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Tuesday, 31 May 2016

अच्छी बातें -4


विवेकानंद Quote:-

आप तब तक इश्वर में विस्वा नही कर पाएँगे ,
जबतज की आप अपने आप में विस्वास् नही करते ।
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आपको अपने भीतर से ही विकाश करना होगा होता है।
आपको कोई सीखा नही सकता ,
आपको कोई आध्यात्मिक नही बना सकता ,
आपको सिखाने वाला और कोई नही बल्कि आपकी आत्मा है ।
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यह कभी भी मत भूलिए की आपकी आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है ,
 ऐसा सोचना ही पाप है ,अगर कोई पाप है तो यही है,
 की यह कहना तुम निर्बल हो या कोई और ।
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मन की दुर्बलता से बढ़कर ,कोई और अधिक भयंकर पाप नही है ।
भय ही पतन और पाप का निश्चित करना है ।
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किसी दिन ,जब आपके सामने कोई भी समस्या नहीं आये तो ,
आप समझ लो की आप गलत मार्ग पर चल रहे हो ।
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आदर्श ,अनुशासन ,मर्यादा ,परिश्रमी ,ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना,
 किसी का जीबन महान नही बन सकता है ।
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हम भारत के लोग सभी धर्मो में न केबल सहिष्णुता में विस्वास् करते है ,
बरन सभी धर्मो को सच्चा मानकर स्वीकारते भी है ।
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जिसके श्रेष्ठ विचार रहते है ,वह कभी भी अकेले नही रह सकता है 
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बस्तुए बल से या धन से खरीदी जा सकती है ,
ज्ञान केबल अध्यन से ही प्राप्त किया जा सकता है ।
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नास्तिक वह है जो अपने में विस्वास् नही रखता है ।
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भगवान बुद्ध :-

तुम्हे अपने क्रोध के लिए सजा नही मिलती है ,
बल्कि तुम्हे अपने क्रोध से ही सजा मिलती है ।
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घृणा से घृणा कभी खत्म नही होती है ,
घृणा केबल प्रेम के द्वारा ही ख़त्म होती है ,
यह एक प्रकर्ति सत्य है ।
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चाहे आप कितनी भी किताबे पढ़ ले ,
कितनी भीअच्छी शब्द सुन ले ,
उनसे कोई आपको फ़ायदा नही ।
जबतक की उनको अपने जीबन में अपनाते नही है ।।
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खुशियो का कोई रास्ता नही है ,बल्कि खुश रहना ही रास्ता है ।
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जिंदगी में आप जो भी करना चाहते हो वो जरूर कीजिये ,
ये मत सोचिये की लोग क्या कहैँगे ।
लोग तो तभी भी कुछ कहते थे ,जब आप कुछ नही करते है ।
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मैं किसी से बेहतर करु ,क्या फर्क पड़ता है ,
मैं किसी का बेहतर करू बहुत फर्क पड़ता है ।
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असली सबाल यह है की ,आप भीतर से क्या हो ,
अगर भीतर गलत हो तो ,जो भी आप करोगे उससे गलत फलित होगा ।
अगर भीतर से अच्छे हो ,तो तुम जो करोगे ,वह सही फलित होगा
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Sunday, 29 May 2016

जाने अचार्य चाणक्य की ''चाणक्यनीति " -1

जाने अचार्य चाणक्य की ''चाणक्यनीति "
1)मुर्ख शिष्य को उपदेश देने से , 
कर्कशा स्त्री का भरण पोषण से और दुःखियों का संपर्क रखने से ,
समझदार मनुष्य को भी दुःखी होना परता है

2) जिस मनुष्य की स्त्री अछि नही है ,
 नौकर उत्तर देने वाला है 
,जिस घर में सांप रहता हो ,तो निश्तित है 
,किसी रोज उसकी मुर्त्यु होगी ,

3)अप्पति काल के लिए धन , 
और धन से बढ़कर स्त्री की रक्षा करनी चाहिए ,
 पर धन स्त्री से बढ़कर अपनी रक्षा करनी चाहिए ।

4)जिस देश में ना सम्मान हो न रोजी हो ,
ना कोई भाईबंधु हो ,
 ना विद्या का आगम हो ,
वहा निवेश नहीं करना चाहिए ।

5) जिसमे रोज़ी ,भय ,लज्जा ,उदारता ,और त्यागशीलता ,
ये पांच विधमान न हो ,ऐसी मनुष्य से दोस्ती नहीं करनी चाहिए ।

6)सेबा कार्य उपस्थित होने पर सबको की 
आपत्तिकाल में मित्रो की 
, दुःख में बान्धवो की , 
और धन से नष्ट हो जाने पर स्त्री की परीक्षा की जाती है ।

7) जो ब्यक्ति निश्चत बस्तु को छोड़कर , 
अनिश्चित बस्तु की ओर दोड़ता है ।
तो उसकी निश्चित बस्तु नष्ट हो जाती है , 
और अनिश्चित बस्तु बहले से नष्ट थी।

8) नदियो का ,
सस्त्रधारीको का ,
 सिंह वाले पशु का ,
राजकुल के लोगो का ,
विस्वास नही करना चाहिए ।

9) स्त्री में पुरषो की अपेक्षा दुना आहार , 
चौगुनी लज्जा , 
छः गुणी साहस ,
और आठगुनि वासना रहता है ।

10) झूठ बोलना ,
 एकाएक कोई काम कर बैठना ,
 नखरे करना ,
 मूर्खता करना , 
लालच करना ,
 वपवित्र रहना , 
और निर्दयता का बर्ताव करना ,
ये स्त्री के स्वाभाविक दोष है ।

Saturday, 28 May 2016

अच्छी बातें ......3




जिनकी तुम प्रसंशा करते हो,
 उनके गुणों को अपनाओ और स्वांग भी प्रसंशा के योग बनो ।
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जब आप पैदा हुए थे तो ,तुम रोये थे जबकि पूरी दुनिया ने जस्न मनाया था ।
अपना जीबन ऐसे जियो की, 
तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोये और तुम जस्न मनाये ।
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जबतक आप अपनी समस्या एबं कटनाइयो का वजह दूसरे को मानते हो तो , 
तब तक आप अपनी समस्या एबं कठिनाइयो को नहीं मिटा सकते हो ।
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भीड़ हमेसा उस रस्ते पर चलते है जो रास्ता आसान लगता है ,
इसका मतलब यह नही की भीड़ हमेशा सही रस्ते पर चलता है ,
अपने रास्ते को खुद चुने ,क्योकि आपको आपसे बेहतर कोई नही जनता है..।
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इस दुनिया में असंभव् कुछ नही है, 
हम वो सब कुछ कर सकते है ।
जो हम सोच सकते है और हम वो सोच सकते है ,
जो आज तक हमने नही सोचा ।
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सफलता हमारी परिचय दुनिया को करवाती है ,
और असफ़लता हमे दुनिया का परिचय करवाती है ।
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महानता कभी गिरने में नही ,
बल्कि हर बार गिर के उठने में है ।
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अगर आप समय पर आप अपनी गलती नहीं स्वीकार करते हो तो ,
आप एक और गलती कर बैठते है ।
आप अपनी गलतियों से तभी ही कुछ सिख सकते हो ,
जब आप अपनी गलतियों को स्वीकारते हो ।
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ब्रमांड की सारी सक्तियो पहले से है ,जो हम ही है ।
जो अपनी आँखों हाथों से बंद करके रोते है क़ि कितना अँधेरा है ।
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हम चाहे तो अपने आत्मविस्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य लिख सकते है ।
अगर आपको अपना भाग्य लिखना नही आता तो ,परिस्थितीयों हमारी भाग्य लिख देगी ।
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आप यह नही कह सकते की ,आपके पास समय नही है,
 क्योंकि  आपको भी दिन में उतना समय मिलता है 
,जितना समय एक महान और सफल ब्यक्ति को मिलता है ।
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मुसिबत से भागना ,नई मुसीबतों को नियंत्रण देने के सामान है ।
जीबन में समय समय पर मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
यही जीवन का सत्य है ,
क्योंकि एक शांत समुद्र में नाविक कभी कुशल नाविक नही बन सकता है।
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दूर से हमें आगे सारे रास्ते बन्द नजर आते है ,
क्योंकि सफलता के रास्ते हमारे लिए तभी खुलते है ,
जब हम उसके बिलकुल समीप पहुच जाते है ।
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जीवन में कठिनाइयों हमें बर्बाद करने नहीं आती है ,
बल्कि यह हमारी छुपी हुई ,सामर्थ और सक्तियों को बहार निकलने में मदद करती है ।
कठिनाइयों को यह जान लेने दो की आप उससे भी कठिन हो ।
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बारीश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है ।
बल्कि बाज बादलों के ऊपर उड़कर बदलों को नकार देते है ।
समस्याएं सभी के लिए सामान है ,
लेकिन आपका देखने का नजरिया इनमे आपको यूनिक बनाता है।
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Friday, 27 May 2016

अच्छी बातें........2

                                 
  अगर सही समय पर सही काम नही करते हो,
   तो आपको असफलता मिलेगी ।
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   आप वह है जो आप रहा चुके हो ,
   पर आप वह होंगे जो आज आप करोगे ।
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 जिस ब्यक्ति ने कुछ गलती किये ही नही ,
 उसने कभी कुछ नया करने की कोशिस नही किये ।
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     ईश्वर के सामने हम सभी बराबर बुद्धिमान है ,
             और एक बराबर मुर्ख भी।
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    एक सफल ब्यक्ति बनाने की कोशिस मत करो बल्कि ,
      अपने मूल्यों पर चलने वाले ब्यक्ति बनो ।
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 अज्ञानी होना उतनी श्रम की बात नही है ,
   जितना की सिखने की इच्छा नक रखना ।
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कोई ब्यक्ति अपने कार्य से महान होता है ,
       न की जन्म से ।
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     जो ब्यक्ति जीबन में समय का ध्यान नही रखता ,
      उसके हाथ असफलता और पछतावा ही लगता हैं ।
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  दुनिया में महान बनाना , सिर्फ महान विचार सोचने से होता है
   अगर आप साकारत्मक विचार सोचते हो तो ,
     और कोई बड़ा काम करना चाहते हो तो ,
      उस बड़े काम को अंजाम तक पहुचने के लिए,
      आपको hardworking करने पड़ेंगे ।
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 दिमाग सिर्फ सोच सकता है ,
  जो की आपके शारीर के अंतिरिक अंग है ,
       पर उस सोचे हुए महान काम को
 सिर्फ आप अपने हाथ, पैर ,और मुँह के द्वारा ही पूरा   कर पाओगे ,
  मतलब  शारीर के बाहरी अंग का प्रयोग करना होगा ।
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      दुनिया में आपको सोचने पर कोई भी प्रतिबंध नही लगा सकता है
          और बांकी पर लग सकता है ,
          और कभी कभी बोलने का अधिकार होते हुए भी,
           आपको पूरी बात बोलने के मौका नही दिया जायेगा  ।
     अतः आपको सकरत्मक सोच कर उसे कर के दिखाना होगा ।
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     दुनिया वालो को सिर्फ बोल के आप नही समझा सकते हो ।
          वो आपका मज़ाक बनायेअंगे ।
          उसके लिए आपको कर के दिखाना होगा ।
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     आपको शिक्षक से मदद मिल सकती है ,
       लेकिन आपको बहुत कुछ अपने आप सीखना होगा प्रकृति से ।
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मन के बस में न रहे ,
बल्कि मन को अपने बस में रखे ।
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   जो मन को जित लेता है ,
   उसपे कभी नकारत्मक विचार हावी नही हो पते है ।

Wednesday, 25 May 2016

अच्छी बातें......1



  किसी भी चीज़ को इसलिए नही मनो की ,तुम्हारे दादा जी ने कहा है।
   किसी भी चीज पर इसलिए यकिन नही करो की तुम्हारे शिक्षक ने कहा है। 
    किसी भी चीज पर इसलिए विस्वास नही करो की तुम्हारे शास्त्र में लिखा है ।
    हर चीज को जानो परको और सत्य पाओ तब उसपर विस्वास करो ।
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साइंस ,धर्म ,और कल्चर हमेशा चुनौती देता है ।
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लक्ष्य तक पहुचने के दो रास्ते होते है ,एक कठिन और एक आसान ,
      सरल रास्ते आपको बार बार रुलाएगा 
    जो की आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने नही देगा ,
         और रास्ते से भटका देगा ।
      कठिन रास्ते आपको एक बार रुलाएगा 
   और आपको अपने लक्ष्य तक पंहुचा देगा ।
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सच्चा योद्धा ना बल से बनता है,
     न ही शास्त्र से बनता है , 
      वो तो अपने बुद्धि से बनता है।
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 जब घर के दिवार में दीमक लग जाये तो ,
   छत को बचने के लिए दीमक को मिटाना पड़ेगा ।
     उसी तरह जब देश को बचाना है
    तो ,आपको न जितिवाद ,भेदबाव , उच नीच को मिटाना होगा ,
      तब जाकर देश का विकाश भी होगा।
       **************
   जो बात मन में सोचो ,उसे बच्चन से प्रकाशित न करे ।
     उसे गुप्त ढंग से मंत्रणा के द्वारा रक्षा करे ,
    और उसे गुप्त ढंग से ही उसे काम में लावे ।
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 किसी एक श्लोक या उसके आधे भाग का मनन करे ,या सीखे ।
    क्योकि भारतीय महिर्षि का कहना है की जैसे भी हो ,
     दान ,अध्यन ,आदि सब करके बीतते हुए दिन को सार्थक करे ।
          इन्हें यू ही न गुजरने दे । 
 क्योकि सिखने और पढ़ने की कोई ऊमर नही होती ।
          ***********
    जिस धर्म में दया का उपदेश न हो उसे त्याग दो , 
       जिस गुरु में विद्या नही हो उसे त्याग दो ,
        हमेशा नाराज रहने वाली स्त्री त्याग दो,
         और सेब विहीन बंधू भाई त्याग दो ।
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  जैसे रगरने ,काटने से ,तपाने से और पीटने से सोने की परीक्षा होती है ,
   ठीक उसी प्रकार त्याग ,गुन ,शील और कर्म से,
     किसी भी मनुष्य की परीक्षा होती है ।
        **************

Friday, 13 May 2016

Chankya niti 8

                                 


                                                 *********
     गया हुआ धन वापस आ सकता है 
      ,रूठा हुआ मित्र भी राजी किया जा सकता है ,
       हाथ से निकली हुई स्त्री भी वापस आ सकती है ,
       और छिनी हुई ज़मीन भी वापस मिल सकता है ,पर
      गया हुआ शरीर कभी नही वापस आ सकता है ।
          *********
         जल में तेल , दुस्ट मनुष्य में कोई गुप्त बात ,
             सुपात्र में थोड़ा सा दान ,
        और समझदार मनुष्य के पास शास्त्र , 
     ये थोरे हुए पात्र के तुरंत फ़ैल ,जाता है ।
           *********
     राजा , अग्नि ,गुरु और स्त्री इनके अधिक पास रहने पर बिनाश निश्चित है ,
          और दूर रहा जाये तो कुछ मतलब नही निकलता है।
      इसलिए इसकी आराधना ऐसे करे की, 
    ना जयदा पास रहे न जयदा दूर रहे ।
      *********
    जो ब्यक्ति प्रसंगनुसार बात करता हो ,
     प्रकृति के अनुशार प्रेम 
     और अपनी शक्ति के अनुशार क्रोध करना जनता है ,
        वही पंडित है ।
     *********
    बुद्धिमान ब्यक्ति को चाहिए की इन बातों को 
     ,किसी के सामने जाहिर न करे ,
     अच्छी तरह से तैयार किया हुआ औषधि , 
          धर्म अपने घर का दोष ,
      और दूषित भोजन  और किसी की निंदा ।
              *********
    यदि गुरू एक अक्षर बोलकर भी ज्ञान अपने शिष्य को देता है ,
       तो पृथ्बी पर ऐसा द्रब्य नही जिसे देकर रीन चूका सकता है।
             *********
     अन्याय के साथ कमाया हुआ धन केबल दस वर्षो तक चलता है ,
     ग्यारवाँ वर्षों में मूलधन सहित नष्ट हो जाता है ।
          *********
       शास्त्र अनंत है ,बहुत सी बिद्याये है ,
        थोड़ा सा समय जीबन है ,
         उसमे बहुत से बिघ्न है ,
       इसलिए समझदार मनुष्य को चाहिए ,
      जो उचित है उसे ग्रहण कीजिये और बाँकी को छोर दीजिये ।
   जैसे हंस पानी में मिला दूध केबल दूध लेता है और पानी छोर देता है ।
                 *********
    कटे जाने पर भी चन्दन के पेड़ अपनी सुगंध नही छोड़ते ,
    बूढ़ा हाथी भी खेलवाड़ नही छोड़ता ,
     ईख  कोल्हू(ईख मशीन) में जाने के बाद भी अपनी मिठास नही छोड़ता ,
    ठीक उशी तरह कुलीन पुरुष निर्धन होकर भी अपना शील और गुण नही छोड़ता ।

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चाणक्य निति ७

                       

 यदि मनुष्य उज्जवल काम करके एक दिन भी जिन्दा रहे
    तो उसका जीबन सफल है 
     ,यदि वह इहलोक और परलोक क़े बिरुध्य कार्य करके एक पल भी जिए 
      तो वह जीना अच्छा नही है ।
                **********

     जो बात बीत गई उसके लिए सोच न करे ।
       और न आगे होने वाली बात की चिंता करे ,
  समझदार लोग सामने की बात को ही हल करने की चिंता करते है ।
                                                     **********

 आयु ,कर्म ,संपत्ति ,विद्या और मरण ये बातें तभी तय हो जाती है ,
    जब वह माँ के गर्भ में रहते है ।
                                                     **********
जिसके हृदय में स्नेह है ,उसको भय है ,
 जिसके पास स्नेह है ,उसको दुःख है
  जिसके पास स्नेह है उसी के पास तरह तरह के दुःख रहते है ।
      जो इसे त्याग दे वह सुख रहता है।
                                                  **********

   जो मनुष्य भविष्य में आने वाली विपत्ति से होसियार है ,
      और जिसकी बुद्धि समय समय पर काम कर जाती है ,
       ये मनुष्य आनंद से आगे बढ़ते जाते है ,इसके बिपरीत ,
   जो भाग्य में लिखा होगा वो होगा ,जो यह सोच कर बैठने वाला है,
      इनका नाश निस्चित है।
                                          **********

  नीच प्रबति के लोग औरों के यश रुपी अग्नि से जलते रहते है ,
      उस पद तक पहुँचने की सामर्थ नही है ,
         इसलिए वे उनकी निंदा करने में लग जाते है।
                                       **********

       अपने मन के अनुशार सुख किसे मिलता है ।
         क्योकि संसार का सुख काम देव के अधीन है ,
          इसलिए जितना सुख मिले उतने में ही खुश् रहे ।
                                         **********

          जैसे हजारों गायों के बिच में बछड़ा ,
          अपने माँ के पास पहुच जाता है ,
          ठीक उसी तरह प्रत्येक मनुष्य का कर्म ,
            अपने स्वामी के पास पहुच जाता है ।
           **********

    जैसे पृथ्बी को खोदने से जल निकल जाता है ,
       उसी तरह गुरु के पास बिद्यमान बिद्या ,
         उसकी सेबा करने से प्राप्त हो जाता है ।
                 **********

     यद्दीपी प्रत्येक मनुष्य को कर्मानुसार फल प्राप्त होता है ,
        और बुद्धि भी कर्मानुसार ही बनती है ।
          फिर भी बुद्धिमान लोग अच्छी तरह सोच समझ कर कोई काम करता है।
                                                 **********

     ऐसे माना जाये तो पृथ्बी पर तीन ही रत्न है , 
       अन्न ,जल और मीठी बातें ।
       पर बेबकुप लोग पत्थर को ही रत्न मानते है ।

Thursday, 12 May 2016

चाणक्य निति 6

                
    सब औसधि में अमृत प्रधान है ,सब सुखो में भोजन प्रधान है ।
    सब इन्द्रियो में नेत्र प्रधान है ,और सब अंगो में मस्तिष्क प्रधान है
                                                  *********

    बिद्यार्थी ,नोकर , राही ,भयभीत आदमी ,भण्डारी और द्वारपाल ,
      इन सबो को सोते हुए भी जग देना चाहिए ।
      सांप ,राजा ,बर्रे ,बालक ,परया कुत्ता ,और मुर्ख मनुष्य
           इन्हें सोते हुए न जगाये ।
        **********

   जिसके नाराज होने से कोई डर नही ,प्रसन्न होने से कुछ आमदनी नही ,।
       ना वह कुछ दे सकता है ,ना कुछ कर सकता है, 
        तो उनके रूस्त होने से क्या फर्क पड़ता है ।
          *********************

     धैर्य से दरिद्रता की ,सफाई से ख़राब बस्त्र की ,
       गर्मी से कुंदन की 
       और शील से कुरूपता भी सुन्दर लगते है ।
         ******************

 धनहीन मनुष्य हिन् नही कहा जा सकता ,वास्तब में वही धनि है ।
 किन्तु जो मनुष्य विद्या रुपी रत्न से हिन् है , वह सभी बस्तु से हिन् है ।
        ******************

  कबि क्या नही देख सकता है ,स्त्री क्या नही कर सकती है ,
    सराबी क्या नही बक सकता है
     और कौए क्या नही खा सकते है ।
                                                 ******************
    लोभी का सत्रु है यायक ,मुर्ख का सत्रु है उपदेश देने वाला ,
    कुलटा स्त्री का सत्रु है उसका पति 
        और चोरो का सत्रु है चंद्रमा ।
          ******************

जिसके पास स्वांग बुद्धि नही है उसे क्या कोई सास्त्र सीखा देखा देगा ।
 जिसकी दोनों आँखे फुट गई है उसके सीसे क्या दिखा देगा ।
          ******************

 बड़े ,बूढ़े से द्वेष करने से मृत्यु होती है ,
   सत्रु से द्वेष करने पर धन का नाश होता है ।
 राजा से द्वेष करने से सर्वनाश होता है 
और ब्राह्मण से द्वेष करने पर कुल का नाश हो जाता है ।
 ******************

  दान शक्ति ,मीठी बात करना ,धर्य धारण करना ।
    समय पर उचित अनुचित का निणर्य करना ,
    ये गुण स्वाभाविक सिद्ध है ,सिखने से नही आते है ।
      ******************

      गृहहस्त के जंजाल में फसे ब्यक्ति को बिद्या नही आ सकती है ।
       मंशा भोजि के हिर्दय में दया नही आती ,
      लोभी के सच्चाई नही आती 
    और कामी पुरुष के पास पवित्रता नही आती ।
     ******************

  दुर्जन ब्यक्ति को चाहे कितने भी उपदेश क्यों नही दे दिया जाइ ,
    वह अच्छी दशा में नही पहुँच सकता है ,
   नीम के पेड़ को चाहे जड़ से सर तक घी और सहद से क्यों न सिच दिया जाये 
     फिर भी उसमे मीठा पन नही आ सकता है ।
      ******************

   जिसके हिर्दय में दया ,भाव , ये सब बातें नही है ,
   वह सैकड़े तीर्थ स्थान का क्यों न भरमन किया हो 
      उसे शांति और सुद्ध नही हो सकता है ।
    जैसे मदिरा का पात्र अग्नि में झुलसने के बाद भी पवित्र नही हो सकता ।
          ******************

 संतो के प्रबचन से दुष्ट आदमी सज्जन हो जाते है ।
  पर सज्जन उनके संग से दुष्ट नही होती है ।
   फूल के सुगंधि को मिट्टी अपनाती है 
  ,पर फूल मिट्टि की सुगंधि को नही अपनाते है ।
           ******************

  शरीर क्षण भंगुर है ,धन भी सदा नही रहने वाला है ,
    मृत्यु बिलकुल समीप विद्धमान है ,
     इसलिए धर्म का संग्रह करो ।
      ******************

  जो पुरुष पराई स्त्री को माता के सामान समझता है ,
परया धन मिट्टी के समान समझता है ,
 अपने तरह सब के सुख दुःख को समझता है ,
 वही पण्डित है ।
   *****************
 बिना सोचे समझे खर्च करने वाला ,
 अन्याय और झगड़ालू करने वाले 
  और सब तरह के स्त्री के लिए बैचेन रहने वाला मनुष्य
     देखते देखते चौपट हो जाते है ।
      *****************

                             धीरे धीरे एक एक बून्द से घरा भरता है । 
                          इसी तरह बिद्या ,धन और धर्म पर लागु होती है 
                        ,इस बस्तु के संग्रह में जल्दी न करे ,
                      धीरे धीरे कर के कभी ये पूरा हो जायेगा ।
                                 ******************

जाने चनक्या निति 5

                                                       
                                                                    चाणक्य निति 5
                                            **
 तीन बातों में संतोष धारण करना चाहिए ,
     स्त्री में ,भोजन ,और धन में ,
    ठीक उसी तरह तीन बातों में संतुष्ट नही होना चाहिए
     अध्यन में ,जप में और दान में

                                         **
 दो ब्राह्मण के बीच में से , अग्नि के बिच से ,
  स्वामी और सबको के बीच में से ,स्त्री और पुरुष के बिच में से , 
    हल और बैल के बिच से कभी नही निकलना चाहिए ।

                                     **
अग्नि ,गुरु ,ब्राह्मण ,गौ ,कुमारी कन्या ,
   बृद्ध और बालक इनको कभी नही पैर से छुए ।

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अपने से प्रबल सत्रु को , उनके अनुकूल चल कर  ,
   दुष्ट सत्रु के उनके प्रतिकूल चलकर , और सामान वाले सत्रु का
    बिनय और बल से निचा दिखाना चाहिए ।

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 हाथी अंकुश से ,घोड़ा चाबुक से  ,सिंग वाले जानवर लाठी से और
      दुर्जन आदमी तलवार से ही ठीक होते है ।

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 राजा में बाहुबल सम्प्पन राजा और ब्राह्मण में परमज्ञानी ब्राह्मण बाली होता है , 
        और रूप और यौबन की मधुरता ,स्त्रियों का सबसे बड़ा बल है ।

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अधिक सीधा सदा होना भी अच्छा नही होता है ।
       जाकर बन में देखो सीधे बृक्ष पहले काट दिए जाते है और टेढ़े
        पेड़ खड़े रह जाते है ।

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 देबता न तो काठ में  ,न पत्थर में  , न मिटटी में रहते है ।
           वे बसभाव में रहते है ,इससे यह निष्कर्ष निकलता है की ,
          भाव ही सबका कारन है ।

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 सन्ति से बढ़कर कोई तप नही ,संतोष से बढ़कर कोई सुख नही।
      तृष्ण से बढ़कर कोई ब्याधि नही और दया से बढ़कर कोई धर्म नही ।

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 गुण बिहिन मनुष्य का रूप ब्यर्थ है ,जिसका सील ठीक नही ,उसका कूल नष्ट है ।
  जिसको सिद्धि नही प्राप्त उसका विद्या ब्यर्थ है ।
 जिस धन का भोग नही किया जाये वह धन ब्यर्थ है ।

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 जमीन पर पंहुचा पानी , पतिब्रता स्त्री , प्रजा का कल्याण करने वाला राजा , 
    और संतोषी ब्राह्मण ये पवित्र मने जाते है ।

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यदि मुर्ख का कूल बड़ा भी हो तो उससे क्या लाभ , 
            चाहे नीच कूल का क्यों न हो ,
          यदि वह बिद्यावान है तो वो वह सभी के द्वरा पूजा जाता है ।

जाने चाणक्य निति 4

                              ॐ ॐ ॐ चाणक्य निति  ४ ॐ ॐ ॐ
                                                     **
       परदेश में बिद्या मित्र है ,
        घर में स्त्री मित्र है, रोगी को दावा मित्र है ,
         मरे हुए मनुय का धर्म मित्र है।                                  

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      समुन्द्र में बर्षा ब्यर्थ है ,
        तृप्त को भोजन ब्यर्थ है ,
        धनवान को धन देना ब्यर्थ है ,
      और दिन के समय दीपक जलना ब्यर्थ है ।

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   मेघ के जल के सामान कोई जल नही है
   आत्मबल के सामान कोई बाल नही है ,
     नेत्र के सामान किसी में तेज नही ,
    और अन्न के सामान कोई प्रिय बस्तु नही है।

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        लक्ष्मी चंचल है ,
    प्राण भी चंचल है  ,
    काहा तक कहे तो सारा संसार चंचल है  ,
    बस केबल धर्म अचल और अटल है।

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  भ्रमण करने वाला राजा पूजा जाता है ।
    भ्रमण करता हुआ ब्राम्हण भी पूजा जाता है ,
 भ्रमण करने योगी पूजा जाता है
 किन्तु भ्रमण करने वाली स्त्री नष्ट हो जाती है ।

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 जैसा होनहार होता है ,
  उसी तरह की बुद्धि हो जाती है ,
       उसी तरह के जैसा कार्य होता है ,
    सहायक भी उसी तरह के मिल जाते है ।

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     मनुष्य स्वांग कर्म करता है ,
    और स्वांग उसका शुभसुभ फल भोगता है
      , वह स्वांग संसार का चक्कर काटता है ,
       और  समय पाकर छुटकारा भी पा जाता है ।

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      राज्य के पाप को राजा ,
      राजा का पाप पुरोहित ,
      स्त्री का पाप उसके पति ,
   और शिष्य के द्वारा किये हुए पाप को गुरु भोगता है ।

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       लालची को धन से ,
      घमंडी को हाथ जोड़कर ,
    मुर्ख को उसके मनवाली करके ,
        और यथार्थ बात से पंडित को बस में करे ।

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      समझदार मनुष्य को चाहिए की ,
     वह बगुले की तरह चारो ओर से इन्द्रियों को समेटकर ,
       और देश काल के अनुशार ,
      अपना बाल देखकर तब अपना कार्य साधे ।

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  अधिक भूख रहते हुए भी कम भोजन में संतुष्ठ रहना ,
   सोते समय होस ठीक रखना ,हल्की नींद सोना ,
     स्वामी भक्ति और बहादुरी ये गुण कुत्ते से सीखना चाहिए ।

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      भरपूर थकावट रहने पर भी अपना काम करना ,
         सर्दी गर्मी का परवाह ना करना ,
      सदा संतोष रहकर जीबन यापन करना ,
       ये तिन गन गधे से सीखना चाहिए ।

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