चाणक्य निति 5
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तीन बातों में संतोष धारण करना चाहिए ,
तीन बातों में संतोष धारण करना चाहिए ,
स्त्री में ,भोजन ,और धन में ,
ठीक उसी तरह तीन बातों में संतुष्ट नही होना चाहिए
अध्यन में ,जप में और दान में
ठीक उसी तरह तीन बातों में संतुष्ट नही होना चाहिए
अध्यन में ,जप में और दान में
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दो ब्राह्मण के बीच में से , अग्नि के बिच से ,
दो ब्राह्मण के बीच में से , अग्नि के बिच से ,
स्वामी और सबको के बीच में से ,स्त्री और पुरुष के बिच में से ,
हल और बैल के बिच से कभी नही निकलना चाहिए ।
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अग्नि ,गुरु ,ब्राह्मण ,गौ ,कुमारी कन्या ,
अग्नि ,गुरु ,ब्राह्मण ,गौ ,कुमारी कन्या ,
बृद्ध और बालक इनको कभी नही पैर से छुए ।
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अपने से प्रबल सत्रु को , उनके अनुकूल चल कर ,
दुष्ट सत्रु के उनके प्रतिकूल चलकर , और सामान वाले सत्रु का
बिनय और बल से निचा दिखाना चाहिए ।
बिनय और बल से निचा दिखाना चाहिए ।
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हाथी अंकुश से ,घोड़ा चाबुक से ,सिंग वाले जानवर लाठी से और
दुर्जन आदमी तलवार से ही ठीक होते है ।
हाथी अंकुश से ,घोड़ा चाबुक से ,सिंग वाले जानवर लाठी से और
दुर्जन आदमी तलवार से ही ठीक होते है ।
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राजा में बाहुबल सम्प्पन राजा और ब्राह्मण में परमज्ञानी ब्राह्मण बाली होता है ,
राजा में बाहुबल सम्प्पन राजा और ब्राह्मण में परमज्ञानी ब्राह्मण बाली होता है ,
और रूप और यौबन की मधुरता ,स्त्रियों का सबसे बड़ा बल है ।
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अधिक सीधा सदा होना भी अच्छा नही होता है ।
जाकर बन में देखो सीधे बृक्ष पहले काट दिए जाते है और टेढ़े
पेड़ खड़े रह जाते है ।
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अधिक सीधा सदा होना भी अच्छा नही होता है ।
जाकर बन में देखो सीधे बृक्ष पहले काट दिए जाते है और टेढ़े
पेड़ खड़े रह जाते है ।
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देबता न तो काठ में ,न पत्थर में , न मिटटी में रहते है ।
देबता न तो काठ में ,न पत्थर में , न मिटटी में रहते है ।
वे बसभाव में रहते है ,इससे यह निष्कर्ष निकलता है की ,
भाव ही सबका कारन है ।
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सन्ति से बढ़कर कोई तप नही ,संतोष से बढ़कर कोई सुख नही।
तृष्ण से बढ़कर कोई ब्याधि नही और दया से बढ़कर कोई धर्म नही ।
सन्ति से बढ़कर कोई तप नही ,संतोष से बढ़कर कोई सुख नही।
तृष्ण से बढ़कर कोई ब्याधि नही और दया से बढ़कर कोई धर्म नही ।
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गुण बिहिन मनुष्य का रूप ब्यर्थ है ,जिसका सील ठीक नही ,उसका कूल नष्ट है ।
गुण बिहिन मनुष्य का रूप ब्यर्थ है ,जिसका सील ठीक नही ,उसका कूल नष्ट है ।
जिसको सिद्धि नही प्राप्त उसका विद्या ब्यर्थ है ।
जिस धन का भोग नही किया जाये वह धन ब्यर्थ है ।
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जमीन पर पंहुचा पानी , पतिब्रता स्त्री , प्रजा का कल्याण करने वाला राजा ,
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जमीन पर पंहुचा पानी , पतिब्रता स्त्री , प्रजा का कल्याण करने वाला राजा ,
और संतोषी ब्राह्मण ये पवित्र मने जाते है ।
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यदि मुर्ख का कूल बड़ा भी हो तो उससे क्या लाभ ,
यदि मुर्ख का कूल बड़ा भी हो तो उससे क्या लाभ ,
चाहे नीच कूल का क्यों न हो ,
यदि वह बिद्यावान है तो वो वह सभी के द्वरा पूजा जाता है ।

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