विवेकानंद Quote:-
आप तब तक इश्वर में विस्वा नही कर पाएँगे ,
जबतज की आप अपने आप में विस्वास् नही करते ।
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आपको अपने भीतर से ही विकाश करना होगा होता है।
आपको कोई सीखा नही सकता ,
आपको कोई आध्यात्मिक नही बना सकता ,
आपको सिखाने वाला और कोई नही बल्कि आपकी आत्मा है ।
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यह कभी भी मत भूलिए की आपकी आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है ,
ऐसा सोचना ही पाप है ,अगर कोई पाप है तो यही है,
की यह कहना तुम निर्बल हो या कोई और ।
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मन की दुर्बलता से बढ़कर ,कोई और अधिक भयंकर पाप नही है ।
भय ही पतन और पाप का निश्चित करना है ।
भय ही पतन और पाप का निश्चित करना है ।
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किसी दिन ,जब आपके सामने कोई भी समस्या नहीं आये तो ,
आप समझ लो की आप गलत मार्ग पर चल रहे हो ।
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आदर्श ,अनुशासन ,मर्यादा ,परिश्रमी ,ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना,
किसी का जीबन महान नही बन सकता है ।
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हम भारत के लोग सभी धर्मो में न केबल सहिष्णुता में विस्वास् करते है ,
बरन सभी धर्मो को सच्चा मानकर स्वीकारते भी है ।
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जिसके श्रेष्ठ विचार रहते है ,वह कभी भी अकेले नही रह सकता है
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बस्तुए बल से या धन से खरीदी जा सकती है ,
ज्ञान केबल अध्यन से ही प्राप्त किया जा सकता है ।
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नास्तिक वह है जो अपने में विस्वास् नही रखता है ।
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भगवान बुद्ध :-
तुम्हे अपने क्रोध के लिए सजा नही मिलती है ,
बल्कि तुम्हे अपने क्रोध से ही सजा मिलती है ।
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घृणा से घृणा कभी खत्म नही होती है ,
घृणा केबल प्रेम के द्वारा ही ख़त्म होती है ,
यह एक प्रकर्ति सत्य है ।
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चाहे आप कितनी भी किताबे पढ़ ले ,
कितनी भीअच्छी शब्द सुन ले ,
उनसे कोई आपको फ़ायदा नही ।
जबतक की उनको अपने जीबन में अपनाते नही है ।।
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खुशियो का कोई रास्ता नही है ,बल्कि खुश रहना ही रास्ता है ।
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जिंदगी में आप जो भी करना चाहते हो वो जरूर कीजिये ,
ये मत सोचिये की लोग क्या कहैँगे ।
लोग तो तभी भी कुछ कहते थे ,जब आप कुछ नही करते है ।
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मैं किसी से बेहतर करु ,क्या फर्क पड़ता है ,
मैं किसी का बेहतर करू बहुत फर्क पड़ता है ।
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असली सबाल यह है की ,आप भीतर से क्या हो ,
अगर भीतर गलत हो तो ,जो भी आप करोगे उससे गलत फलित होगा ।
अगर भीतर से अच्छे हो ,तो तुम जो करोगे ,वह सही फलित होगा
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