एक दिन का सिक्का कुछ रद्दी कागजो के पास गिरा पड़ा, सिक्के ने रद्दी कागजो को देख कर नफ़रत से नाक-भों सिकोड़ी और बोला -ओ गन्दी कागजो। जरा दूर है जाओ तम्हे देखकर मितली आ रही है। जानते नहीं हो की में सोने का सिक्का हूँ । मझे पाने के लिए रजा से रैंक तक लालायित रहते हैं ।सोने के सिक्को को इतने अहंकार से बोलते देखकर, बेचारा रद्दी कागज चुप रहने के सिवाय क्या कर सकता थे ?।
कुछ समय बाद रद्दी कागज के ढेरो को कागज मिल में पहुचाया गया वह उन्हें साफ करके नॉट छापने का कागज बनाया गया जब उनपे नोट छापे गए तो उस एक नॉट की कीमत दस सोने के सिक्के के बराबर थी। जिस समय उन नोटों को गिना जा रहा था तो इत्तेफाक से सोने का सिक्का वही पे पड़ा था। रद्दी कागज ने उससे कहा देखा -भाई अहंकार अच्छा नही होता । उसदिन तूम अपने अहंकार में डूबे हुए मुझे बड़ा भला कह रहे थे । लेकिन आज ? में तुमसे दस गुणी कीमत का हूँ । इसलिए मेरे भाई किसी को छोटा मत समझो वक्त आने पे छोटा भी बड़ा बन जाता है। अहंकार इसलिए अच्छा नही होता ।।।।।।
इसलिए कभी अपने आप पर अहंकार नही करना चाहिए ,क्योकि वही अहंकार आपको
कभी निचे दिखा सकता है ।
हमलोग को पता है , सभी एक सामान नही हो सकता है , क्योकि सब एक दूसरे के
बराबर हो जाये तो दुनिया नही चलेगी इसलिए तो भगवन ने हम लोगो को
एक दूसरे से भिन्न बनाये है ताकि एक दूसरे को आप समझ सके ,
अगर आप जयदा आमिर है तो आप दूसरे गरीब की भलाई करने में लगाइये ,
ना की किसी को निचे दिखने में समय बर्बाद कीजिये ,
अगर आप किसी का परोपकार करते है तो आने वाले जीवन में जब तक आप जिस
ब्यक्ति का आप मदद किये होएंगे तो आप को जरूर याद करैंगे ,
अगर आप किसी से जयदा जानते है तो किसी को ज्ञान बाँटिये ,
या अपने से कम नॉलेज वाले दोस्त , या फिर कोई छोटे बच्चे को
ज्ञान दीजिये न की
उसका मज़ाक उड़ाइए की तुम कितना कम जानते हो ,
वह आपको हमेसा हिन् की भाभना से ही देखेअंगे !
अगर आप उसे कुछ थोड़ा भी क्यों न अगर बता या सीखा देते तो ओ आप का जरूर
याद करैंगे ,
साथ ही आप की प्रसंसा भी करेगा !!!!!!?
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Wednesday, 4 February 2015
Motivational point 2
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