का देश बनाना है तो ,
मेरा दृढ़ता पूर्वक मनना है की देश के तिन लोग ये काम क्र सकते है ,माता ,पिता और गुरु । A.P.J .KALAM
सफलता एक घठिया शिक्षक है ,लोगो में ये सोच बिकसित क्र देते है की वो अशफल नही हो सकते । .......बिल गेट्स
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रचनात्मक और अभिब्यक्ति और ज्ञान में प्रशन्नता जागना शिक्षक की सरवोच्य कला है ...einstine
more quotation on teacher -http://www.scitechideas.in/2016/07/8.html
अब्दुल कलम :-
उन्हाने भारत को परमाणु शक्ति बनाया |राष्पति बन गये थे ,लेकिन
चाहते थे की उनकी पहचान एक शिक्षक के रूप में हो |
बच्चो के सबलो को उत्साह के साथ जबाब देते थे |
> उन्हाने सिखाया पहली सफलता के बाद रुको मत ,बाद में
बिफल हुए तू पहली सफलता को एक संग्योग मानेंगे |
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होमी जहागीर भाभा :-
उन्हाने देश को पहला रिसर्च इंस्टिट्यूट दिया | परमाणु शक्ति
बनाने की निब राखी ,३१ वर्ष की उर्म में रॉयल सोसायटी के सदस्य बने |
पांच बार नोबेल के लिए नामांकित हुए |
> उसने सिखाया सिर्फ आज की नहीं ,आगे की सोचो |
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सीबी रमण :-
1907 में सहायक अकाउंटेंट जनरल की नौकरी पा ली थी ,|
लेकिन विज्ञानं के प्रति लगाव होने होने के कारन नौकरी छोर दी |और
1930 में नोबेल प्राइज पहले अश्वेत भारतीय बने |
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श्री निवास रामानुजन :-
32 शाल के ही उर्म में ही बनाया चार हजार थ्योरम
उसने 32 शाल की उर्म में ही करीब चार थ्योरम दिए |उन्हाने
infinite सीरीज दी जिसका प्रयोग पई की गणना में होता है |
>दुसरे सब्जेक्ट में फ़ैल होते थे लेकिन गणित उनका जनून था |
उनमे उनको सफलता मिली , जो भी करे जनून के साथ करे |
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सत्येन्द्रनाथ बोश :-
1920 में आइन्स्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत का जर्मन से अंग्रेजी भासा में
अनुवाद करने वाले पहले बैज्ञानिक |
> उन्हाने सिखाया आधुनिकता को अपनाओ , जहाँ देश में सब पारंपरिक भौताकी
को समझ रहे है | इन्हाने भौताकी के आधुनिक परिबर्तन को समझा |
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पर्फुल्ला चन्द्र रे :-
देश को पहली फार्म कंपनी दिए |27 शाल की उर्म में यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबरा से डॉक्टरेट ऑफ़ साइंस की
डिग्री ली |
>उन्हाने सिखाया लिक से हटकर काम करो |
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प्रोफेसर एच् एन महा बाला :-
उन्हाने कई आईटी आइकॉन दिए ,देश में कंप्यूटर शिक्षा लोगो तक पहुचाई |
उसने सिखाया हमेशा नए स्तरों को अपनाओ ,खासकर युवाओ को पुराने रास्ते हमेशा के लिए छोर देने चाहिए |
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सर सय्यद अहमन खान :-
अंग्रेजी पर जोर ताकि पिछर न जाये भारतीय
amu की स्थापना की ,पढने पे जोर दिया |
उन्हाने सिखाया पुराणी और बेकार परम्परा को छोरो ,यह मनाब विकाश में बाधा पहुचती है |
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ज्योतिबा फुले :-
हत्या का प्रयास ,पर दलित को पढ़ना नही छोरा
महिला और दलितों की पढाई के लिए काम
>विना शिक्षा बुद्धि नष्ट हो जाती है ,बिना बुद्धि नैतिकता नष्ट हो जाती है ,बिना नैतिकता
विकाश नही होता , देखिये शिक्षा के विना कितना कुछ नष्ट हो जाता है |
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इश्वर चन्द्र विद्या सागर :-
इनके बनी से ही सुधर जाते थे बिगड़े क्षात्र
विधवा पुनर्विवाह काननु पारित किया ,बल विहाह के बिरोधी रहे ,स्त्री शिक्षा के लिए काम किये
> कुछ सिखाने के लिए दंड नही ,स्नेह सबसे प्रभावशाली तरीका है | कठोरता अपनाने
से बच्चे सुधरते नही बल्कि बिगारते ही है |
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महामना मदन मोहन मालवीय :-
काशी विश्वविद्या लय की स्थापना की
1918 में कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन में महामना ने पहली बार देश को
सत्यमेब जयते का नारा दिया |वे कहते थे सत्य छिपाया जा सकता है पर हराया नही जा सकता है |
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सर्वपल्ली राधाकृष्णन :-
40 शाल शिक्षक रहे |कक्षात्रो में लोक प्रिय रहे
मदन मोहन मालवीय 1939 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हटे ,तब उन्हाने तब
राधा कृष्णन को पद पर नियुक्त किये |
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डॉ. जाकिर हुसैन :-
सिर्फ 23 वर्ष की उर्म में ही जामिया मिलिया ईस्लामिक विश्वविद्यालय की स्थापना
दल के सदस्य बने , वे देश के कई विश्व विद्यालय में कुलपती रहे |
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रबिन्द्रनाथ टैगोर :-
शान्तिनिकेतन की स्थापना की | यहाँ पढने के लिए एंट्रेंस टेस्ट नही होता ,बल्कि गुरुदेव अभ्यर्थियों को तौल लेते है ,
इसी के अधर पर दाखिल होता है |
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प्रेमचंद :-
जब तक शिक्षक रहे ,तिन तरह से शिक्षा दी ,
पहली -क्षात्रो का मन जान लेते थे , दूसरी -हर शिक्षा में गाव होता था ,तीसरा -
जो भी पढ़ते उस विषय को कहानी में बदल दते थे |
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विधान चन्द्र राय:-
विधान चन्द्र राय कोलकाता मेडिकल कॉलेज में बतौर ब्य्ख्यता क्षात्र को
पढाया , इंके जन्म दिन एक जुलाई को देश में चिकित्सा दिबस के रूप में मनाया जाता है |