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Saturday, 28 February 2015

हम वह है जो रह चुके पर अब वो होएंगे जो अब करैंगे ।
जिंदगी में हमेसा कोई न कोई समस्या आते ही रहता है वह कवि नही खत्म होने वाला है ,एक परेसानी खत्म होगी दूसरी आपके आगे आ जायेगी ,जिसका आप कल्पना भी नही कर सकते है ।
आदमी जो इस संसार में आया है उसको हमेसा कोई न कोई परेसानी हमेसा रहेगा ,वो कवि नही खत्म होगा । आपको इस्क्व साथ जीने के लिए सिखाना पड़ेगा , ऐसा कभी नही आएगा की आप अपनी सड़ी सम्यसा आप से खत्म हो जायेगी । आप को इसके साथ ही खुसी से जिन पड़ेगा । हमलोग बिद्यार्थी है , और खाश कर हम लोग जब पढ़ाई करते है , हमे बहुत सम्यसा आते रहती है । कवि लड़के से लड़ाई , कभी एग्जाम का टेंशन , न जाने कितने सरे परेशानी आते रहती है । पर उस परेसानी से ऊब जाते है । उस परेशानी के बारे सोचते है ,की आज यह टेंशन हो गया , मेरे से ऐसा गलती हो गई । ऐसा कोई है ही नही जिसने गलती कभी नही करता है । गलती होना थोरे पूछ कर अत है की आज हम तुमसे ये गलती हो जायेगी । वो तो अपने आप हो जाती है ।
होने से बहुत कुछ सीखते है ।जिससे हम अपनी जिंदगी में वह गलती कवि नही करते है । गलती होना भी जरूरी है जिससे की हम कुछ न्य करने के बारे में सोचते है , या उस गलती के बारे में सुधार करते है ।पर ऐसा भी मुर्ख न बने की वही गलती बार बार दुहराते रहे , वो तो हमारा बेबकूपि होगा । हम इंसान है ,जो भगवन के द्वरा बनाये गए जीव में सबसे अलग है । जो खुद सोच सकता है , गलत सही का फर्क समझता है । हमलोगो से गलती होना संभव है ! इससे डरना नही ,खास कर हमलोगो को हमलोग
स्टूडेंट है । हमलोग तो मस्ती के लिए जान बुझ कर भी कोई कोई गलती करते है । हमलोग जीबन sucess करने के लिए न जाने कितने परेसानी आती है , ओ सब से कभी घबराना नही चाहिए ।
हमे अपने लक्ष्य पर अटल रहना पड़ेगा , हमे अपने लक्ष्य के  लिए रास्ता बनाना पड़ेगा । जिंदगी में दो तरह के स्टूडेंट होते है ,एक वह जो सिर्फ सेटल होना चाहता है , बस उसका पढाई का एक ही फंडा है की किसी तरह कोई जॉब मिल जाये , वह जॉब करना स्टार्ट क्र देता है । 90 फीसदी स्टूडेंट यही सोचता है ,पढ़ाई का मतलब जॉब करना है । कुछ स्टूडेंट ऐसे है उसके बारे में बताना मुश्किल है । वह अपना लक्ष्य पर चलता है , उसका अपना एक सिद्धांत होता है ,वह अपने मूल पर चलता है , जॉब तो वह भी करता है । पर वह जॉब करता है , जिसमे उसको इंटेरस्त होता है । वह कोई महान् काम करने के लिए करता है । उसकी सोच हट के होती है। वह जीबन में पढाई कोई बड़े काम को अनजान देने के लिए पढता है । खेर सबकी अपनी अपनी सोच होती है । पढ़ने का फंडा होता है । जिसका सोच लंबी होती है , वह अपनी मंजिल तक पहुचने का रास्ते निकाल ही लेता है । वह रास्ते कितना भी कठीन क्यों ना हो , कितने भी परेसानी क्यों न हो वह अपनी मंज़िल तक पहुच ही जाता है ,सब परेसानी का समाना करते हुए।
जैसे पानी को अपनी मंजिल तक पहुचने तक कितने  चीजो का सामाना करता परता है , कभी जंगल , पहाड़ , सभी को तोड़ते हुए अपना रास्ता बना लेता है ,और जो रास्ता नही देता उसे भी तोर देता है , पहले तो रोकने की कोशिस करता है वह कुछ समय रुकता है जब पानी का मात्रा बढ़ता है तो एका एक उसे तोर देता है ,और अपनी मंजिल तक पहुच जाता है ।उसी तरह हमलोगो का ज्ञान है , जब हमे थोड़ा कम ज्ञान रहता है तो अपने लक्ष्य तक पहुचने में रुकाबत होती है पर तोरे टाइम के लिए होता है , ऐसा नही की उस रुकाबत से अपने लक्ष्य तक पहुचना की लालसा छोर दे , उस रुकाबत को तोर कर आगे बढ़े। ***

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