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गया हुआ धन वापस आ सकता है
,रूठा हुआ मित्र भी राजी किया जा सकता है ,
हाथ से निकली हुई स्त्री भी वापस आ सकती है ,
और छिनी हुई ज़मीन भी वापस मिल सकता है ,पर
गया हुआ शरीर कभी नही वापस आ सकता है ।
गया हुआ शरीर कभी नही वापस आ सकता है ।
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जल में तेल , दुस्ट मनुष्य में कोई गुप्त बात ,
सुपात्र में थोड़ा सा दान ,
और समझदार मनुष्य के पास शास्त्र ,
ये थोरे हुए पात्र के तुरंत फ़ैल ,जाता है ।
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राजा , अग्नि ,गुरु और स्त्री इनके अधिक पास रहने पर बिनाश निश्चित है ,
और दूर रहा जाये तो कुछ मतलब नही निकलता है।
इसलिए इसकी आराधना ऐसे करे की,
इसलिए इसकी आराधना ऐसे करे की,
ना जयदा पास रहे न जयदा दूर रहे ।
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जो ब्यक्ति प्रसंगनुसार बात करता हो ,
प्रकृति के अनुशार प्रेम
और अपनी शक्ति के अनुशार क्रोध करना जनता है ,
वही पंडित है ।
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बुद्धिमान ब्यक्ति को चाहिए की इन बातों को
,किसी के सामने जाहिर न करे ,
अच्छी तरह से तैयार किया हुआ औषधि ,
धर्म अपने घर का दोष ,
और दूषित भोजन और किसी की निंदा ।
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यदि गुरू एक अक्षर बोलकर भी ज्ञान अपने शिष्य को देता है ,
तो पृथ्बी पर ऐसा द्रब्य नही जिसे देकर रीन चूका सकता है।
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अन्याय के साथ कमाया हुआ धन केबल दस वर्षो तक चलता है ,
ग्यारवाँ वर्षों में मूलधन सहित नष्ट हो जाता है ।
ग्यारवाँ वर्षों में मूलधन सहित नष्ट हो जाता है ।
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शास्त्र अनंत है ,बहुत सी बिद्याये है ,
थोड़ा सा समय जीबन है ,
उसमे बहुत से बिघ्न है ,
इसलिए समझदार मनुष्य को चाहिए ,
जो उचित है उसे ग्रहण कीजिये और बाँकी को छोर दीजिये ।
जो उचित है उसे ग्रहण कीजिये और बाँकी को छोर दीजिये ।
जैसे हंस पानी में मिला दूध केबल दूध लेता है और पानी छोर देता है ।
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कटे जाने पर भी चन्दन के पेड़ अपनी सुगंध नही छोड़ते ,
बूढ़ा हाथी भी खेलवाड़ नही छोड़ता ,
बूढ़ा हाथी भी खेलवाड़ नही छोड़ता ,
ईख कोल्हू(ईख मशीन) में जाने के बाद भी अपनी मिठास नही छोड़ता ,
ठीक उशी तरह कुलीन पुरुष निर्धन होकर भी अपना शील और गुण नही छोड़ता ।
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