
ब्रिटेन के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग एक बार ये जानने की कोशिश करेंगे कि अंतरिक्ष में पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन है या नहीं.
ये अभियान प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने अमरीका में रह रहे अरबपति यूरी मिलनर के साथ मिलकर शुरू किया है.
इसे दूसरे ग्रह पर जीवन की खोजने के लिए शुरू किया गया अब तक का सबसे बड़ा अभियान कहा जा रहा है.
10 साल तक चलने वाले इस अभियान में पृथ्वी के क़रीब स्थित लाखों तारों से आने वाले सिग्नलों को सुना जाएगा.
10 करोड़ डॉलर(क़रीब 6 अरब रुपए) लागत वाले इस अभियान का उद्घाटन लंदन के रॉयल सोसाइटी में किया गया.
जवाब की तलाश

इस मौक़े पर प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने कहा, ''मुमकिन है कि कहीं ब्रह्मांड में शायद हमसे ज़्यादा बुद्धिमान लोग हमारी इन रोशनियों को देख रहे होंगे.''
प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने कहा कि वक़्त आ गया है कि हम इस सवाल का जवाब ढूंढें कि पृथ्वी से अलावा कहीं और जीवन है या नहीं.
इस अभियान के संस्थापक कारोबारी मिलनर ने कहा कि तकनीकी का इतना विकास हो चुका है कि दूसरे ग्रहों के संकेतों को सुना जा सके.

इस तरह के पुराने अभियानों की तुलना में इस बार 10 गुना ज़्यादा आकाश को कवर किया जाएगा. साथ ही पांच गुना अधिक रेडियो स्पेक्ट्रम को स्कैन किया जाएगा और यह काम 100 गुना ज़्यादा तेज़ी से होगा.
इस अभियान में दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली दूरबीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. जिनमें से एक वेस्ट वर्जीनिया का ग्रीन बैंक टेलीस्कोप है और दूसरा ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स का पार्क्स टेलीस्कोप.
क्या दूसरे ग्रहों में पनप सकता है जीवन :-
क्या दूसरे ग्रहों में भी जीवन है? क्या वहाँ भी उसी तरह से लोग रहते हैं जिस तरह से पृथ्वी में रहते हैं? क्या वहाँ भी पृथ्वी की तरह की जीवन परिस्थितियाँ हैं?
दूसरे ग्रहों के जीवों (एलियन्स) और उनके कथित यानों को लेकर न केवल बहुत सी विज्ञान कथाएँ लिखी गई हैं और फ़िल्में बनी हैं, इन सवालों ने वैज्ञानिकों को भी लगातार काम पर लगाए रखा है.
अब दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने एक ठोस काम किया है. उन्होंने ने एक सूची तैयार की है कि किन ग्रहों और किन चंद्रमाओं पर जीवन होने की संभावना है.
वैज्ञानिक कह रहे हैं कि हमारे सौरमंडल के शनि ग्रह का चंद्रमा टाइटन और हमारे सौर मंडल से बाहर का एक ग्रह 'ग्लीज़ 581जी' में जीवन की सबसे अधिक संभावना हो सकती है.
ये दोनों पृथ्वी से 20.5 प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं. एक प्रकाश वर्ष यानी वह दूरी जो प्रकाश की गति से एक वर्ष में तय की जा सकती है. एक प्रकाश वर्ष में लगभग 10 खरब किलोमीटर होते हैं.
सूची
वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दूसरे ग्रहों में जीवन की संभावना के लिए दो तरह की सूची तैयार की है.
पृथ्वी से समानता सूचकांक

एक सूची उन ग्रहों या चंद्रमाओं की है जो पृथ्वी जैसे हैं इसे 'अर्थ सिमिलरिटी इंडेक्स (ईएसआई)' का नाम दिया गया. दूसरी सूची उनकी जहाँ जीवन पनपने की संभावना दिखती है, इसे 'प्लैनेटरी हैबिटैबिलिटी इंडेक्स (पीएचआई)' का नाम दिया गया.
वैज्ञानिकों का ये शोध खगोल जीवविज्ञान की एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.
इस शोधपत्र के सहलेखक, अमरीका की वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉ डिर्क शुल्ज़ माकश कहते हैं, "चूंकि हम अपने अनुभवों से जानते हैं कि पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हों तो वहाँ जीवन पनप सकता है इसलिए पहला सवाल ये था कि क्या किसी और दुनिया में पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हैं?"
वे कहते हैं, "दूसरा सवाल ये था कि किसी और सौरमंडल में क्या कोई ऐसा ग्रह है जहाँ ऐसा मौसम है कि वहाँ किसी और रूप में जीवन पनप सकता है, चाहे उसकी जानकारी हमें हो या न हो."
जैसा कि सूचियों के नाम से स्पष्ट है, पहली श्रेणी ईएसआई में उन ग्रहों को रखा गया जो पृथ्वी की तरह हैं. इसमें उनके आकार, घनत्व और अपने मातृ ग्रह से दूरी को ध्यान में रखा गया.
जबकि दूसरी सूची यानी पीएचआई में दूसरे पैमाने रखे गए, जैसे कि उस दुनिया का मौसम कैसा है, उसकी सतह चट्टानी है या बर्फ़ीली, वहाँ वायुमंडल है या चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है या नहीं आदि.
परिस्थितियाँ
वैज्ञानिकों ने अपने शोध में इसका भी अध्ययन किया कि किसी ग्रह में जीवों के लिए किसी तरह की ऊर्जा उपलब्ध है.
जीवन पनपने की संभावना सूचकांक

ये ऊर्जा मातृ ग्रह से रोशनी की तरह भी मिल सकती है या फिर गुरुत्वाकर्षण जैसी कोई शक्ति हो जिसकी वजह से ग्रह या चंद्रमा पर चीज़ों के परस्पर रगड़ से ऊर्जा उत्पन्न होने की संभावना हो.
जब इन परिस्थियों पर विचार हुआ तो रसायन शास्त्र को वरीयता दी गई, मसलन क्या उस ग्रह या चंद्रमा में कोई कार्बनिक यौगिक पदार्थ मौजूद है या कोई ऐसा तरल पदार्थ मौजूद है जो व्यापक रासायनिक क्रिया करने में सक्षम हो?
ईएसआई यानी पृथ्वी से समानता वाली सूची में सबसे अधिक अंक 1.00 दिया गया, जो कि ज़ाहिर तौर पर पृथ्वी के लिए था लेकिन दूसरे नंबर पर ग्लीज़ 581जी आया जिसे 0.89 अंक मिले. ये ग्रह हमारे सौरमंडल से बाहर है और कई वैज्ञानिकों को इसके अस्तित्व पर ही संदेह है. इसके बाद इससे मिलता जुलता ही एक ग्रह ग्लीज़ 581डी आया जिसे 0.74 अंक मिले.
हमारे अपने सौर मंडल में जिन ग्रहों को सबसे ज़्यादा अंक मिले उनमें मंगल (0.70 अंक) और बुध (0.60 अंक) हैं.
जबकि उन ग्रहों या चंद्रमाओं में जो पृथ्वी की तरह तो नहीं हैं लेकिन फिर भी वहाँ जीवन हो सकता है, सबसे अधिक 0.64 अंक मिले शनि के चंद्रमा टाइटन को, दूसरे मंगल (0.59 अंक) को और तीसरे वृहस्तपति (0.47 अंक) को.
संभावना
वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसे ग्रहों की तलाश में तेज़ी आई है जहाँ जीवन होने की संभावना हो सकती है.
नासा ने वर्ष 2009 में केप्लर स्पेस टेलिस्कोप अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया था. इस टेलिस्कोप ने अब तक एक हज़ार ऐसे ग्रहों या चंद्रमाओं का पता लगाया है जहाँ जीवन पनपने की संभावना हो सकती है.
उनका कहना है कि भविष्य में जो टेलिस्कोप बनेंगे, उनमें ये क्षमता भी होगी कि वह किसी ग्रह में जैविक पदार्थों से निकलने वाली रौशनी को पहचान सके.
उदाहरण के तौर पर क्लोरोफ़िल की उपस्थिति जो किसी भी पेड़-पौधे में मौजूद अहम तत्व होता है.
एलियंस के अस्तित्व पर हॉकिंग की मुहर
इस ब्रह्मांड के दूसरे ग्रहों में प्राणी अवश्य ही हैं लेकिन लोगों को उनसे बचकर रहना चाहिए. ये चेतावनी है ब्रिटेन के जाने-माने वैज्ञानिक स्टीवन हॉकिंग की.
टेलीविज़न के डिस्कवरी चैनल पर एक सिरीज़ दिखाई जा रही है जिसमें स्टीवन हॉकिंग ने माना कि यह पूरी तरह से तार्किक है कि बौद्धिक प्राणी अन्य ग्रहों पर भी होंगे.
उन्होंने कहा कि संभव है कि वो संसाधनों की तलाश में पृथ्वी पर हमला करें और फिर आगे बढ़ जाएं.
उन्होने कहा, "अगर एलियन पृथ्वी पर आते हैं तो उसका वैसा ही परिणाम होगा जैसा कोलम्बस के अमरीका पहुंचने पर वहां के मूल निवासियों का हुआ था".
स्टीवन हॉकिंग मानते हैं कि दूसरे ग्रहों के प्राणियों से संपर्क करने की कोशिश करने से बेहतर ये होगा कि हम उससे बचें.
इसकी व्याख्या करते हुए उन्होने कहा, "इसके लिए हमें अपने आपको देखने की ज़रूरत है कि बौद्धिक जीव का विकास उस शक्ल में हो सकता है जिससे हम न मिलना चाहें".
अतीत में मानव ने अंतरिक्ष में ऐसे खोजी यान भेजे हैं जिनमें मानव के नक्काशीदार चित्र और पृथ्वी की स्थिति बताने वाले नक्शे रखे हुए थे.
अगर एलियन पृथ्वी पर आते हैं तो उसका वैसा ही परिणाम होगा जैसा कोलम्बस के अमरीका पहुंचने पर वहां के मूल निवासियों का हुआ था.
स्टीवन हॉकिंग
इसके अलावा अंतरिक्ष में रेडियो संकेत भी भेजे गए हैं जिससे वो किसी एलियन सभ्यता तक पहुंच सकें.
स्टीवन हॉकिंग ने कहा कि इस ब्रह्मांड में अनगिनत आकाशगंगाएं हैं इसलिए यह सोचना कि उनमें कहीं न कहीं जीवन होगा बिल्कुल तार्किक है.
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी चुनौती यह पता करना है कि वो देखने में कैसे होंगे".
डिस्कवरी चैनल पर दिखाई जाने वाली इस सिरीज़ में कई तरह के जीवों की कल्पना की गई है जिनमें दो पैरों पर चलने वाले शाकाहारी जीव से लेकर शिकार करने वाले छिपकलीनुमा जीव शामिल हैं.
लेकिन स्टीवन हॉकिंग का मानना है कि इस ब्रह्मांड में जीवन साधारण सूक्ष्म जीवाणुओं वाला ही होगा.
हमारे सौर मंडल पर तैयार की गई बीबीसी की एक सिरीज़ में मैनचैस्टर विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफ़ेसर ब्रायन कॉक्स ने कहा था कि हमारे सौर मंडल में भी जीवन हो सकता है.
उनका कहना था कि बृहस्पति ग्रह के एक चंद्रमा यूरोपा में जो बर्फ़ की परतें जमा हैं उनके नीचे सूक्ष्म जीव हो सकते हैं.
reference :-
http://www.bbc.com/hindi/science/2010/04/100404_hawking_aliens_mg.shtml
reference :-
http://www.bbc.com/hindi/science/2011/11/111124_alien_worlds_vv
दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना
दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना

खगोल शास्त्री एक ज़माने से पृथ्वी जैसे ग्रह की खोज में लगे हुए हैं.
ब्रिटेन के जाने माने खगोलशास्त्री का मानना है कि पृथ्वी जैसे दूसरे ग्रहों पर जीवन और एलियन के मिलने की संभावना पहले से कहीं ज़्यादा है.
प्रसिद्ध खगोलशास्त्री लार्ड रीस ने दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश के शीर्षक के तहत लंदन में आयोजित एक कॉंफ़्रेंस में यह बातें कही हैं जहां दुनिया भर से प्रसिद्ध खगोलशास्त्री जमा हुए थे.
रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष और खगोलशास्त्री मार्टिन रीस ने कहा है कि अंतरिक्ष में नए टेलिस्कोप के लगाए जाने के बाद से पृथ्वी की तरह के दूसरे ग्रहों के मिलने की संभावना काफ़ी बढ़ गई है.
कहा जाता है कि इस नए टेलिस्कोप में अंतरिक्ष में दूर दूर तक पृथ्वी जैसे ग्रह को पहचानने की क्षमता है.
भारी बदलाव
लॉर्ड रीस ने कहा,'' एलियन जीवन की खोज मनुष्यता का कायकल्प करने वाला क्षण होगा जो हमारा अपने-आपके बारे में विचार बदल देगा और साथ ही ब्रह्मंड में हमारे स्थान के बारे में भी.''

दुनिया भर में एलियन के बारे में काफ़ी दिलचस्पी पाई जाती है
उन्होंने कहा कि लगभग 50 वर्ष से वैज्ञानिक अंतरिक्ष में जीवन का पता चलाने की कोशिश में लगे हैं और जीवंत आवाज़ें सुनने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है.
उन्होंने कहा, अब यह इसलिए संभव नज़र आने लगा है कि टेक्नॉलोजी में व्यापक तरक़्क़ी हुई है और वास्तव में अब हम यह आशा कर सकते हैं कि दूसरे तारामंडल में हम पृथ्वी के आकार का ग्रह तलाश कर सकें.
उन्होंने ये भी कहा कि जहां इससे ज़मीन जैसे ग्रहों के मिलने की संभावना बढ़ी है वहीं जीवन के मिलने की संभावना भी बढ़ी है.
reference :-http://www.bbc.com/hindi/science/2010/01/100125_alien_rees_mb.shtml











