स्वामी विवेकानंद ने कहे थे ,यह गंभीर आत्म मंथन का समय है ,समस्या का समाधान हमारे अंदर ही बिधमान है !कहि बहार तलासने की जरूरत नही है! हमे अपने अंदर झखना है ,अपने सोये हुए विस्वास को जगाना है, इसलिए उसे जगाओ ,जिससे उद्देश् एवम् लक्ष्य का काम के रूप में परिणत हो जाये !
उसी के लिए प्रयत्न करो ! मेरे साहसी बच्चे कम में प्राणपण से जूट जाओ !नाम यस् अथवा अन्न तुच्छय बिषयों के पीछे मत भागो ,स्वार्थ को बिलकुल त्याग दो !आज्ञापालन ,विनम्रता ,सदाचार के गुणों का अनुशीलन -अनुपालन करो !अपनी अत्यमशक्ति ,विस्वास को का कमी मत खोओ !बिखरी शक्तियो को केंद्रीभूत किये बिना कोई महान् कार्य नही हो सकता!
उसी के लिए प्रयत्न करो ! मेरे साहसी बच्चे कम में प्राणपण से जूट जाओ !नाम यस् अथवा अन्न तुच्छय बिषयों के पीछे मत भागो ,स्वार्थ को बिलकुल त्याग दो !आज्ञापालन ,विनम्रता ,सदाचार के गुणों का अनुशीलन -अनुपालन करो !अपनी अत्यमशक्ति ,विस्वास को का कमी मत खोओ !बिखरी शक्तियो को केंद्रीभूत किये बिना कोई महान् कार्य नही हो सकता!
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