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Saturday, 7 February 2015

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Einstine ने कहा है,
        स्वेग को लेकर में प्रतिदिन यही अनुभभ करता हु की मेरे
भीतरी और बाहरी जीवन के निर्माण में कितने अनगिनत ब्यक्तियो के श्रम और कृपा का हाथ रहा है! और इस अनुभूति से उद्धप्त मेरा अन्तः कारन की छटपटाता रहता है की में कम से दुनिया को कुछ दे सकु जितना अभी तक लिया हु! यह einstine का बरपनंन था और हमे भी जीवन में जो कुछ मिलता है उसके परती आभारी होना चाहिए

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