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मन मस्तिक शांत रहना ,संतुलित रहना बहुत जरूरी होता है | उसके असंतुलित होने से ना ही कोई कम ठीक से कर सकते है ना ही जीबन में उन्नति कर पाते है अगर आप गुस्से में है ,या आप असांत है ,तो आप अपनी समस्या का समाधान नही खोज सकते है | रामकृष्ण परमहंस ने कहा है ,जब तक मन अस्थिर ,चंचल रहेगा ,तब तक किसी को अच्छा गुरु ,और साधू की संगती मिल जाने पर भी लाभ नही होता है | इसलिए मानशिक शांति का महत्व समझने की अवास्कता है | इसलिए कहा गया है जब तक मन शांत न हो ,तब तक किसी बारे के बारे में बिचार नही करना चाहिए |मस्तिक की शक्ति का बढ़ने में शांति का बहुत बड़ा योगदान है ||||
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