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Saturday, 23 May 2015

Dr. Meghnath saha Indian scientists


                                         Dr. Meghnath saha
                                          Indian scientists

प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. मेघनाथ साहा को जन्म 6 अक्टूबर, 1893 ई. कोपूर्वी बंगाल के ढाका ज़िले के सिओराताली नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता जगन्नाथ साहा साधारण व्यापारी थे। मेघनाथ साहा की शिक्षा पहले कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में हुई थी। इन्हें विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में पूर्वी बंगाल भर के छात्रों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। बी.एस.सी. और एम.एस.सी. में भी वे सर्वोच्च रहे थे
शिक्षा पूरी होते ही मेघनाथ साहा को 'कोलकाता विश्वविद्यालय' के विज्ञान विभाग में नियुक्ति मिल गई। वहीं पर उन्होंने उच्च अनुसंधान कार्य किया और डी.एस.सी. की उपाधि प्राप्त की। तारा भौतिकी पर एक निबन्ध लिखकर इन्होंने एक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त किया।

खोज

डॉ. मेघनाथ साहा ने तारों के ताप और वर्णक्रम के निकट संबंध के भौतकीय कारणों को खोज निकाला था। अपनी इस खोज के कारण 26 वर्ष की उम्र में ही इन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हो चुकी थी। इसी सिद्धांत को तारों के वर्णक्रम पर लगाकर इन्होंने आण्विक वर्णक्रम संबंधी अनेक गुत्थियों को सुलझाया। इनके अनुसंधान से सूर्य तथा उसके चारों ओर अंतरिक्ष में दिखाई पड़ने वाली प्राकृतिक घटनाओं के मुख्य कारण ज्ञात हो सके।




साहा का अविस्मरणीय योगदान

वैज्ञानिक मेघनाद साहा



भारतीय खगोल वैज्ञानिक मेघनाद साहा का खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान है.

मेघनाद साहा की 16 फरवरी को पुण्यतिथि

वास्तव में साहा के तापीय आयनीकरण (थर्मल आयोनाइजेश) के सिद्धांत को खगोल विज्ञान में तारकीय वायुमंडल के जन्म और उसके रासायनिक संगठन की जानकारी का आधार माना जा सकता है.

नेहरू तारामंडल की निदेशक डा.रत्नाश्री ने कहा कि खगोल विज्ञान के क्षेत्र में साहा के कामों का प्रभाव दूरगामी रहा है. बाद में विदेशों में किए गए कई शोध उनके सिद्धातों पर आधारित हैं. साहा समीकरण ने सारी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया और यह समीरकरण तारकीय वायुमंडल के विस्तृत अध्ययन का आधार बना.

साहा समीकरण तारों के रासायनिक संगठन की व्याख्या से संबंधित है. भारतीय कैलेंडर के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में उन्होंने बताया कि साहा देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में प्रचलित पंचागों में सुधारों के लिए गठित समिति के अध्यक्ष थे. इन पंचागों में कई विरोधाभास और विभिन्नताएं थी. समिति ने इन विभिन्नताओं को दूर करने की दिशा में काम किया. आज प्रचलित कैलेंडरों का आधार भी यही है.

मेघनाद साहा का जन्म ढाका से 40 किलोमीटर शिओरताली नामक छोटे से गांव में छह अक्तूबर 1893 को हुआ. गरीबी के कारण साहा को काफी संघर्ष का सामान करना पड़ा. साहा के पिता उनकी उच्च शिक्षा के खिलाफ थे वे चाहते थे कि साहा दुकानदारी में उनकी मदद करें लेकिन अपने भाई और अध्यापकों की प्ररेणा से उन्होंने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में दाखिला लिया और उच्च शिक्षा ग्रहण की.

1920 में उनके सौरवर्ण का आयनीकरण और सूर्य में विद्यमान तत्वों से संबंधित लेख जानी मानी विज्ञान पत्रिका ‘फिलासाफिकल’ में प्रकाशित हुए. इन लेखों ने साहा को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बना दिया.

वह इलाहाबाद विविद्यालय में प्राध्यापक थे और इसके बाद कलकत्ता विविद्यालय में विज्ञान फैकल्टी के प्राध्यापक एवं डीन भी रहे.16 फरवरी 1956 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.





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