किसी भी चीज़ को इसलिए नही मनो की ,तुम्हारे दादा जी ने कहा है।
किसी भी चीज पर इसलिए यकिन नही करो की तुम्हारे शिक्षक ने कहा है।
किसी भी चीज पर इसलिए विस्वास नही करो की तुम्हारे शास्त्र में लिखा है ।
हर चीज को जानो परको और सत्य पाओ तब उसपर विस्वास करो ।
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साइंस ,धर्म ,और कल्चर हमेशा चुनौती देता है ।
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लक्ष्य तक पहुचने के दो रास्ते होते है ,एक कठिन और एक आसान ,
सरल रास्ते आपको बार बार रुलाएगा
जो की आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने नही देगा ,
और रास्ते से भटका देगा ।
कठिन रास्ते आपको एक बार रुलाएगा
और आपको अपने लक्ष्य तक पंहुचा देगा ।
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सच्चा योद्धा ना बल से बनता है,
न ही शास्त्र से बनता है ,
वो तो अपने बुद्धि से बनता है।
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जब घर के दिवार में दीमक लग जाये तो ,
छत को बचने के लिए दीमक को मिटाना पड़ेगा ।
उसी तरह जब देश को बचाना है
तो ,आपको न जितिवाद ,भेदबाव , उच नीच को मिटाना होगा ,
तब जाकर देश का विकाश भी होगा।
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जो बात मन में सोचो ,उसे बच्चन से प्रकाशित न करे ।
उसे गुप्त ढंग से मंत्रणा के द्वारा रक्षा करे ,
और उसे गुप्त ढंग से ही उसे काम में लावे ।
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किसी एक श्लोक या उसके आधे भाग का मनन करे ,या सीखे ।
किसी एक श्लोक या उसके आधे भाग का मनन करे ,या सीखे ।
क्योकि भारतीय महिर्षि का कहना है की जैसे भी हो ,
दान ,अध्यन ,आदि सब करके बीतते हुए दिन को सार्थक करे ।
इन्हें यू ही न गुजरने दे ।
क्योकि सिखने और पढ़ने की कोई ऊमर नही होती ।
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जिस धर्म में दया का उपदेश न हो उसे त्याग दो ,
जिस धर्म में दया का उपदेश न हो उसे त्याग दो ,
जिस गुरु में विद्या नही हो उसे त्याग दो ,
हमेशा नाराज रहने वाली स्त्री त्याग दो,
और सेब विहीन बंधू भाई त्याग दो ।
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जैसे रगरने ,काटने से ,तपाने से और पीटने से सोने की परीक्षा होती है ,
ठीक उसी प्रकार त्याग ,गुन ,शील और कर्म से,
किसी भी मनुष्य की परीक्षा होती है ।
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