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Wednesday, 13 May 2015

मैमथ (अंग्रेजी:Mammoth)




Reference :- http://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%AE%E0%A4%A5

मैमथ (अंग्रेजी:Mammoth), एक विशालकाय हाथी सदृश जीव था जो अब विलुप्त हो चुका है। इसका वैज्ञानिक नाम 'मैमुथस प्राइमिजीनियस'(Mammuthus primigenius) है। यह साइबेरिया के टुंड्रा प्रदेश में बर्फ में दबे एक हाथी का नाम है, जो अब विलुप्त हो चुका है, परन्तु बर्फ के कारण जिसका संपूर्ण मृत शरीर आज भी सुरक्षित मिला है। अनुमान लगाया जाता है कि फ्रांस में यह जंतु हिम युग के अंत तक और साइबीरिया में संभवत: और आगे तक जीवित रहा होगा। मैमथ शब्द की उत्पत्ति साइबीरियाई भाषा के 'मैमथ' शब्द से मानी जाती है, जिसका अभिप्राय 'भूमि के नीचे रहनेवाले जंतु' से होता है। चूँकि इस हाथी का शरीर सदैव जमे हुए बर्फीले कीचड़ के नीचे ही पाया गया है, अत: उस देश के किसान मैमथ को एक प्रकार का वृहत छछूँदर ही समझते थे।

फ्रांस की गुफाओं में पूर्व प्रस्तरयुगीन (Palaeolithic) शिकारी मानव के उपर्युक्त हाथी के बहुत से चित्र बनाकर छोड़े हैं, जिससे स्पष्ट हो जाता है कि यह जंतु पहले यूरोप (और संभवत: भारत और उत्तरी अमरीका, जहाँ उससे मिलते जुलते हाथियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं) में रहा करता था और हिम युग के समाप्त होने और बर्फ के खिसकने पर भोजन की खोज में उत्तर की ओर बढ़ा और वहाँ की दलदली भूमि में अपने भारी शरीर के कारण धँस गया तथा दलदल के साथ जम गया।

आकार में मैमथ वर्तमान हाथियों के ही बराबर होते थे, परंतु कई गुणों में उनसे भिन्न थे। उदाहरणार्थ वर्तमान हाथियों के प्रतिकूल मैमथ का शरीर भूरे और काले तथा कई स्थानों पर जमीन तक लंबे बालों से ढँका था, खोपड़ी छोटी और ऊँची, कान छोटे तथा मैमथ दंत (tusk) अत्यधिक (14 फुट तक) लंबे (यद्यपि कमजोर) थे। मैमथ दंत की एक विशेषता यह भी थी कि वे सर्पिल (spiral) थे। मैमथ दंत इतनी अच्छी दशा में सुरक्षित हैं कि आज भी उद्योग में उनका उपयोग है और मध्कालीन समय में तो साइबेरिया से लेकर चीन के मध्य उनका अच्छा व्यापार भी होता था। सच तो यह है कि बर्फ में दबे रहने के कारण मैमथों, का सारा शरीर ही इतनी अच्छी दशा में सुरक्षित मिला है कि न केवल इनका मांस खाने योग्य पाया गया वरन उनके मुँह और आमाशय में पड़ा उस समय का भोजन भी अभी तक सुरक्षित मिला है।


हथिनी कैसे पैदा करेगी मैमथ का बच्चा ?

वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने विलुप्त हो चुके जीव 'वूली मैमथ' या विशालकाय हाथी का पूरा जीनोम सीक्वेंस तैयार कर लिया है.

अमरीका की वैज्ञानिकों की एक टीम पहले से ही हाथी के स्टेम सेल्स में मैमथ के जीन डालकर मैमथ के विषय में अध्ययन करने के प्रयास कर रही है.

वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि मैमथ अपने दूसरे संबंधियों से कैसे अलग थे और उनके शरीर में ऐसे क्या बदलाव आए जिनके कारण वे हिम युग में भी ज़िंदा रह पाए.

यह नया जीनोम शोध करंट बॉयोलाजी नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

स्टॉकहोम के स्विडिश म्यूज़ियम ऑफ़ नैचुरल हिस्ट्री के डॉक्टर लव डेलेन ने बीबीसी से कहा कि इस डीएनए सीक्वेंस से उन वैज्ञानिकों को मदद मिलेगी जो इस जीव को दोबारा जीवित करना चाहते हैं.

फिर ज़िंदा होंगे मैमथ?

मैमथ का जीनोम स्वीक्वेंस तैयार करते स्विडिश म्यूज़ियम ऑफ़ नैचुरल हिस्ट्री के वैज्ञानिक

उन्होंने कहा, "एक ज़िंदा मैमथ कैसे चलता है और कैसा व्यवहार करता है, यह देखना मज़ेदार होगा."

हालांकि डॉक्टर डेलेन और उनके साथ काम करने वाले वैज्ञानिक मैमथ को दोबारा जीवित करने के प्रयास नहीं कर रहे हैं, पर सेन फ़्रांसिस्को स्थित संस्था लॉन्ग नाओ फ़ाउंडेशन ऐसा करना चाहती है.

अपनी वेबसाइट पर नाओ फ़ाउंडेशन कहती है, कि उसका उद्देश्य ऐसे मैमथ पैदा करना है जो यूरेशिया और उत्तरी अमरीका के टूंड्रा के ठंडे इलाक़ों में रह सकें.

यह संस्था हार्वर्ड यूनीवर्सिटी की उस टीम की मदद कर रही है जो जेनेटिक इंजीनियरिंग की तकनीक के ज़रिए हाथियों में मैमथ के जीन डालने का प्रयास कर रही है.



संस्था का कहना है कि अभी तक उसने मैमथ के ख़ून, चर्बी और बालों के जींस हाथी मे डाले हैं.

2018 में क्लोन

शोधकर्ता मैमथ के रेड ब्लड सेल निर्मित कर इन सेल की ऑक्सीजन रखने की क्षमता के बारे में जानना चाहते हैं ताकि मैमथ के शरीर के बारे में अधिक जानकारी मिल सके.

शोधकर्ताओं का दावा है कि ऐसे ही प्रयोगों से पता चल सकेगा कि मैमथ की चर्बी और बाल कैसे बढ़ते थे.

लांग नाओ फ़ाइंडेशन का कहना है कि इस तरीक़े का इस्तेमाल कर मैमथ का क्लोन तैयार करने के प्रयास 2018 में शुरू हो सकेंगे.



हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह मैमथ को पैदा करने के रास्ते में कई रुकावटें हैं.

यूनीवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया की प्रोफ़ेसर बेथ शापिरो जिन्होंने मैमथ के क्लोन बनाने पर क़िताब लिखी है कहती हैं, "प्रयोगशाला में एक सेल जिसके जींस में कुछ बदलाव किए गए हों और एक ज़िंदा जानवर में बहुत फ़र्क़ है."

शापिरो कहती हैं, "उस सेल से भ्रूण बना कर उसे एक कोख में स्थापित करना होगा. हमें एक गर्भाधान कराना होगा और यह कोशिश करनी होगी कि यह गर्भाधान कामयाब हो."

हथिनी के लिए सही नहीं

डेलेन कहती हैं कि ऐसा करना हथिनी के लिए सही नहीं होगा.

वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि ऐसी कोशिश करना हथिनी के लिए कष्ट का कारण होगा और ऐसा करना नैतिक तौर पर ठीक नहीं होगा."



शापिरो मैमथ को दोबारा जीवित करने के विचार का विरोध करती हैं.

वे कहती हैं कि हाथी सामाजिक प्राणी होते हैं. एक मैमथ पैदा कर उसे अकेला बांध कर रखना सही नहीं होगा. जब तक हम हाथी का बिना इस्तेमाल किए इस तरह के कई मैमथ ना बना सकें इस बारे में सोचना ठीक नहीं.

उन्हें लगता है कि इस जीनोम से मैमथ के बारे में और भी बहुत सी जानकारियाँ मिल सकेंगी.

मैमथ आज से चार हज़ार साल पहले विलुप्त हो गए थे. विलुप्त होने के समय मैमथ के साथ क्या हुआ था यही जानने के लिए डॉक्टर डेलेन और उनके सहयोगियों ने इसके डीएनए को सीक्वेंस तैयार किया है.



जेनेटिक डाटा से ये भी पता चलता है कि तीन लाख साल पहले मैमथ की जनसंख्या में गिरावट आई थी.

हजारों साल पहले धरती पर रहने वाले मैमथ का विनाश मौसम के बदलावों की वजह से हुआ न कि इंसानों की वजह से, शोध में मिले नए सबूत यही बताते हैं.

एक डीएनए विश्लेषण से पता लगा है कि धरती पर मौसम में बदलाव की वजह से मैमथ का अंत कहीं पहले हो गया था.

डीएनए विश्लेषण से पता चलता है कि यूरोप में मैमथ बड़ी तादाद में थे जिनका अंत करीब 30 हज़ार साल पहले हुआ.

इस शोध के नतीजों को प्रॉसीडिंग्स ऑफ़ रॉयल सोसायटी बी में प्रकाशित किया गया है.

पहले कई शोधकर्ताओं का मानना था कि दमदार मैमथ न केवल बहुतायत में थे बल्कि अपने समय में वो धरती पर खासे फले-फूले.

लेकिन इस बारे में शोध कर रहे स्वीडिश म्यूज़ियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री के वैज्ञानिक डॉक्टर लव डेलन के अध्ययन ने पुरानी मान्यता को बदला है.

डॉक्टर डेलन कहते हैं, "जो तस्वीर उभर रही है उसके अनुसार मैमथ गतिशील प्रजाति थी, जो स्थानीय उन्मूलन, विस्तार और अप्रवास से गुज़री. ये जानना वाकई रोमांचकारी है कि तब इतना कुछ हो

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