ॐ ॐ ॐ चाणक्य निति ४ ॐ ॐ ॐ
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परदेश में बिद्या मित्र है ,
घर में स्त्री मित्र है, रोगी को दावा मित्र है ,
मरे हुए मनुय का धर्म मित्र है।
परदेश में बिद्या मित्र है ,
घर में स्त्री मित्र है, रोगी को दावा मित्र है ,
मरे हुए मनुय का धर्म मित्र है।
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समुन्द्र में बर्षा ब्यर्थ है ,
तृप्त को भोजन ब्यर्थ है ,
धनवान को धन देना ब्यर्थ है ,
और दिन के समय दीपक जलना ब्यर्थ है ।
समुन्द्र में बर्षा ब्यर्थ है ,
तृप्त को भोजन ब्यर्थ है ,
धनवान को धन देना ब्यर्थ है ,
और दिन के समय दीपक जलना ब्यर्थ है ।
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मेघ के जल के सामान कोई जल नही है
आत्मबल के सामान कोई बाल नही है ,
नेत्र के सामान किसी में तेज नही ,
और अन्न के सामान कोई प्रिय बस्तु नही है।
मेघ के जल के सामान कोई जल नही है
आत्मबल के सामान कोई बाल नही है ,
नेत्र के सामान किसी में तेज नही ,
और अन्न के सामान कोई प्रिय बस्तु नही है।
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लक्ष्मी चंचल है ,
प्राण भी चंचल है ,
काहा तक कहे तो सारा संसार चंचल है ,
बस केबल धर्म अचल और अटल है।
लक्ष्मी चंचल है ,
प्राण भी चंचल है ,
काहा तक कहे तो सारा संसार चंचल है ,
बस केबल धर्म अचल और अटल है।
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भ्रमण करने वाला राजा पूजा जाता है ।
भ्रमण करता हुआ ब्राम्हण भी पूजा जाता है ,
भ्रमण करने योगी पूजा जाता है
किन्तु भ्रमण करने वाली स्त्री नष्ट हो जाती है ।
भ्रमण करने वाला राजा पूजा जाता है ।
भ्रमण करता हुआ ब्राम्हण भी पूजा जाता है ,
भ्रमण करने योगी पूजा जाता है
किन्तु भ्रमण करने वाली स्त्री नष्ट हो जाती है ।
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जैसा होनहार होता है ,
उसी तरह की बुद्धि हो जाती है ,
उसी तरह के जैसा कार्य होता है ,
सहायक भी उसी तरह के मिल जाते है ।
जैसा होनहार होता है ,
उसी तरह की बुद्धि हो जाती है ,
उसी तरह के जैसा कार्य होता है ,
सहायक भी उसी तरह के मिल जाते है ।
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मनुष्य स्वांग कर्म करता है ,
और स्वांग उसका शुभसुभ फल भोगता है
, वह स्वांग संसार का चक्कर काटता है ,
और समय पाकर छुटकारा भी पा जाता है ।
मनुष्य स्वांग कर्म करता है ,
और स्वांग उसका शुभसुभ फल भोगता है
, वह स्वांग संसार का चक्कर काटता है ,
और समय पाकर छुटकारा भी पा जाता है ।
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राज्य के पाप को राजा ,
राजा का पाप पुरोहित ,
स्त्री का पाप उसके पति ,
और शिष्य के द्वारा किये हुए पाप को गुरु भोगता है ।
राज्य के पाप को राजा ,
राजा का पाप पुरोहित ,
स्त्री का पाप उसके पति ,
और शिष्य के द्वारा किये हुए पाप को गुरु भोगता है ।
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लालची को धन से ,
घमंडी को हाथ जोड़कर ,
मुर्ख को उसके मनवाली करके ,
और यथार्थ बात से पंडित को बस में करे ।
लालची को धन से ,
घमंडी को हाथ जोड़कर ,
मुर्ख को उसके मनवाली करके ,
और यथार्थ बात से पंडित को बस में करे ।
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समझदार मनुष्य को चाहिए की ,
वह बगुले की तरह चारो ओर से इन्द्रियों को समेटकर ,
और देश काल के अनुशार ,
अपना बाल देखकर तब अपना कार्य साधे ।
समझदार मनुष्य को चाहिए की ,
वह बगुले की तरह चारो ओर से इन्द्रियों को समेटकर ,
और देश काल के अनुशार ,
अपना बाल देखकर तब अपना कार्य साधे ।
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अधिक भूख रहते हुए भी कम भोजन में संतुष्ठ रहना ,
सोते समय होस ठीक रखना ,हल्की नींद सोना ,
स्वामी भक्ति और बहादुरी ये गुण कुत्ते से सीखना चाहिए ।
अधिक भूख रहते हुए भी कम भोजन में संतुष्ठ रहना ,
सोते समय होस ठीक रखना ,हल्की नींद सोना ,
स्वामी भक्ति और बहादुरी ये गुण कुत्ते से सीखना चाहिए ।
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भरपूर थकावट रहने पर भी अपना काम करना ,
सर्दी गर्मी का परवाह ना करना ,
सदा संतोष रहकर जीबन यापन करना ,
ये तिन गन गधे से सीखना चाहिए ।
भरपूर थकावट रहने पर भी अपना काम करना ,
सर्दी गर्मी का परवाह ना करना ,
सदा संतोष रहकर जीबन यापन करना ,
ये तिन गन गधे से सीखना चाहिए ।
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