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Sunday, 8 February 2015

अच्छी पुस्तके के पास के पास होने से हमे भले मित्रो के साथ न रहने की कमी खटकती ! जितना ही में पुस्तको का अध्यन करता गया ,उतना ही अधिक मुझे उनकी बिशेषता उनके गुन उनकी उपयोगिता मालूम होती गये! लोकमान्न तिलक ने कहा में नरक में भी उत्तम पुस्तको का स्वागत करूंगा क्योकि ,उनमे उतनी शक्ति है की जहां यह होगी वहाँ अपने आप ही स्वर्ग बन जायेगा ,
अंग्रेज इतिहासकार एडवर्ड गिबन के अनुसार पुसतके वे विस्वत्त
दर्पण है जो संतो और वीरो के   मस्तिक का पराबर्तन हमारे मस्तिक पर करती है

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