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Wednesday, 22 July 2015

एलियन की खोज का सबसे बड़ा अभियान शुरू



अंतरिक्ष

ब्रिटेन के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग एक बार ये जानने की कोशिश करेंगे कि अंतरिक्ष में पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन है या नहीं.
ये अभियान प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने अमरीका में रह रहे अरबपति यूरी मिलनर के साथ मिलकर शुरू किया है.
इसे दूसरे ग्रह पर जीवन की खोजने के लिए शुरू किया गया अब तक का सबसे बड़ा अभियान कहा जा रहा है.
10 साल तक चलने वाले इस अभियान में पृथ्वी के क़रीब स्थित लाखों तारों से आने वाले सिग्नलों को सुना जाएगा.
10 करोड़ डॉलर(क़रीब 6 अरब रुपए) लागत वाले इस अभियान का उद्घाटन लंदन के रॉयल सोसाइटी में किया गया.

जवाब की तलाश



ब्रेकथ्रू इनीशिएटिव

इस मौक़े पर प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने कहा, ''मुमकिन है कि कहीं ब्रह्मांड में शायद हमसे ज़्यादा बुद्धिमान लोग हमारी इन रोशनियों को देख रहे होंगे.''
प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने कहा कि वक़्त आ गया है कि हम इस सवाल का जवाब ढूंढें कि पृथ्वी से अलावा कहीं और जीवन है या नहीं.
इस अभियान के संस्थापक कारोबारी मिलनर ने कहा कि तकनीकी का इतना विकास हो चुका है कि दूसरे ग्रहों के संकेतों को सुना जा सके.


प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग
स्टीफ़न हॉकिंग की किताब 'ए ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम' बेस्ट सेलर रही है.

इस तरह के पुराने अभियानों की तुलना में इस बार 10 गुना ज़्यादा आकाश को कवर किया जाएगा. साथ ही पांच गुना अधिक रेडियो स्पेक्ट्रम को स्कैन किया जाएगा और यह काम 100 गुना ज़्यादा तेज़ी से होगा.
इस अभियान में दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली दूरबीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. जिनमें से एक वेस्ट वर्जीनिया का ग्रीन बैंक टेलीस्कोप है और दूसरा ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स का पार्क्स टेलीस्कोप.

क्या दूसरे ग्रहों में पनप सकता है जीवन :-

क्या दूसरे ग्रहों में भी जीवन है? क्या वहाँ भी उसी तरह से लोग रहते हैं जिस तरह से पृथ्वी में रहते हैं? क्या वहाँ भी पृथ्वी की तरह की जीवन परिस्थितियाँ हैं?
दूसरे ग्रहों के जीवों (एलियन्स) और उनके कथित यानों को लेकर न केवल बहुत सी विज्ञान कथाएँ लिखी गई हैं और फ़िल्में बनी हैं, इन सवालों ने वैज्ञानिकों को भी लगातार काम पर लगाए रखा है.
अब दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने एक ठोस काम किया है. उन्होंने ने एक सूची तैयार की है कि किन ग्रहों और किन चंद्रमाओं पर जीवन होने की संभावना है.
वैज्ञानिक कह रहे हैं कि हमारे सौरमंडल के शनि ग्रह का चंद्रमा टाइटन और हमारे सौर मंडल से बाहर का एक ग्रह 'ग्लीज़ 581जी' में जीवन की सबसे अधिक संभावना हो सकती है.
ये दोनों पृथ्वी से 20.5 प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं. एक प्रकाश वर्ष यानी वह दूरी जो प्रकाश की गति से एक वर्ष में तय की जा सकती है. एक प्रकाश वर्ष में लगभग 10 खरब किलोमीटर होते हैं.

सूची

वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दूसरे ग्रहों में जीवन की संभावना के लिए दो तरह की सूची तैयार की है.

पृथ्वी से समानता सूचकांक

पृथ्वी और चंद्रमा
  • पृथ्वी - 1.00
  • ग्लीज़ 581जी - 8.89
  • ग्लीज़ 581डी - 0.74
  • ग्लीज़ 581सी - 0.70
  • मंगल - 0.70
  • बुध - 0.60
  • एचडी 69830 - 0.60
  • 55 सीएनसी सी - 0.56
  • चंद्रमा - 0.56
  • ग्लीज़ 581ई - 0.53

एक सूची उन ग्रहों या चंद्रमाओं की है जो पृथ्वी जैसे हैं इसे 'अर्थ सिमिलरिटी इंडेक्स (ईएसआई)' का नाम दिया गया. दूसरी सूची उनकी जहाँ जीवन पनपने की संभावना दिखती है, इसे 'प्लैनेटरी हैबिटैबिलिटी इंडेक्स (पीएचआई)' का नाम दिया गया.
वैज्ञानिकों का ये शोध खगोल जीवविज्ञान की एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.
इस शोधपत्र के सहलेखक, अमरीका की वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉ डिर्क शुल्ज़ माकश कहते हैं, "चूंकि हम अपने अनुभवों से जानते हैं कि पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हों तो वहाँ जीवन पनप सकता है इसलिए पहला सवाल ये था कि क्या किसी और दुनिया में पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हैं?"
वे कहते हैं, "दूसरा सवाल ये था कि किसी और सौरमंडल में क्या कोई ऐसा ग्रह है जहाँ ऐसा मौसम है कि वहाँ किसी और रूप में जीवन पनप सकता है, चाहे उसकी जानकारी हमें हो या न हो."
जैसा कि सूचियों के नाम से स्पष्ट है, पहली श्रेणी ईएसआई में उन ग्रहों को रखा गया जो पृथ्वी की तरह हैं. इसमें उनके आकार, घनत्व और अपने मातृ ग्रह से दूरी को ध्यान में रखा गया.
जबकि दूसरी सूची यानी पीएचआई में दूसरे पैमाने रखे गए, जैसे कि उस दुनिया का मौसम कैसा है, उसकी सतह चट्टानी है या बर्फ़ीली, वहाँ वायुमंडल है या चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है या नहीं आदि.

परिस्थितियाँ

वैज्ञानिकों ने अपने शोध में इसका भी अध्ययन किया कि किसी ग्रह में जीवों के लिए किसी तरह की ऊर्जा उपलब्ध है.

जीवन पनपने की संभावना सूचकांक

टाइटन
  • टाइटन - 0.64
  • मंगल - 0.59
  • यूरोपा - 0.49
  • ग्लीज़ 581जी - 0.45
  • ग्लीज़ 581डी - 0.43
  • ग्लीज़ 581सी - 0.41
  • वृहस्पति - 0.37
  • शनि - 0.37
  • शुक्र 0.37
  • एंसेलैडस - 0.35

ये ऊर्जा मातृ ग्रह से रोशनी की तरह भी मिल सकती है या फिर गुरुत्वाकर्षण जैसी कोई शक्ति हो जिसकी वजह से ग्रह या चंद्रमा पर चीज़ों के परस्पर रगड़ से ऊर्जा उत्पन्न होने की संभावना हो.
जब इन परिस्थियों पर विचार हुआ तो रसायन शास्त्र को वरीयता दी गई, मसलन क्या उस ग्रह या चंद्रमा में कोई कार्बनिक यौगिक पदार्थ मौजूद है या कोई ऐसा तरल पदार्थ मौजूद है जो व्यापक रासायनिक क्रिया करने में सक्षम हो?
ईएसआई यानी पृथ्वी से समानता वाली सूची में सबसे अधिक अंक 1.00 दिया गया, जो कि ज़ाहिर तौर पर पृथ्वी के लिए था लेकिन दूसरे नंबर पर ग्लीज़ 581जी आया जिसे 0.89 अंक मिले. ये ग्रह हमारे सौरमंडल से बाहर है और कई वैज्ञानिकों को इसके अस्तित्व पर ही संदेह है. इसके बाद इससे मिलता जुलता ही एक ग्रह ग्लीज़ 581डी आया जिसे 0.74 अंक मिले.
हमारे अपने सौर मंडल में जिन ग्रहों को सबसे ज़्यादा अंक मिले उनमें मंगल (0.70 अंक) और बुध (0.60 अंक) हैं.
जबकि उन ग्रहों या चंद्रमाओं में जो पृथ्वी की तरह तो नहीं हैं लेकिन फिर भी वहाँ जीवन हो सकता है, सबसे अधिक 0.64 अंक मिले शनि के चंद्रमा टाइटन को, दूसरे मंगल (0.59 अंक) को और तीसरे वृहस्तपति (0.47 अंक) को.

संभावना

वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसे ग्रहों की तलाश में तेज़ी आई है जहाँ जीवन होने की संभावना हो सकती है.
नासा ने वर्ष 2009 में केप्लर स्पेस टेलिस्कोप अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया था. इस टेलिस्कोप ने अब तक एक हज़ार ऐसे ग्रहों या चंद्रमाओं का पता लगाया है जहाँ जीवन पनपने की संभावना हो सकती है.
उनका कहना है कि भविष्य में जो टेलिस्कोप बनेंगे, उनमें ये क्षमता भी होगी कि वह किसी ग्रह में जैविक पदार्थों से निकलने वाली रौशनी को पहचान सके.
उदाहरण के तौर पर क्लोरोफ़िल की उपस्थिति जो किसी भी पेड़-पौधे में मौजूद अहम तत्व होता है.
प्रोफ़ैसर स्टीवन हॉकिंगएलियंस के अस्तित्व पर हॉकिंग की मुहर
इस ब्रह्मांड के दूसरे ग्रहों में प्राणी अवश्य ही हैं लेकिन लोगों को उनसे बचकर रहना चाहिए. ये चेतावनी है ब्रिटेन के जाने-माने वैज्ञानिक स्टीवन हॉकिंग की.
टेलीविज़न के डिस्कवरी चैनल पर एक सिरीज़ दिखाई जा रही है जिसमें स्टीवन हॉकिंग ने माना कि यह पूरी तरह से तार्किक है कि बौद्धिक प्राणी अन्य ग्रहों पर भी होंगे.
उन्होंने कहा कि संभव है कि वो संसाधनों की तलाश में पृथ्वी पर हमला करें और फिर आगे बढ़ जाएं.
उन्होने कहा, "अगर एलियन पृथ्वी पर आते हैं तो उसका वैसा ही परिणाम होगा जैसा कोलम्बस के अमरीका पहुंचने पर वहां के मूल निवासियों का हुआ था".
स्टीवन हॉकिंग मानते हैं कि दूसरे ग्रहों के प्राणियों से संपर्क करने की कोशिश करने से बेहतर ये होगा कि हम उससे बचें.
इसकी व्याख्या करते हुए उन्होने कहा, "इसके लिए हमें अपने आपको देखने की ज़रूरत है कि बौद्धिक जीव का विकास उस शक्ल में हो सकता है जिससे हम न मिलना चाहें".
अतीत में मानव ने अंतरिक्ष में ऐसे खोजी यान भेजे हैं जिनमें मानव के नक्काशीदार चित्र और पृथ्वी की स्थिति बताने वाले नक्शे रखे हुए थे.
अगर एलियन पृथ्वी पर आते हैं तो उसका वैसा ही परिणाम होगा जैसा कोलम्बस के अमरीका पहुंचने पर वहां के मूल निवासियों का हुआ था.
स्टीवन हॉकिंग
इसके अलावा अंतरिक्ष में रेडियो संकेत भी भेजे गए हैं जिससे वो किसी एलियन सभ्यता तक पहुंच सकें.
स्टीवन हॉकिंग ने कहा कि इस ब्रह्मांड में अनगिनत आकाशगंगाएं हैं इसलिए यह सोचना कि उनमें कहीं न कहीं जीवन होगा बिल्कुल तार्किक है.
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी चुनौती यह पता करना है कि वो देखने में कैसे होंगे".
डिस्कवरी चैनल पर दिखाई जाने वाली इस सिरीज़ में कई तरह के जीवों की कल्पना की गई है जिनमें दो पैरों पर चलने वाले शाकाहारी जीव से लेकर शिकार करने वाले छिपकलीनुमा जीव शामिल हैं.
लेकिन स्टीवन हॉकिंग का मानना है कि इस ब्रह्मांड में जीवन साधारण सूक्ष्म जीवाणुओं वाला ही होगा.
हमारे सौर मंडल पर तैयार की गई बीबीसी की एक सिरीज़ में मैनचैस्टर विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफ़ेसर ब्रायन कॉक्स ने कहा था कि हमारे सौर मंडल में भी जीवन हो सकता है.
उनका कहना था कि बृहस्पति ग्रह के एक चंद्रमा यूरोपा में जो बर्फ़ की परतें जमा हैं उनके नीचे सूक्ष्म जीव हो सकते हैं.
reference :-
http://www.bbc.com/hindi/science/2010/04/100404_hawking_aliens_mg.shtml
reference :-
http://www.bbc.com/hindi/science/2011/11/111124_alien_worlds_vv

दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना

मार्टिन रीस, ब्रितानी खगोल शास्त्री
खगोल शास्त्री एक ज़माने से पृथ्वी जैसे ग्रह की खोज में लगे हुए हैं.
ब्रिटेन के जाने माने खगोलशास्त्री का मानना है कि पृथ्वी जैसे दूसरे ग्रहों पर जीवन और एलियन के मिलने की संभावना पहले से कहीं ज़्यादा है.
प्रसिद्ध खगोलशास्त्री लार्ड रीस ने दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश के शीर्षक के तहत लंदन में आयोजित एक कॉंफ़्रेंस में यह बातें कही हैं जहां दुनिया भर से प्रसिद्ध खगोलशास्त्री जमा हुए थे.
रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष और खगोलशास्त्री मार्टिन रीस ने कहा है कि अंतरिक्ष में नए टेलिस्कोप के लगाए जाने के बाद से पृथ्वी की तरह के दूसरे ग्रहों के मिलने की संभावना काफ़ी बढ़ गई है.
कहा जाता है कि इस नए टेलिस्कोप में अंतरिक्ष में दूर दूर तक पृथ्वी जैसे ग्रह को पहचानने की क्षमता है.

भारी बदलाव

लॉर्ड रीस ने कहा,'' एलियन जीवन की खोज मनुष्यता का कायकल्प करने वाला क्षण होगा जो हमारा अपने-आपके बारे में विचार बदल देगा और साथ ही ब्रह्मंड में हमारे स्थान के बारे में भी.''
एलियन
दुनिया भर में एलियन के बारे में काफ़ी दिलचस्पी पाई जाती है
उन्होंने कहा कि लगभग 50 वर्ष से वैज्ञानिक अंतरिक्ष में जीवन का पता चलाने की कोशिश में लगे हैं और जीवंत आवाज़ें सुनने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है.
उन्होंने कहा, “अब यह इसलिए संभव नज़र आने लगा है कि टेक्नॉलोजी में व्यापक तरक़्क़ी हुई है और वास्तव में अब हम यह आशा कर सकते हैं कि दूसरे तारामंडल में हम पृथ्वी के आकार का ग्रह तलाश कर सकें.”
उन्होंने ये भी कहा कि जहां इससे ज़मीन जैसे ग्रहों के मिलने की संभावना बढ़ी है वहीं जीवन के मिलने की संभावना भी बढ़ी है.
reference :-http://www.bbc.com/hindi/science/2010/01/100125_alien_rees_mb.shtml

मृत आकाशगंगाओं में हो सकते हैं डार्क मैटर

मृत आकाशगंगाओं में हो सकते हैं डार्क मैटर
मेलबर्न: पृथ्वी से लगभग 30 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगाओं के एक समूह में दृश्य पदार्थ की तुलना में 100 गुना अधिक डार्क मैटर हैं।
एक नये अध्ययन के अनुसार अनुसंधानकर्ताओं ने कोमा कलस्टर की आकाशगंगाओं के अध्ययन के लिए शक्तिशाली कम्प्यूटर सिमुलेशन का प्रयोग किया। कोमा कलस्टर ब्रह्मांड की सबसे बड़ी संरचना में से है जिसमें 1000 से अधिक आकाशगंगाएं गुरुत्वाकषर्ण से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा, इस कलस्टर की आकाशगंगाएं कम से कम सात अरब वर्ष पहले अस्तित्व में आयी होगी। अगर आकाशगंगाओं के विकास के बारे में हमारा मौजूदा सिद्धांत सही है तो इसका मतलब है कि उनमें बहुत अधिक डार्क मैटर है जो दृश्य पदार्थ का बचाव करती है। डार्क मैटर को सीधे तौर पर नहीं देखा जा सकता है लेकिन माना जाता है कि ब्रह्मांड के करीब 84 प्रतिशत पदार्थ में यह रहस्यमयी तत्व है।

डार्क मैटर :-

श्याम पदार्थ , पदार्थ का वह रूप है जिससे संभवतःअब तक हम अपरिचित हैं । चूँकि यह किसी भी प्रकार के विद्युत-चुंबकीय विकिरणों को न तो विकरित करता है तथा न ही अवशोषित करता है , फलस्वरुप इसे किसी भी टेलीस्कोप के द्वारा प्रत्यक्षतः नहीं देखा जा सकता है । दूसरे शब्दों में , हमारी पारंपरिक बोध क्षमता इस पदार्थ के सामने बिलकुल अंधेरे में है जिसके चलते इसका नामकरण श्याम पदार्थ किया गया है । सन्‌ 1932 ई में हॉलैंड के महान वैज्ञानिक जॉन ऊर्ट ने पाया कि हमारी आकाशगंगा के पड़ोस में स्थित सितारों की परिक्रमण गति परिकलनों में पूर्वानुमानित गति से कहीं ज्यादा है । इस असंगति की व्याख्या करने के लिए उन्होंने एक ऐसे पदार्थ की सर्वथा प्रथम अवधारणा की जो कि हमारी नजरों से ओझल थी । सन्‌ 1933 ई में विख्यात वैज्ञानिक फ्रिट्ज विकी ने कोमा आकाशगंगा-समूह में आकाशगंगाओं की गणनाओं से प्राप्त से कहीं ज्यादा तीव्र परिक्रमण गति की व्याख्या में पाया कि इस “गायब पदार्थ” पदार्थ की मात्रा दृश्य पदार्थ की मात्रा से कम–से-कम सौ गुनी ज्यादा होनी चाहिए । उन्होंने इस गायब पदार्थ के लिए “श्याम पदार्थ” शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया । सन्‌ 1950 और 60 के दशक में वैज्ञानिकों ने सर्पिल आकाशगंगाओं के घूर्णन के अध्ययन दौरान एक पेचीदा खोज की । उन्होंने पाया कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में जहाँ पर दृश्य पदार्थ की मात्रा ज्यादा होती है, सितारों की घूर्णन गति आकाशगंगा के किनारों पर स्थित सितारों की घूर्णन गति के बराबर होती है । यह उनके इस आशा कि केंद्र में सितारों की घूर्णन गति आकाशगंगा के किनारों पर स्थित सितारों की घूर्णन गति से ज्यादा होगी के उलट था । 1970 के दशक में वैज्ञानिक सुश्री वीरा रुबीन ने एंड्रोमेडा सहित अनेक अन्य आकाशगंगाओं में सितारों की गति का विस्तृत अध्ययन कर ब्रह्मांड में इस परिघटना की व्यापकता की पुष्टि कर दी । इन सभी परिणामों का निहितार्थ यह इंगित करते थे कि या तो गुरुत्वाकर्षण तथा घूर्णन के बारे में हमारी समझ में कोई मूलभूत त्रुटि है ,जिसकी संभावना अत्यंत ही क्षीण थी क्योंकि न्यूटन के नियम सदियों से परीक्षणों में खरे उतरते रहे हैं , अथवाआकाशगंगाओं तथा आकाशगंगा समूहों में अवश्य ही कोई ना कोई ऐसा पदार्थ उपस्थित है जो गुरुत्वाकर्षण के इन देखे गए प्रभावों के लिए उत्तरदायी है । इन प्रेक्षणों ने खगोलविदों को श्याम पदार्थ के अस्तित्व तथा उनकी विशेषताओं की खोज हेतु ब्रह्मांड की दूर दराज के कोनों को खंगालने के लिए प्रेरित कर दिया । इसके लिए वैज्ञानिकों ने अपना ध्यान गुरुत्वाकर्षण बल से जुड़ी आकाशगंगाओं के विशाल समूहों (जिनमें पचास से लेकर हजारों आकाशगंगाएँ शामिल थीं) पर इस उम्मीद में केंद्रित किया कि शायद वहाँ पर उन्हें वे तप्त गैसें मिलेगीं जो उनके पूर्व के अवलोकनों में नहीं देखी जा सकी थीं और ये गैसें ही उस गायब अथवा श्याम पदार्थ की समस्या का हल होंगी । इस प्रक्रिया में जब उन्होंनेएक्स-किरण टेलीस्कोपों (जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता महान भारतीय वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के सम्मान में रखे गए नासा के चंद्रा टेलीस्कोप नामक एक्स-किरण टेलीस्कोप का अत्यंत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है ) का रुख उन समूहों की ओर किया तो उन्हें वास्तव में अति तप्त गैसों के बृहदाकार बादल मिले । लेकिन गैसों के ये विशाल बादल भी द्रव्यमान की प्रेक्षित असंगति को दूर करने में सक्षम सिद्ध नहीं हुए । इन आकाशगंगीय क्लस्टरों के उष्ण गैस दाब की गणना करने पर प्राप्त हुआ कि क्लस्टरों का द्रव्यमान सभी तारों तथा गैसों के कुल द्रव्यमान का न्यूनतम पाँच से छः गुना होना चाहिए अन्यथा इन तप्त गैसों को पलायन रोक सकने के लिए यथेष्ट गुरुत्व नहीं नहीं होगा । इन प्रेक्षणों तथा गणनाओं ने श्याम पदार्थ के अस्तित्व संबंधी अनेक सूत्र उपलब्ध करा दिए ।परवर्ती काल में वैज्ञानिकों ने गतिज तथा व्यापक सापेक्षता के सिद्धांतों पर आधारित निर्मित आकाशगंगा ,आकाशगंगाओं के समूहोंतथा संपूर्ण ब्रह्मांड के द्रव्यमान तथा “प्रकाशित” पदार्थों (जिसमें तारे, गैस तथा अंतर-तारकीय एवं अंतर-आकाशगंगीय धूल शामिल हैं) के द्रव्यमान में व्यापक विसंगति पायी । इस विसंगतता की सर्वाधिक सफल व्याख्या ब्रह्मांड में भारी तथा असाधारण कणों से निर्मित श्याम पदार्थों ,जो केवल गुरुत्वार्कषण बल तथा संभवतः दुर्बल बल के द्वारा परस्पर अंतःक्रिया करते हैं , के अस्तित्व में होने के सिद्धांत के द्वारा की जा सकती है ।कम्प्यूटर जनित मॉडलों में वैज्ञानिकों ने पाया कि श्याम पदार्थ को सामान्य दृश्य पदार्थ के साथ संपूर्ण ब्रह्मांड में गुंथा होना चाहिए ।
गौरतलब है कि, यूरोप में शुरू हुई महामशीन या लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर के ढेरों मकसदों में से एक आन्ध्र पदार्थ की खोज करना भी है।
reference :-https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95_%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%9F%E0%A4%B0

श्याम उर्जा (Dark Energy)

श्याम उर्जा (Dark Energy) यह विषय एक विज्ञान फैटंसी फिल्म की कहानी के जैसा है। श्याम ऊर्जा (Dark Energy), एक रहस्यमय बल जिसे कोई समझ नहीं पाया है, लेकिन इस बल के प्रभाव से ब्रह्मांड के पिंड एक दूसरे से दूर और दूर होते जा रहे है।

यह वह काल्पनिक बल है जिसका दबाव ऋणात्मक है और सारे ब्रह्मांड में फैला हुआ है। सापेक्षता वाद के सिद्धांत के अनुसार, इस ऋणात्मक दबाव का प्रभाव गुरुत्वाकर्षण के विपरीत प्रभाव के समान है।

श्याम ऊर्जा 1998 में उस वक्त प्रकाश में आयी, जब अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के 2 समुहों ने विभिन्न आकाशगंगाओं में विस्फोट की प्रक्रिया से गुजर रहे सितारों (सुपरनोवा) (1) पर एक सर्वे किया। उन्होंने पाया की ये सुपरनोवा की प्रकाश दीप्ति अपेक्षित प्रकाश दीप्ति से कम है, इसका मतलब यह कि उन्हें जितने पास होना चाहिये थी, वे उससे ज्यादा दूर है। इसका एक ही मतलब हो सकता था कि ब्रह्मांड के विस्तार की गति कुछ काल पहले की तुलना में बढ़ गयी है! (लाल विचलन भी देखे)

इसके पहले तक यह माना जाता था कि ब्रह्मांड के विस्तार की गति धीरे-धीरे गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कम होते जा रही है। लेकिन सुपरनोवा के विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि कोई रहस्यमय बल गुरुत्वाकर्षण बल ले विपरीत कार्य कर ब्रह्मांड के विस्तार को गति दे रहा है। यह एक आश्चर्यजनक, विस्मयकारी खोज थी।

पहले तो वैज्ञानिकों को इस प्रयोग के परिणामों की विश्वसनीयता पर ही शक हुआ। उन्हें लगा की सुपरनोवा की प्रकाश दीप्ति किसी गैस या धूल के बादल के कारण कम हो सकती है या यह भी हो सकता है कि सुपरनोवा की प्रकाश दीप्ति के बारे में वैज्ञानिकों का अनुमान ही गलत हो। लेकिन उपलब्ध आँकड़ों को सावधानी पूर्वक जांचने के बाद पता चला कि कोई रहस्यमय बल का अस्तित्व जरूर है जिसे आज हम श्याम ऊर्जा (Dark Energy) कहते है।

वैसे यह विचार एकदम नया नहीं है। आईंस्टाईन ने अपने सापेक्षता वाद के सिद्धांत (Theory of Relativity) मे एक प्रति गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को दर्शाने वाला बल ब्रह्मांडीय स्थिरांक (Cosmological Constant) का समावेश किया है। लेकिन आईन्स्टाईन खुद और बाद में अन्य विज्ञानी भी मानते थे कि यह ब्रह्मांडीय स्थिरांक(Cosmological Constant) एक गणितिय सरलता के लिये ही है जिसका वास्तविकता से काफी कम रिश्ता है। 1990 तक किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह ब्रह्मांडीय स्थिरांक एक सच्चाई भी हो सकता है।

दक्षिण केलीफोर्निया विश्व विद्यालय की वर्जीनिया ट्रीम्बल कहती है
“श्याम ऊर्जा को प्रति गुरुत्वाकर्षण कहना सही नहीं है। यह बल गुरुत्वाकर्षण के विपरीत कार्य नहीं करता है। यह ठीक वैसे ही व्यवहार करता है जैसे सापेक्षता वाद के सिद्धांत के उसे अनुसार उसे करना चाहिये। सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार इस बल का दबाव ऋणात्मक है।”

उनके अनुसार
“ मान लिजिये ब्रह्मांड एक बड़ा सा गुब्बारा है। जब यह गुब्बारा फैलता है, तब विस्तार से इस श्याम ऊर्जा का घनत्व कम होता है और गुब्बारा थोड़ा और फैलता है। ऐसा इस लिये कि श्याम ऊर्जा से ऋणात्मक दबाव (2) उत्पन्न होता है। जबकि गुब्बारे के अंदर यह गुब्बारे को खींचने की कोशिश कर रहा है, घनत्व जितना कम होगा यह गुब्बारे को अंदर की ओर कम खिंच पायेगा जिससे विस्तार और ज्यादा होगा। यही प्रक्रिया ब्रह्मांड के विस्तार में हो रही है।”

सुपरनोवा का उदाहरण यह बताता है कि ब्रह्मांड के विस्तार का त्वरण(acceleration) 5 खरब वर्ष पहले शुरू हुआ था। उस समय आकाशगंगाये इतनी दूरी पर जा चुकी थी कि गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव से श्याम ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा हो चुका था।(ध्यान रहे गुरुत्वाकर्षण बल विभिन्न पिण्डो अपनी तरफ खिंचता है, श्याम ऊर्जा वही उन्हे एक दूसरे से दूर ले जाती है।) उस समय के पश्चात श्याम ऊर्जा के प्रभाव से ब्रह्मांड के विस्तार की गति बढ़ते जा रही है। अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह गति अनिश्चित काल के लिये बढ़ते जायेगी। इसका मतलब यह है कि आज की तुलना में खरबों वर्षों बाद हर आकाशीय पिंड एक दूसरे तेज और तेज दूर होते जायेगा और हम अकेले रह जायेंगे।

श्याम ऊर्जा के इस नये सिद्धांत ने वैज्ञानिकों को थोड़ा निराश किया है, उन्हें एक अप्रत्याशित और एकदम नये ब्रह्मांड की अवधारणा को स्वीकारना पड़ा है। वे पहले ही एक श्याम पदार्थ (Dark Matter) की अवधारणा को मान चुके है। आज की गणना के अनुसार यह श्याम पदार्थ, वास्तविक पदार्थ से कहीं ज्यादा है। यह एक ऐसा पदार्थ है जिसे आज तक किसी प्रयोगशाला में महसूस नहीं किया गया है लेकिन इसके होने के सबूत पाये गये है। अब श्याम ऊर्जा का आगमन जख्म पर नमक छिड़कने के समान है।

अंतरिक्ष विज्ञानीयो के अनुसार ब्रह्मांड तीन चीजों से बना है साधारण पदार्थ, श्याम पदार्थ और श्याम ऊर्जा। हम सिर्फ साधारण पदार्थ के बारे में जानते है। ब्रह्मांड का 90-95% भाग ऐसे दो पदार्थों से बना है जिसके बारे में कोई नहीं जानता , यह सुन कर आप कैसा महसूस करते है ?

क्वांटम भौतिकी को समझने के लिये दो पीढ़ीया लग गयी। यह समय उस विज्ञान के बारे में था जिसे हम प्रयोगशाला में प्रयोग कर के सिद्ध कर सकते थे। एक ऐसे पदार्थ और ऊर्जा को समझना जिसे देखा नहीं जा सकता, प्रयोगशाला में बनाया नहीं जा सकता कितना कठिन है ?

लेकिन श्याम ऊर्जा ने एक ऐसे रहस्य को सुलझा दिया है जो ब्रह्मांडीय विकिरण ने उत्पन्न किया था। ब्रह्मांडीय विकिरण की तीव्रता के विचलन पर हाल ही के प्रयोगों से प्राप्त आंकडे ब्रह्मांड के अनंत विस्तार के सिद्धांत का प्रतिपादन करते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों के लिये इस विस्तार के पीछे कारणीभूत बल एक पहेली था, श्याम ऊर्जा शायद इसी का हल है।

श्याम ऊर्जा का अस्तित्व चाहे किसी भी रूप मे गणना की गयी ब्रह्मांड की ज्यामिती और ब्रह्मांड के कुल पदार्थ की मात्रा के संतुलन के लिये जरूरी है। ब्रह्मांडीय विकिरण (cosmic microwave background (CMB)), की गणना यह संकेत देती है की ब्रह्मांड लगभग सपाट(Flat) है। ब्रह्मांड के इस आकार के लिये , द्रव्यमान और ऊर्जा का अनुपात एक निश्चित क्रान्तिक घनत्व(Critical Density) के बराबर होना चाहिये। ब्रह्मांड के कुल पदार्थ की मात्रा (बायरान और श्याम पदार्थ को मिला कर), ब्रह्मांडीय विकिरण की गणना के अनुसार क्रान्तिक घनत्व का सिर्फ 30% ही है। इसका मतलब यह है कि श्याम ऊर्जा ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान का 70% होना चाहीये।

हाल के अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि ब्रह्मांड का निर्माण 74% प्रतिशत श्याम ऊर्जा से, 22% श्याम पदार्थ से और सिर्फ 4% साधारण पदार्थ से हुआ है। और हम इसी 4% साधारण पदार्थ के बारे में जानते है।

श्याम ऊर्जा की प्रकृति एक सोच का विषय है। यह समांगी, कम घनत्व का बल है जो गुरुत्वाकर्षण के अलावा किसी और मूलभूत बलों (3) से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है। इसका घनत्व काफी कम है लगभग 10-29 g/cm3। इसकी प्रयोगशाला में जांच लगभग असंभव ही है।

श्याम ऊर्जा को समझने के लिये सबसे ज्यादा मान्य सिद्धांत है ब्रह्मांडीय स्थिरांक सिद्धांत:
यह आईन्स्टाईन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत है। यह एक दम सरल है, इसके अनुसार अंतराल मे (Volume of Space) मे एक अंतस्थ मूलभूत ऊर्जा होती है। यह एक ब्रह्मांडीय स्थिरांक है जिसे लैम्डा कहते है। द्रव्यमान और ऊर्जा का ये आईन्सटाईन के समीकरण e = mc2 के द्वारा संबंधित है, इससे यह साबित होता है कि ब्रह्मांडीय स्थिरांक पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव होना चाहिये। इसे कभी कभी निर्वात ऊर्जा (Vacuum Energy) भी कहते है क्योंकि यह निर्वात की ऊर्जा का घनत्व है। वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार ब्रह्मांडीय स्थिरांक का मूल्य 10-29 g/cm3 है।

ब्रह्मांडीय स्थिरांक एक ऋणात्मक दबाव वाला बल है जो अपने ऊर्जा घनत्व के बराबर होता है, इसी वजह से यह ब्रह्मांड के विस्तार को त्वरण देता है।

श्याम ऊर्जा का ब्रह्मांड के भविष्य पर प्रभाव


जैसा कि हम पहले देख चुके है सुपरनोवा का उदाहरण यह बताता है कि ब्रह्मांड के विस्तार का त्वरण (acceleration) 5 खरब वर्ष पहले शुरु हुआ था। इसके पहले यह सोचा जाता था कि ब्रह्मांड के विस्तार की गति बायरानीक और श्याम पदार्थ के गुरुत्वाकर्षण के फलस्वरूप कम हो रही है। विस्तारित होते ब्रह्मांड में श्याम पदार्थ का घनत्व का श्याम ऊर्जा की तुलना में ज्यादा तीव्रता से ह्रास होता है। जिससे श्याम ऊर्जा का पलड़ा भारी रहता है। जब ब्रह्मांड का आकार दुगुना हो जाता है श्याम पदार्थ का घनत्व आधा हो जाता है जबकि श्याम ऊर्जा का घनत्व ज्यों का त्यों रहता है। सापेक्षता वाद के सिद्धांत के अनुसार तो यह ब्रह्मांडीय स्थिरांक (Cosmological Constant) है।

यदि विस्तार की गति इस तरह से बढ़ती रही तो आकाशगंगाये ब्रह्मांडीय क्षितिज के पार चली जायेंगी और दिखायी देना बंद हो जायेंगी। ऐसा इस लिये होगा कि उनकी गति प्रकाश की गति से ज्यादा हो जायेगी। यह सापेक्षता वाद के नियम का उल्लंघन नहीं है। पृथ्वी, अपनी आकाशगंगा मंदाकिनी को कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन बाकी का सारा ब्रह्मांड दूर चला जायेगा।

ब्रह्मांड के अंत के बारे कुछ कल्पनायें है जिसमे से एक है कि श्याम ऊर्जा का प्रभाव बढ़ते जायेगा, और एक समय यह केन्द्रीय बलों और अन्य मूलभूत बलों से भी ज्यादा हो जायेगा। इस स्थिती में श्याम ऊर्जा सौर मंडल, आकाशगंगा, कोई भी पिंड से लेकर अणु परमाणु सभी को विखंडित कर देगी। यह स्थिती महा विच्छेद (Big Rip)की होगी।

दूसरी कल्पना महा संकुचन (Big Crunch) की है, इसमें श्याम ऊर्जा का प्रभाव एक सीमा के बाद खत्म हो जायेगा और गुरुत्वाकर्षण उस पर हावी हो जायेगा। यह एक संकुचन की प्रक्रिया को जन्म देगा। अंत मे एक महा संकुचन से सारा ब्रह्मांड एक बिंदु में तबदील हो जायेगा| यह बिंदु एक महा विस्फोट से एक नये ब्रह्मांड को जन्म देगा।

(1) सुपरनोवा - कुछ तारों के जीवन काल के अंत में जब उनके पास का सारा इंधन (हायड्रोजन) जला चुका होता है, उनमें एक विस्फोट होता है। यह विस्फोट उन्हें एक बेहद चमकदार तारे में बदल देता है जिसे सुपरनोवा या नोवा कहते है।

(2) ऋणात्मक दबाव - वह दबाव आसपास के द्रव (जैसे वायु) के दबाव से कम होता है।

(3) मूलभूत बल : गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुंबकीय बल, कमजोर केन्द्रीय बल, मजबूत केन्द्रीय बल
reference :-http://hindi.indiawaterportal.org/node/35461

Seven Wonders of the World in hindi

christ the redeemer1.  क्राइस्ट द रिडीमर (Christ the Redeemer): ब्राजील के रियो डि जनेरियो (Rio de Janeiro, Brazil) में पहाड़ी के ऊपर स्थित 130 फुट ऊंची ‘क्राइस्ट द रिडीमर’ (Christ the Redeemer) अर्थात ‘उद्धार करने वाले ईसा मसीह’ की मूर्ति दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति है. यह मूर्ति कंक्रीट और पत्थर से बनाई गई है. यह ईसा मसीह की इस संसार में सबसे बड़ी मूर्ति है. इसका निर्माण 1922 से 1931 के बीच हुआ. यह बहुत ही नवीन है. रात के समय इसका नजारा अद्वितीय होता है.

great wall of china2. चीन की दीवार (Great Wall of China)चीन ने अपनी सुस्रक्षा के लिए अपनी सभी सीमाओं को एक दीवार से घेर दिया था जिसे चीन की दीवार कहते हैं. यह दीवार 5वीं सदी ईसा पूर्व में बननी चालू हुई थी और 16 वीं सदी तक बनती रही. यह चीन की उत्तरी सीमा पर बनाई गयी थी ताकि मंगोल आक्रमणकारियों को चीन के अंदर आने से रोका जा सके. यह संसार की सबसे लम्बी मानव निर्मित रचना है जो लगभग 4000 मील (6,400 किलोमीटर) तक फैली है. इसकी सबसे ज्यादा ऊंचाई 35 फुट है जो इसे सुरक्षा देती है. यह दीवार इतनी चौड़ी है कि इस पर 5 घुड़सवार या 10 पैदल सैनिक गश्त लगा सकते हैं.


petra of jordan3. जार्डन का पेट्रा’ (Petra)ऐतिहासिक शहर पेट्रा अपनी विचित्र वास्तुकला के लिए दुनिया के सात अजूबों में शामिल है. यहां तरह तरह की इमारतें है जो लाल बलुआ पत्थर से बनी हैं और सब पर बेहतरीन नक्काशी की गई है. इसमें 138 फुट ऊंचा मंदिर, नहरें, पानी के तालाब तथा खुला स्टेडियम है. ‘पेट्रा’ जॉर्डन के लिए विशेष महत्व रखता है क्यूंकि यह उसकी कमाई का जरिया है. ‘पेट्रा’ पर्यटन के लिहाज से जॉर्डन के लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है.



taj mahal4. ताजमहल (Tajmahal)दुनिया में प्यार से प्यारा और खूबसूरत एहसास कुछ नहीं होता. प्यार की इसी खूबसूरती को इमारत की शक्ल दी भारत के मुगल बादशाह शाहजहां ने. शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया था. यह 1632 में बना और 15 साल में पूरा हुआ. उसने अपने जीवन के अंतिम दिन कैद में से ताजमहल को देखते हुए बिताए थे. यह खूबसूरत गुंबदों वाला महल चारों तरफ बगीचों से घिरा है. क्षितिज पर इसके ताज के आकार के अलावा कुछ नजर नहीं आता और मुगल शिल्पकला का यह सबसे बढ़िया उदाहरण माना जाता है.

collessom of rome5.  रोम का कॉलोसियम (Colosseum of Rome) : यह एक विशाल खेल स्टेडियम है. जिसे लगभग 70 सदी में सम्राट वेस्पेसियन (Vespasian) ने बनाना चालू किया था. इसमें 50,000 तक लोग इकट्‌ठे होकर जंगली जानवरों और गुलामों की खूनी लड़ाइयों के खेल देखते थे. इस स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते थे. इस स्टेडियम की नकल करना आज तक नामुमकिन है. इंजीनियरों के लिए अब तक यह एक पहेली बना हुआ है.

macchu picchu6.  माचू पिच्चू (Machu Picchu): 15वीं शताब्दी में सतह से 2430 मीटर ऊपर यानि एक पहाड़ी के ऊपर बने एक शहर में रहना और उस शहर को बनाना अपने आप में अजूबा ही है. दक्षिण अमरीका में एंडीज पर्वतों के बीच बसा ‘माचू पिच्चू शहर’ पुरानी इंका सभ्यता का सबसे बड़ा उदाहरण है. माना जाता है कि कभी यह नगरी संपन्न थी पर स्पेन के आक्रमणकारी अपने साथ चेचक जैसी बीमारी यहां ले आए जिससे यह शहर पूरी तरह तब

Chichen-Itza7.  चिचेन इत्जा (Chichen Itza)मेक्सिको में बसी चिचेन इत्जा नामक यह इमारत दुनिया में माया सभ्यता के गौरवपूर्ण काल की गाथा गाती है. उस समय के कुशल कारीगरों की मेहनत को यह इमारत अपने आप में संजोयी हुई है. शहर के बीचोबीच कुकुलकन का मंदिर है जो 79 फीट की ऊंचाई तक बना है. इसकी चार दिशाओं में 91 सीढ़ियां हैं. प्रत्येक सीढ़ी साल के एक दिन का प्रतीक है और 365 वां दिन ऊपर बना चबूतरा है.

mayan calendar in hindi

                                              2012
क्या है माया सभ्यता ?
अमेरिका की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक माया सभ्यता को इस प्रलय या महाविनाश के पीछे का मुख्य कारण माना जा रहा था. यह 300 से लेकर 900 ई के बीच मैक्सिको, पश्चिमी होंडूरास और अल सल्वाडोर के बीच चली आ रही पुरानी सभ्यता रही है. इसी सभ्यता के अनुसार दुनियाभर के कैलेंडर चले आ रहे हैं लेकिन इसमें 21 दिसंबर के बाद की किसी भी तारीख का जिक्र नहीं है, जिसकी वजह से माना जा रहा था कि इस दिन पूरी दुनिया समाप्त हो जाएगी. यह कैलेंडर इतना सटीक है कि आज के सुपर कंप्यूटर भी उसकी गणनाओं में सिर्फ 0.06 तक का ही फर्क निकाल सके हैं.

दरअसल माया सभ्यता द्वारा बनाया गया कैलेंडर 5 चरणों में विभाजित है. इसके एक चरण में हजारों सालों की तारीखें समाहित हैं और पांचवें चरण की आखिरी तारीख है 21 दिसंबर, 2012. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो माया कैलेंडर खत्म हो रहा है जिसका अर्थ यह है कि दुनिया का आखिरी दिन 21 दिसंबर, 2012 है
नास्त्रेदमस और माया सभ्यता द्वारा की गई भविष्यवाणी को आधार बताकर पिछले काफी समय से दुनिया का अंत होने जैसी बातें की जा रही हैं, वहीं ग्वाटेमाला के जंगलों में मिले माया सभ्यता से जुड़े एक अज्ञात संस्करण में यह भी खुलासा हुआ है कि मानव सभ्यता की दुहाई देकर जहां इस वर्ष दुनिया का अंत होने की भविष्यवाणियां की जा रही थीं, वहीं ग्वाटेमाला के जंगलों में मिले माया कैलेंडर के एक अज्ञात संस्करण से खुलासा हुआ है कि अगले कई अरब वर्षों तक पृथ्वी पर मानव सभ्यता के अंत को समाप्त कर देने वाली कोई प्रलय या आपदा नहीं आएगी.

नासा के शीर्ष वैज्ञानिकों का भी यही कहना है कि 21 दिसंबर, 2012 को किसी भी तरह से कुछ ऐसा नहीं होगा जो मानव का विनाश कर देने वाला होगा. अपनी वेबसाइट में भी नासा ने यही कहा है कि पिछले चार अरब सालों से भी अधिक समय से पृथ्वी जस की तस सक्रिय है और आगे भी वैज्ञानिकों को किसी भी खतरे की कोई जानकारी नहीं है. वैज्ञानिकों ने बताया है कि समुर सभ्यता के समय खोजे गए एक संभावित ग्रह निबिरु के पृथ्वी से टकरा जाने की अफवाह के कारण इस खबर को बल मिला कि 2012 में पृथ्वी का विनाश होगा लेकिन यह सब कोरी अफवाह है.
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माया सभ्यता, माया लोगों द्वारा विकसित एक मेसोअमेरिकन सभ्यता था माया चित्रलिपि स्क्रिप्ट, कलमबुस से पहले अमेरिका के ही जाना जाता है पूरी तरह से विकसित लेखन प्रणाली, साथ ही साथ अपनी कला, वास्तुकला के लिए, और गणित और खगोल विज्ञान प्रणालियों के लिए उल्लेख किया। दक्षिणी मेक्सिको, ग्वाटेमाला और बेलिज के सभी, और होंडुरास और अल सल्वाडोर के पश्चिमी भागों शामिल है कि एक क्षेत्र में विकसित की माया सभ्यता। इस क्षेत्र युकाटन प्रायद्वीप, और दक्षिणी ग्वाटेमाला भर में और उसके बाद अल साल्वाडोर में चियापास के मैक्सिकन राज्य से चल सिएरा Madre के हाइलैंड्स, और प्रशांत तटीय मैदान के दक्षिणी तराई को शामिल उत्तरी निचले क्षेत्रों के होते हैं।

पुरातन काल से पहले 2000 तक ई.पू., कृषि के क्षेत्र में पहले के घटनाक्रम और जल्द से जल्द गांवों में देखा था। पुराप्रचीन अवधि (सी। 250 ईस्वी से 2000 ईसा पूर्व) माया क्षेत्र में पहली जटिल समाज की स्थापना, और मक्का, सेम, स्क्वैश, और मिर्च मिर्च सहित माया आहार के प्रधान फसलों की खेती को देखा। पहले माया शहरों 750 ईसा पूर्व के आसपास विकसित की है, और 500 ई.पू. से इन शहरों विस्तृत प्लास्टर facades के साथ बड़े मंदिरों सहित स्मारकीय वास्तुकला के पास थी। Hieroglyphic लेखन 3 सदी ईसा पूर्व से माया क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा रहा था। देर पुराप्रचीन में बड़े शहरों में से एक नंबर पेटेन बेसिन में विकसित की है, और Kaminaljuyu ग्वाटेमेले हाइलैंड्स में प्रमुखता से गुलाब। 250 ईस्वी के आसपास शुरू, शास्त्रीय अवधि काफी हद तक माया लांग गणना तिथियों के साथ मूर्ति स्मारकों जुटाने थे जब के रूप में परिभाषित किया गया है। इस अवधि में माया सभ्यता के एक जटिल व्यापार नेटवर्क से जुड़े हुए शहर राज्यों की एक बड़ी संख्या को विकसित देखा। निचले माया क्षेत्र के दो महान प्रतिद्वंद्वियों, टिकल और Calakmul में, शक्तिशाली बन गया। शास्त्रीय अवधि भी माया वंशवादी राजनीति में टियोतिहुआकैन के केंद्रीय मैक्सिकन शहर के दखल देने से हस्तक्षेप देखा। 9 वीं सदी में, आपसी युद्ध में जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय माया क्षेत्र में एक व्यापक राजनीतिक पतन, शहरों का परित्याग, और जनसंख्या के उत्तर की ओर शिफ्ट किया गया था। उत्तर प्राचीन काल की अवधि के उत्तर में चिचेन इत्जा की वृद्धि, और ग्वाटेमेले हाइलैंड्स में आक्रामक K'iche 'राज्य का विस्तार देखा। 16 वीं सदी में, स्पेनिश साम्राज्य मेसोअमेरिकन क्षेत्र उपनिवेश, और अभियानों की एक लंबी श्रृंखला 1697 में पिछले माया शहर के पतन को देखा।

शास्त्रीय अवधि नियम मनुष्यों और अलौकिक दायरे के बीच एक मध्यस्थ के रूप में काम किया, जो "दिव्य राजा" की अवधारणा के आसपास केंद्रित थी। शासन पितृवंशीय था, और बिजली सामान्य रूप से सबसे बड़े पुत्र को पारित होगा। एक भावी राजा भी एक सफल युद्ध नेता होने की उम्मीद थी। एक राज्य की सटीक राजनीतिक मेकअप शहर राज्य के लिए शहर-राज्य से अलग हालांकि माया राजनीति, संरक्षण की एक बंद व्यवस्था का वर्चस्व था। देर क्लासिक, अभिजात वर्ग को काफी दिव्य राजा के अनन्य सत्ता में इसी कमी है, जिसके परिणामस्वरूप वृद्धि हुई थी। माया सभ्यता अत्यधिक परिष्कृत artforms विकसित की है, और माया की लकड़ी, जेड, ओब्सीडियन, चीनी मिट्टी की मूर्ति पत्थर के स्मारकों, प्लास्टर, और पतले चित्रित भित्ति चित्र सहित विनाशशील और गैर विनाशशील दोनों सामग्री, का उपयोग करते हुए कला बनाया।


माया शहरों संयोग से विस्तार करने के लिए जाती थी, और शहर के केंद्र आवासीय जिलों में से एक अनियमित फैलाव से घिरा वाणिज्यिक और प्रशासनिक परिसरों, का कब्जा हो जाएगा। एक शहर के विभिन्न भागों अक्सर causeways से जोड़ा जाएगा। शहर के प्रमुख वास्तुकला खगोलीय प्रेक्षण के लिए गठबंधन महलों, पिरामिड के मंदिरों, औपचारिक ballcourts, और संरचनाओं के शामिल। माया अभिजात वर्ग साक्षर थे, और कलमबुस से पहले अमेरिका में सबसे उन्नत था कि चित्रलिपि लेखन की एक जटिल प्रणाली विकसित की है। माया बाकी स्पेनिश द्वारा नष्ट कर दिया गया है, केवल तीन निर्विरोध उदाहरण बने हुए हैं, जिनमें से screenfold किताबें, में अपने इतिहास और अनुष्ठान ज्ञान दर्ज की गई। Stelae और मिट्टी के पात्र पर पाया माया पाठ की एक महान कई उदाहरण भी हैं। माया दुनिया में स्पष्ट शून्य की जल्द से जल्द उदाहरणों में से एक है कि शामिल एक रस्म कैलेंडर इंटरलॉकिंग का अत्यधिक जटिल श्रृंखला है, और कार्यरत गणित का विकास किया। अपने धर्म के एक भाग के रूप में, माया मानव बलि का अभ्यास किया।


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माया कैलेंडर कलमबुस मेसोअमेरिका में इस्तेमाल कैलेंडर की एक प्रणाली है, और ग्वाटेमेले हाइलैंड्स,  वेराक्रूज, ओक्साका और चियापास में कई आधुनिक समुदायों में मेक्सिको। 

माया कैलेंडर के अनिवार्य वापस कम से कम 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के लिए डेटिंग, पूरे क्षेत्र में आम उपयोग में किया गया था, जो एक प्रणाली पर आधारित हैं। यह ऐसी Zapotec और ऑल्मेक, और इस तरह के Mixtec और एज़्टेक कैलेंडर के रूप में समकालीन या बाद में लोगों के रूप में अन्य पहले मेसोअमेरिकन सभ्यताओं, द्वारा नियोजित कैलेंडर के साथ कई पहलुओं को साझा करता है। 

औपनिवेशिक Yucatec खातों में दर्ज़ और स्वर्गीय शास्त्रीय और उत्तर प्राचीन काल शिलालेख से खंगाला के रूप में माया पौराणिक परंपरा के अनुसार, देवता Itzamna अक्सर सामान्य रूप में लेखन और अन्य मूलभूत पहलुओं के साथ-साथ पैतृक माया कैलेंडर प्रणाली का ज्ञान लाने का श्रेय जाता है माया संस्कृति। 
माया कैलेंडर कई चक्र या अलग अलग लंबाई की गिनती के होते हैं। 260 दिन की गिनती, Tzolkin Haab के रूप में जाना एक 365 दिन अस्पष्ट सौर वर्ष के साथ जोड़ दिया गया था  '52 Haab के लिए स्थायी एक तुल्यकालन चक्र फार्म करने के लिए'। Tzolkin, या Tzolk'in के रूप में विद्वानों के लिए जाना जाता है कहा जाता है कैलेंडर दौर। कैलेंडर दौर ग्वाटेमेले हाइलैंड्स में कई समूहों द्वारा उपयोग में अब भी है। 

एक अलग कैलेंडर समय की लंबी अवधि को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया गया था, और कैलेंडर तिथियों के शिलालेख के लिए (यानी, एक घटना दूसरों के संबंध में हुई है जब की पहचान)। इस लंबी गिनती है। यह एक पौराणिक प्रारंभिक बिंदु के बाद से दिन के एक गिनती है।  माया शोधकर्ताओं के महान बहुमत से स्वीकार लॉन्ग काउंट और पश्चिमी कैलेंडर के बीच संबंध के अनुसार (गुडमैन-मार्टिनेज-थॉम्पसन, या जीएमटी के रूप में जाना जाता है, सहसंबंध) , इस प्रारंभिक बिंदु 11 अगस्त, जूलियन कैलेंडर में 3114 proleptic ग्रेगोरियन कैलेंडर में ईसा पूर्व या 6 सितम्बर (खगोलीय -3113) के बराबर है। जीएमटी सहसंबंध 1905 में यूसुफ गुडमैन से पहले परस्पर संबंधों का आधार (11 अगस्त) पर 1935 में जॉन एरिक सिडनी थॉम्पसन द्वारा चुना गया था, जुआन मार्टिनेज 1926 में Hernández (12 अगस्त), और 1927 में थॉम्पसन खुद को (13 अगस्त)। [8अपने रैखिक प्रकृति से, लॉन्ग काउंट दूर अतीत या भविष्य में किसी भी तारीख का उल्लेख करने के लिए बढ़ाया जा रहा करने में सक्षम था। यह कैलेंडर प्रत्येक स्थिति के दिनों की संख्या की एक बढ़ती हुई कई signified जिसमें एक स्थितीय अंकन प्रणाली का उपयोग शामिल किया गया। माया अंक प्रणाली (यानी, आधार-20), और एक विशिष्ट स्थान की प्रत्येक इकाई यह पहले जो स्थिति का 20 गुना इकाई का प्रतिनिधित्व अनिवार्य रूप से vigesimal था। एक महत्वपूर्ण अपवाद के बजाय × 20, 18 या 360 दिनों का प्रतिनिधित्व किया जो दूसरे क्रम जगह मूल्य के लिए बनाया गया था, और अधिक बारीकी से 20 × 20 = 400 दिनों की तुलना में सौर वर्ष होगा approximating। यह लंबे समय से गणना के चक्र सौर वर्ष से सम्बंधित नहीं हैं फिर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।


कई माया लांग गणना शिलालेख एक छह की श्रृंखला और रात के नियमों के नौ ऑफ लॉर्ड्स में जो चंद्रमा चरण के बारे में जानकारी, वर्तमान चांद्रमास की संख्या प्रदान करता है जो एक अनुपूरक श्रृंखला, होते हैं।

2012 में नहीं, 7 हजार साल बाद समाप्‍त होगी दुनिया

                             Tsunami
वाशिंगठन। जो लोग इस बात को लेकर परेशान रहते थे कि 2012 के अंत के दुनिया समाप्‍त हो जायेगी तो उनके लिये एक खुशखबरी है। दुनिया को खत्‍म होने में 7 हजार साल लगेंगे। अमेरिकी पुरातत्‍वविदों ने इस बात का खुलासा किया है। दरअसल पुरातत्वविदों ने माया सभ्यता का सबसे प्राचीन खगोलीय कैलेंडर खोज निकाला है। यह कैलेंडर उन्‍हें ग्वाटेमाला के उत्तरी भाग में खुदाई के दौराना मिला है। कैलेंडर एक इमारत की दीवारों पर तालिकाओं के रूप में मिला है। इस कैलेंडर में इस बात का कोई भी संकेत नहीं है कि दुनिया का अंत करीब है। कैलेंडर में सौर और चंद्र वर्षों का उल्लेख है और आगामी सात हजार वर्षों में चंद्र ग्रहणों तथा मंगल और शुक्र ग्रहों के मिलाप की तिथियों का वर्णन किया गया है। पुरातत्वविदों का कहना है कि यह कैलेंडर नौंवी सदी का है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कैलेंडर कहता है कि दुनिया खत्म होने में अभी कम से कम 7 हजार वर्ष लगेंगे। हालांकि माया सभ्यता के अन्य कैलेंडरों में इस तरह व्याख्या की जाती रही है कि दुनिया वर्ष 2012 में खत्म हो जाएगी। इससे पहले वैज्ञानिकों ने भी वर्ष 2012 में पृथ्वी पर प्रलय आने की आशंकाओं को निराधार बताया था। अटकलों में कहा जा रहा है कि वर्ष 2012 में अधिनव तारा का विस्फोट होगा, जिससे सूर्य के पूरे जीवन के बराबर ऊर्जा निकलेगी और इससे पृथ्वी पर जीवन प्रभावित हो सकता है। लेकिन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की व्यापकता और प्रकाश वर्ष का हवाला देते हुए बताया कि कोई भी तारा पृथ्वी के इतने करीब नहीं है कि वह उसे नुकसान पहुंचा सके। नासा की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि पृथ्वी के सबसे नजदीक गामा किरणें हैं, जो पृथ्वी से 1.3 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

Monday, 20 July 2015

Bermuda tringle |बरमूडा त्रिकोण एक रहस्य!


अथाह और ऊँचे आसमान में अजीबो-गरीब घटनाक्रम की बातें पहले भी सुनने में आई हैं, लेकिन का एक हिस्सा ऐसा है, जिसकी गुत्थी आज तक कोई नहीं सुलझा सका है। पूर्वी-पश्चिम अटलांटिक महासागर मेंहै। यह भुतहा त्रिकोण बरमूडा, मयामी, फ्लोरिडा और सेन जुआनस से मिलकर बनता है।



इस इलाके में आज तक अनगिनत समुद्री और हवाई जहाज आश्चर्यजनक रूप से गायब हो गए हैं और लाख कोशिशों के बाद भी उनका पता नहीं लगाया जा सका है। कुछ लोग इसे किसी परालौकिक ताकत की करामात मानते हैं, तो कुछ को यह सामान्य घटनाक्रम लग रहा है। यह विषय कितना रोचक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस पर कई किताबें और लेख लिखे जाने के साथ ही फिल्में भी बन चुकी हैं।

सदियों से चर्चा का विषय रहे इस त्रिकोण के क्षेत्रफल को लेकर भी तरह-तरह की बातें कही और लिखी गई हैं। इस मसले पर शोध कर चुके कुछ लेखकों ने इसकी परिधि फ्लोरिडा, बहमास, सम्पूर्ण केरेबियन द्वीप तथा महासागर के उत्तरी हिस्से के रूप में बाँधी है। कुछ ने इसे मैक्सिको की खाड़ी तक बढ़ाया है। शोध करने वालों में इसके क्षेत्रफल को लेकर सर्वाधिक चर्चा हुई है।

इस क्षेत्र में हवाई और समुद्री यातायात भी बहुतायत में रहता है। क्षेत्र की गणना दुनिया की व्यस्ततम समुद्री यातायात वाले जलमार्ग के रूप में की जाती है। यहाँ से अमेरिका, यूरोप और केरेबियन द्वीपों के लिए रोजाना कई जहाज निकलते हैं। यही नहीं, फ्लोरिडा, केरेबियन द्वीपों और दक्षिण अमेरिका की तरफ जाने वाले हवाई जहाज भी यहीं से गुजरते हैं। यही कारण है कि कुछ लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि इतने यातायात के बावजूद कोई जहाज अचानक से गायब हो जाए। ऐसे में कोई दुर्घटना होती है तो किसी को पता चल ही जाता है। 

  विमान चालकों को यह कहते सुना गया था कि हमें नहीं पता हम कहाँ हैं। पानी हरा है और कुछ भी सही होता नजर नहीं आ रहा है। जलसेना के अधिकारियों के हवाले से लिखा गया था कि विमान किसी दूसरे ग्रह पर चले गए।      
मशहूर अन्वेषक क्रिस्टोफर कोलंबस पहले लेखक थे, जिन्होंने यहाँ के अजीबो-गरीब घटनाक्रम के बारे में लिखा था। बकौल क्रिस्टोफर- उन्होंने और उनके साथियों ने आसमान में बिजली का अनोखा करतब देखा। उन्हें आग की कुछ लपटें भी दिखाई दीं। इसके बाद समुद्री यात्रा पर निकले दूसरे लेखकों ने अपने लेखों में इस तरह के घटनाक्रम का उल्लेख किया। 

16 सितंबर 1950 को पहली बार इस बारे में अखबार में लेख भी छपा था। दो साल बाद फैट पत्रिका ने ‘सी मिस्ट्री एट अवर बैक डोर’ शीर्षक से जार्ज एक्स. सेंड का एक संक्षिप्त लेख भी प्रकाशित किया था। इस लेख में कई हवाई तथा समुद्री जहाजों समेत अमेरिकी जलसेना के पाँच टीबीएम बमवर्षक विमानों ‘फ्लाइट 19’ के लापता होने का जिक्र किया गया था। 

फ्लाइट 19 के गायब होने का घटनाक्रम काफी गंभीरता से लिया गया था। इसी सिलसिले में अप्रैल 1962 में एक पत्रिका में प्रकाशित किया गया था कि विमान चालकों को यह कहते सुना गया था कि हमें नहीं पता हम कहाँ हैं। पानी हरा है और कुछ भी सही होता नजर नहीं आ रहा है। जलसेना के अधिकारियों के हवाले से लिखा गया था कि विमान किसी दूसरे ग्रह पर चले गए। यह पहला लेख था, जिसमें विमानों के गायब होने के पीछे किसी परालौकिक शक्ति का हाथ बताया गया था। इसी बात को विंसेंट गाडिस, जान वालेस स्पेंसर, चार्ल्स बर्लिट्ज़, रिचर्ड विनर, और अन्य ने अपने लेखों के माध्यम से आगे बढ़ाया।

इस मामले में एरिजोना स्टेट विश्वविद्यालय के शोध लाइब्रेरियन और ‘द बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्रीः साल्व्ड’ के लेखक लारेंस डेविड कुशे ने काफी शोध किया तथा उनका नतीजा बाकी लेखकों के अलग था। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से विमानों के गायब होने की बात को गलत करार दिया। कुशे ने लिखा कि विमान प्राकृतिक आपदाओं के चलते दुर्घटनाग्रस्त हुए। इस बात को बाकी लेखकों ने नजरअंदाज कर दिया था। 

ऑस्ट्रेलिया में किए गए शोध से पता चला है कि इस समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से में मिथेन हाईड्राइड की बहुलता है। इससे उठने वाले बुलबुले भी किसी जहाज के अचानक डूबने का कारण बन सकते हैं। इस सिलसिले में अमेरिकी भौगोलिक सर्वेक्षण विभाग (यूएसजीएस) ने एक श्वेतपत्र भी जारी किया था। यह बात और है कि यूएसजीएस की वेबसाइट पर यह रहस्योद्‍घाटन किया गया है कि बीते 15000 सालों में समुद्री जल में से गैस के बुलबुले निकलने के प्रमाण नहीं मिले हैं। इसके अलावा अत्यधिक चुंबकीय क्षेत्र होने के कारण जहाजों में लगे उपकरण यहाँ काम करना बंद कर देते हैं। इससे जहाज रास्ता भटक जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। 

बहरहाल, तमाम शोध और जाँच-पड़ताल के बाद भी इस नतीजे पर नहीं पहुँचा जा सका है कि आखिर गायब हुए जहाजों का पता क्यों नहीं लग पाया...उन्हें आसमान निगल गया या समुद्र लील गया...दुर्घटना की स्थिति में भी मलबा तो मिलता...ये प्रश्न अनुत्तरित हैं।

Saturday, 18 July 2015

...तो अब कनेक्ट हो जाएंगे इंसानों के दिमाग!

                           ...तो अब कनेक्ट हो जाएंगे मानवी दिमाग!
सोचिए, जिस तरह बहुत सारे कम्प्यूटर इंटरनेट के जरिए आपस में कनेक्टेड हैं, उसी तरह अगर इंसान के दिमागों को आपस में कनेक्ट कर दिया जाए तो क्या इस कनेक्शन को 'ब्रेनेट' कहना उचित नहीं। अगर दो दिमाग एक साथ कनेक्ट कर दिए जाए, तो क्या होगा? दोनों दिमाग आपस में मिलकर अपने-अपने हुनर का प्रयोग किसी इनोवेटिव काम के लिए कर पाएंगे। 'एक से भले दो' और 'दो से भले तीन' वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी।

'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट बताती है कि किस तरह वैज्ञानिकों ने इस आइडिया पर काम करते हुए बहुत सारे बंदरों और चूहों के दिमागों को सफलतापूर्वक आपस में कनेक्ट कर दिया। इस कनेक्शन को 'ऑर्गेनिक कंप्यूटर' या 'ब्रेनेट' का नाम दिया गया। इस स्टडी के लीड ऑथर 'मिकेल निकोलेलिस' ने 'गार्जियन' को बताया कि उन्होंने एक सुपरब्रेन का निर्माण किया, जो एक साथ काम करता था। उन्होंने बताया कि यह रिसर्च बंदरों और चूहों पर किया गया। उन्होंने पाया कि यह 'सुपरब्रेन' मौसम का अनुमान लगाने में सफल रहा।

मिकेल ने उत्साहित होते हुए बताया कि इंसान के दिमाग पर रिसर्च करने के बाद और भी रचनात्मक नतीजे सामने आएंगे अभी तक तो यह परीक्षण चूहों और बंदरों पर ही किया गया। एक दूसरे टेस्ट में तीन बंदरों के दिमागों को वायर ये जोड़ने के बाद उन्हें अलग-अलग कमरों में ले जाया गया। उन्हें स्क्रीन पर दिखने वाले वर्चुअल हाथ को नियंत्रित करने का टास्क दिया गया था। एक समय में एक साथ सोचने से वे स्क्रीन पर सफलतापूर्वक एक जैसा मूवमेंट कर पाए। इस टेस्ट के बाद बंदरों को एक और टास्क दिया गया। इस बार प्रत्येक बंदर को मूवमेंट की केवल एक दिशा को नियंत्रित करना था। वैज्ञानिकों ने देखा कि बंदरों का दिमाग अब भी एक साथ सोच पा रहा था। इस तरह यह टेस्ट भी सफल रहा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसान के दिमाग पर अगर यह प्रयोग सफल होता है तो इसके नतीजे चौंका देने वाले होंगे।

वैज्ञानिक इंसान के दिमाग के लिए ब्रेनेट का इस्तेमाल कब तक कर पाएंगे, यह कह पाना तो मुश्किल है पर यह तो तय है कि अगर ऐसा हो जाता है तो कई सारे दिमाग आपस में अपने क्रिएटिव विचार शेयर कर पाएंगे, और मिलकर कुछ शानदार कर पाने में सफल होंगे।

Friday, 17 July 2015

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मंगल ग्रह पर है एलियन का ताबूत?

मंगल ग्रह पर है एलियन का ताबूत?
न्यूयॉर्क:  उड़नतश्तरी (यूएफओ) की खोज में जुटे वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की सतह पर ऐसी वस्तु देखी है, जो हूबहू एक ताबूत जैसी नजर आती है। द इंक्यूजाइटर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यूट्यूब पर पोस्ट किए गए वीडियो को देखकर पहले तो इस वस्तु के बारे में कुछ पता नहीं लगता, लेकिन नजदीक से देखने पर मालूम होता है कि यह ताबूत जैसी कोई चीज है।
यूएफओ साइटिंग्स डेली के शोधकर्ता स्कॉट वारिग ने कहा, पत्थर की यह वस्तु ताबूत जैसी दिखती है। इसकी लंबाई एक मीटर और ऊंचाई डेढ़ फीट के करीब है। वारिग के अनुसार संभव है कि यह वस्तु कोई चट्टान ही हो, जिसने वक्त के साथ इस तरह का आकार ले लिया हो।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नासा अपने क्यूरियोसिटी रोवर को इस वस्तु के पास भेजकर इसका नजदीक से आंकलन कराएगा। मंगल ग्रह पर पहुंचा नासा का रोवर अब तक वहां से कई महत्वपूर्ण तस्वीरें भेज चुका है।
reference :-http://zeenews.india.com/hindi/science/ufo-watchers-spot-coffin-on-mars/243098