क्रोध से हमे कुछ नही हाशिल होता है ,बल्कि अपना ही नुकशान कर लेते है ,क्रोध से हानि सुधर नही सकती ,क्रोध शांत हिने पर केबल पछतावा ही देता है,
^ क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ होता है ,और पच्याताप पर समाप्तय होता है^^^^
^ क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ होता है ,और पच्याताप पर समाप्तय होता है^^^^
No comments:
Post a Comment