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Thursday, 7 May 2015

सबसे बड़े प्रयोग की महामशीन फिर शुरू

सबसे बड़े प्रयोग की महामशीन फिर शुरू


ब्रह्मांड की कई गुत्थियां सुलझाने के लिए यूरोप में महामशीन (लार्ज हैडरॉन कोलाइडर) रविवार को फिर से चालू कर दी गई। फिजिक्स की दुनिया में इस सबसे बड़े प्रयोग में दुनिया भर के वैज्ञानिक जुटे हैं। दो साल पहले इसे अपग्रेड करने के लिए बंद कर दिया गया था। पिछली बार जब यह मशीन 2010 से 2013 तक चली थी, तब हिग्स बोसोन यानी गॉड पार्टिकल का राज जानने में मदद मिली थी। कहते हैं कि इस सृष्टि में हर जो चीज अस्तित्व में है, गॉड पार्टिकल ही उसे रूप और आकार देता है। महामशीन को लेकर विवाद भी रहा है। मशहूर भौतिकशास्त्री स्टीफन हॉकिंग भी कह चुके हैं कि गॉड पार्टिकल अगर अस्थिर हुआ तो उसमें समूची सृष्टि को तबाह करने की क्षमता है, लेकिन निकट भविष्य में इस तरह की प्रलय की आशंका नहीं है।
यह महामशीन 27 किलोमीटर लंबी गोलाकार सुरंग में बनी है। इसमें उपकरणों, सुपर कंप्यूटरों और तारों का जाल बिछा हुआ है। अब इसमें रोशनी की रफ्तार से प्रोटॉन आदि कणों की एकदूसरे से टक्कर कराई जाएगी, जो पहले से दोगुनी होगी। वास्तविक टक्कर कम से कम एक महीने बाद शुरू होगी। इसके नतीजे अगले साल के मध्य तक आने की संभावना है। इस प्रयोग से डार्क मैटर खोज निकालने की उम्मीद भी है। माना जाता है कि हमारे ब्रह्मांड का 96 फीसदी हिस्सा इसी डार्क मैटर से बना है। यह ऐसे जाल की तरह है, जिसने सभी दिखने लायक चीजों जैसे आकाशगंगाओं और ग्रहों को अपनी जगह पर टिका रखा है। इस प्रयोग से फिजिक्स के नए नियम सामने आ सकते हैं। कई नए अनजान कणों का पता चल सकता है। कुछ ऐसा भी सामने आ सकता है, जिसे वैज्ञानिक अभी तक नहीं जानते।

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